सुदेवी माताजी : भारत में गौसेवा को समर्पित ‘जर्मन मैया’

आज टीवी पर न्यूज सुनते हुए एक समाचार ने मुझे चौंकाया कि मथुरा के गोवर्धन क्षेत्र में गौ सेवा कर रही जर्मन महिला के वीज़ा की अवधि समाप्त हो गयी है.

निश्चित ही मेरे लिए ये शोकिंग न्यूज थी. ये जर्मन महिला फेसबुक के तमाम मित्रों के लिए जानी पहचानी गौ सेवक ही होंगी. ये वो ही जर्मन मईया है जिनका परिचय 2015 में एक मित्र ने फेसबुक पर करा कर उनकी गौशाला को आर्थिक सहायता करने की अपील की थी.

मैं तब अपने कुछ परिजनों सहित गोवर्धन के राधाकुंड स्थित उनकी गौ शाला पर गया था. गौशाला पहुँच कर वहाँ मौजूद तमाम घायल और बीमार गायों के साथ कृशकाय उक्त जर्मन महिला को देख कर मैं दंग रह गया.

यद्यपि चरण स्पर्श करने में मेरे अन्दर प्रोटोकोल का एक अहम सा मौजूद रहने से मैं चरण स्पर्श करने के मामले में हमेशा ठिठक जाता हूँ लेकिन उक्त गौ सेविका के चरण स्पर्श करने को मैं अनायास ही झुक गया.

हम लोग बैठे तब उन जर्मन मैया ने जो बताया और हमने स्वयं जो देखा अनुभव किया उसके अनुसार—–

जर्मनी की रहने वाली महिला जिनका नाम फेडेराइक इरिना ब्रुनिंग 1978 में भारत घूमने के लिए आई तब मथुरा में अपने गुरू की खोज में इधर उधर भटकते हुए एक गाय खरीद ली.

उस गाय की देखभाल करते हुए धीरे धीरे इरिना का जुड़ाव इतना गहरा हो गया कि उन्होंने गाय से संबधित किताबें पढ़ना और हिंदी बोलना भी शुरू कर दिया. कुछ दिनों बाद इरिना की गायों के प्रति हमदर्दी इतनी बढ़ गई कि उन्होंने बेकाम की, बूढ़ी और घायल लावरिस गायों को पालने का संकल्प ले लिया.

आज गोवर्धन के राधा कुंड के पास उनका ‘सुरभि गौ’ सेवा निकेतन है. इरिना अब ‘सुदेवी माताजी’ या ‘जर्मन मैया’ के नाम से भी जानी जाती है. आज उनकी गौशाला में लगभग डेढ़ हजार गाय और बछड़े हैं. जगह की कमी होने के बावजूद भी वह असहाय गाय मिलने पर उसे गौशाला में रख ही लेती हैं.

सुरभि निकेतन में गौशाला बीमार, अंधी या बुरी तरह से जख्मी हुई गायों को अलग अलग चैंबरों में रखा जाता है. जहां उनकी पर पूरी देखभाल की जाती है. गौशाला में 60 लोग काम करते हैं.

गौशाला के हर महीने होने वाले गायों की खुराक, दवा-पानी और देखभाल करने वाले कर्मचारियों आदि 22 लाख रुपए का खर्च वह बर्लिन में उनकी जमीन से आने वाले किराए से उठाती हैं.

लेकिन गौ रक्षकों की सरकार में आज इरिना को भारत की नागरिकता मिलना तो दूर उनको वीज़ा की अवधि भी समाप्त हो गयी है. जर्मन मैया ने क्षेत्रीय संसद हेमा मालिनी जी से अपना वीज़ा बढ़वाए जाने की सिफारिश करने की मांग की है.

समझ में नहीं आता Sushma Swaraj जी चाहे जिसको वीज़ा देती हैं. लन्दन तक से वीज़ा बढ़ाने की सिफारिश करती हैं. लेकिन भारत में रह कर भारतीय बन चुकी इस गौ सेविका के वीज़ा के समाप्त होने के समाचार क्यों आ गये!

मित्रों, जितना संभव हो सके अपने अपने माध्यमों से इनको आजीवन वीज़ा देने की मांग भारत सरकार से करें. ये भी बूढ़ी बीमार गायों के लिए हमारी गिलहरी सेवा होगी.

MYogiAdityanathजी कृपया प्राथमिकता के आधार पर इस मामले को लीजिएगा.

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