अखिलेश के बाद अब योगी को ठिकाने लगाने सक्रिय है चंटू, बंटू, सोनू और मोनू का गैंग

एक ऑडियो क्लिप घूम रही है यूपी भर में 3-4 दिन से… whatsapp पर… मेरे पास कई लोगों ने भेजी… उसको सुनने के बाद विचार आया…

2012 में यूपी में अखिलेश यादव को भी प्रचण्ड बहुमत मिला था, लगभग दो तिहाई सीटें… अखिलेश के पास पूरा मौका था कि खुद को राष्ट्रीय स्तर का नेता स्थापित करने का…

वे राहुल गांधी को आसानी से नेपथ्य में धकेल सकते थे… लेकिन नहीं हो पाया… आसपास के लोग, समर्थक अच्छे होने चाहिए, आलोचक भी पास होने चाहिये, जो कहे या करे उसको तौल कर राय देने वाला भी होना चाहिए…

सरकार आने के कुछ महीने में ही चंटू, बंटू, सोनू और मोनू यादव सक्रिय हो गए पूरे तन्मयता से अखिलेश को यादव नेता साबित करने को… 2015 आते आते अखिलेश मुस्लिम तुष्टिकरण करने वाले यादव नेता के रूप में स्थापित हो गए…

गली, मोहल्ले, शहर, गांव में सक्रिय इस चंटू, बंटू, सोनू और मोनू यादव के ग्रुप ने अखिलेश को 2017 में तारे दिखा दिए… एक्सप्रेस वे, मेट्रो, स्टेडियम, हस्पताल किसी काम न आए…

राजनीति किस करवट बैठेगी कोई इसकी भविष्यवाणी नहीं कर सकता लेकिन मुस्लिम तुष्टिकरण करने वाले स्थापित यादव नेता के रूप में अखिलेश अब कई वर्षों तक सत्ता से दूर ही रहेंगे …

2017 में गोरखपुर के गोरखपीठ के महंत योगी आदित्यनाथ अब सत्ता की शोभा बढ़ा रहे हैं… गोरखपुर मण्डल के हर घर का कोई न कोई शुभ कार्य बाबा के मठ के आशीर्वाद से सम्पन्न होता है… मुण्डन, जनेऊ, सगाई, मुंह दिखाई, वरक्षा, शादी, सत्यानारायण कथा, या फिर नव दम्पत्ति को आशीष…

चुनाव के समय गोरखपुर का डायलॉग है, “….बाबा झूठों दउरत हवे, लाख से ऊपर से ऐसे जीत जइहैं …” लोग जीत के वोट का अंतर गिनते हैं, शर्त लगाते हैं… पूरा हिन्दू एकजुट वोट देता है मंदिर और महंत को… चुनाव प्रचार की गाड़ी की धूल को लोग माथे लगाते हैं… बाबा और मठ हिन्दू मान है, शान है, सम्मान है…

लेकिन इधर अब चंटू, बंटू, सोनू और मोनू सिंह सक्रिय हो चुके हैं… योगी आदित्यनाथ को ये लोग अजय सिंह बिष्ट साबित करने को तुले हुए हैं… ये चंटू, बंटू, सोनू और मोनू सिंह पूरी तन्मयता से लगे हैं ये साबित करने को कि योगी मठ छोड़ के ठाकुर नेता बन चुके हैं…

यूपी सरकार के काम, जैसे गांव में 18 घण्टे बिजली, सड़कों पर युद्ध स्तर पर काम, बनारस, गोरखपुर, इलाहाबाद, कानपुर में मेट्रो योजना, किसान कर्ज़ माफी, रोजगार उद्योग के लिए समिट और समझौते आदि जैसे काम… कानून व्यवस्था पर अप्रत्याशित काम… ये सब नेपथ्य में भेजने को तैयार इन चंटू, बंटू, सोनू और मोनू सिंह का गैंग…

2014 के चुनाव में मोदी ने जब जातियों का बंधन तोड़ कर यूपी से प्रचण्ड जीत हासिल की और उसको 2017 तक बांध के रखा उसको चंटू, बंटू, सोनू और मोनू सिंह गैंग पलीता लगाने पर तुली हुई है…

2019 में हालांकि मोदी के चुनाव में असर नहीं पड़ना लेकिन 2019 के बाद आदरणीय योगी आदित्यनाथ की परीक्षा होगी कि वो इन चंटू, बंटू, सोनू और मोनू गैंग को ठिकाने लगा पाते हैं या नहीं… अगर योगी जी इन चंटू सिंह और बंटू सिंह को ठिकाने लगा देते हैं तो दिल्ली कब्जे में होगी…

जातिवाद की बीमारी बहुत गंदी होती है… जो एक बार इस मानसिक अवसाद में फंसा वो सोच समझ से गरीब हो जाता है… उसको जाति के आधार पर श्रीप्रकाश शुक्ल, हरि शंकर तिवारी, अमर मणि त्रिपाठी में हीरो दिखेगा… उसको बृजेश सिंह, अमर सिंह, मुन्ना बजरंगी, वीरेंद्र शाही में हीरो नज़र आता है… उसको बबलू श्रीवास्तव में हीरो नज़र आता है, उसको लालू यादव में मसीहा नज़र आता है… उसको ब्रम्हेश्वर मुखिया में हीरो नज़र आता है…

इस जातिवाद की लाइलाज बीमारी से बचें… हिन्दू समाज को मज़बूत बनाए… प्रदेश और देश की सोचें… देश प्रदेश सुरक्षित होंगे तो बभनौटी, ठकुराना, अहिरौटी, कोईरौटी, धोबी मोहल्ला, चमरौटी आदि भी सुरक्षित होंगे और विकास भी होगा…

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