संवाद : ये जादू नहीं, ये तैयारी है मेरे बिना रहने की

उसने कहा
जब तुम शर्ट की आस्तीन
फोल्ड कर लेते हो
तब अच्छे लगते हो

मैंने पूछा क्यों?

तुम नजर आते हो आत्मविश्वासी
लगता है हर अड़चन के बाद भी
एकदिन पहुंच ही जाओगे मुझ तक

यह सुनकर मैं हंस पड़ा
और उसनें प्यार से
एक बार और फोल्ड कर दी
मेरी शर्ट की आस्तीन…
***

मैंने पूछा
तुम्हें मैं सबसे खराब कब लगता हूँ

उसने तुरन्त दिया जवाब
जब तुम
शर्ट इन करके उसे मेंटेन करने की
करते हो खराब कोशिश

मैंने पूछा क्यों इसमें क्या खराबी है?

उस वक्त तुम बेफिक्र नहीं दिखते
इससे बड़ी क्या खराबी होगी
किसी मुलाकात में…
**

उसने कहा
एक खराब आदत बताओं मेरी
मैंने कहा एक नही दो हैं

मुझे खोने से नहीं डरती
खुद को पाना नहीं चाहती

ये तो अच्छी आदत है
उसने हँसते हुए कहा
मगर तुम्हें पता है
इसलिए मान लेती हूँ
इन्हें खराब…
**

मैंने पूछा
तुम्हारी खुशबू
तुम्हारे बिना भी रहती है आसपास
ये क्या जादू है?

उसने कहा
ये जादू नहीं कोई
ये तैयारी है
मेरे बिना रहने की…

– डॉ. अजित

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