गौरक्षा – 5 : सौ से अधिक बीमारियों का इलाज संभव है सिर्फ़ देशी गाय के घी से

पिछले चार भाग में मुख्य समस्या जो उभर कर आयी है वह गाय पालने का ख़र्च और दूध की मात्रा तथा अन्य उपयोगी जानकारी का अभाव है. इस लेख में कुछ बिंदुओ को ध्यान में रखकर उजागर करने की कोशिश करता हूँ.

पहली बात तो यह है कि गाय को रखने का ख़र्च लगभग 3-4 किलो भूसा 1 किलो दाना और कुछ हरा चारा है हरा चारा आपको खेत में उगाना है या चरागाह की मदद लेनी है.

चारागाह को बड़े बड़े नेता मंत्री और लोकल नेता जी लोग चर गए या आस पास के दबंग लोगों ने क़ब्ज़ा कर लिया, अब आपको उसके लिए धीरे धीरे संघर्ष करना है. अपनी बात उठाइए, ट्वीट करिए अपने लोकल नेता को बोलिए ख़ाली करवाए नहीं तो वोट न देंगे धमकाए कुछ भी करके ख़ाली करवाइए या खेत में उगाइए!

दूध की मात्रा एक बड़ा कारण है देशी नस्ल में दूध कम होता है अपेक्षाकृत यह सत्य है लेकिन कितना कम होता है और इसके क्या फ़ायदे नुक़सान हैं अलग अलग नस्ल की गायों में दूध की मात्रा अलग अलग है.

जैसे आपको 1-12 लीटर दूध चाहिए तो कंकरेज या शहिवाल या फिर गिर गाय लीजिए वह दूध अच्छा देती है और मक्खन भी अच्छा निकलता है जर्सी गाय के दूध की गुणवत्ता पूतना के समान है वहीं देशी का दूध अमृत है और घी देशी में से ही निकलेगा जर्सी में फ़ैट कंटेट बहुत कम है.

साथ ही देशी घी अनेक बीमारियों की दवा के काम आता है कुछ को लिख रहा हूँ कभी उपयोग करके देखें उसके बाद भरोसा करें

1 – मासिक स्त्राव के दौरान 250 ml पानी में एक चम्मच (अगर घी जमा हुआ है ) और अगर पिघला हुआ है तो दो चम्मच डालकर पियें दर्द से आराम मिलेगा.

2 – नाक में दो बूँद घी डाले हल्का गरम किया हुआ जिससे अनेक बीमारियों से निजात मिलेगी, किसी भी तरह की ऐलर्जी ख़त्म हो जाती है, दिमाग़ तरो ताज़ा रहता है. याददाश्त बढ़ती है, कान की समस्या से निजात मिलती है. साथ ही खर्राटे जिसकी दवा कोई डॉक्टर नहीं देता आप देशी घी खाने के साथ साथ नाक में डालकर सोईए एक सप्ताह के अंदर खर्राटे ग़ायब हो जाएँगे.

3 – अच्छी नींद और माइग्रेन की समस्या से निजात पाने के लिए दो बूँद नाक में डालें.

4 – गर्भवती महिलायें देशी गाय का घी अवश्य खायें इससे गर्भ में पल रहा शिशु बुद्धिमान, बलवान और स्वस्थ होता है.

5 – देशी गाय का घी ब्लॉकेज की समस्या से भी निदान देता लेकिन सनद रहे देशी गाय का ही हो किसी अन्य का न हो अन्यथा बीमारी बढ़ेगी.

इस तरह की सौ से अधिक जगह सिर्फ़ देशी गाय का घी इलाज करने में सम्भव है गौमूत्र से सौ से अधिक तरह की दवाएं बनती हैं.

आपकी हर वर्ष होने वाली दवा के ख़र्च को ख़त्म कर सकती है एक गाय लेकिन ध्यान रहे गाय देशी हो, और हाँ बाबा रामदेव के घी पर भरोसा न करें वह देशी घी बेचते हैं देशी गाय का घी नहीं, देशी घी या गाय का देशी घी वही है जो देश में बनाया गया है और किसी भी गाय का है, अन्यथा बाबा से कहिए लिखकर बेचे की देशी गाय का घी है इसलिए खाने में भले उपयोग कीजिए औषधि में नहीं.

गाय के चारे और महँगाई का रोना रोने वाले भाइयों से निवेदन है गोबर से लेकर गौमूत्र तक सब कुछ हज़ारों बीमारी की दवा है. मुफ़्त की खेती का साधन है फिर भी हम गौपालन से पलायन की स्थिति में हैं. अगर भूसा और दाना ख़रीद कर भी खिला रहे हैं तो एक दिन में 50-60 रुपए का पड़ता है और अगर किसान हैं तो भूसा घर में मिलेगा दाना भी मिलेगा कुछ बाहर से लेना पड़ेगा, हाँ बड़े स्तर पर करने में यह थोड़ा महँगा है क्योंकि सब कुछ ख़रीदकर लाना है लेकिन उपयोगिता के मुक़ाबले अधिक सस्ता है!

अगले लेख में गौमूत्र और गोबर का उपयोग औषधि में तथा पेट्रोल की समस्या से निजात पाने के ऊपर लिखा जाएगा.

जारी ……

– शैलेंद्र सिंह

गौरक्षा – 4 : एक गाय दूध न देते हुए भी देती हैं हज़ारों का लाभ

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