श्वान पचा नहीं पा रहे घी

CBSE की कक्षा 10 और 12 का एक-एक प्रश्नपत्र कल लीक हो गया था. लीक होने की खबर सामने आने के साथ ही देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मानव संसाधन मंत्री प्रकाश जावड़ेकर को तत्काल फोन कर मामले में सीधा हस्तक्षेप किया था.

परिणाम स्वरूप दोनों प्रश्नपत्रों की परीक्षा निरस्त कर उसे दोबारा कराने की घोषणा हुई और दिल्ली पुलिस ने युद्ध स्तर पर छापेमारी प्रारम्भ की. पेपर लीक मामले के अपराधियों को चिन्हित भी कर लिया. उनमें से तीन गिरफ्तार भी हो चुके हैं.

लेकिन इस पूरे घटनाक्रम पर जिस तरह कल से न्यूज़ चैनलों पर हाहाकार मचा हुआ है, उसे देख ऐसा प्रतीत हो रहा है मानो देश में कोई भयंकर आपदा आ गयी है.

राहुल गांधी ने फिर एक बार प्रधानमंत्री पर अभद्र अराजक टिप्पणी प्रचण्ड निर्लज्जता के साथ की है.

आइए आपको न्यूज़ चैनलों और राहुल गांधी के इस दोगले दोहरे आचरण के शर्मनाक सच से परिचित कराता हूं.

वाराणसी में हुए आतंकी बम धमाकों के जिम्मेदार आतंकियों की खोज में हरियाणा के पानीपत के होटलों ढाबों में 2006 में पुलिस जब छापेमारी कर रही थी तब एक होटल में उसके हाथ CBSE का बिजनेस स्टडीज़ विषय का लीक हुआ पेपर हाथ लग गया था.

यह घटना अपवाद नहीं थी. 2011 में अंडमान पुलिस ने तीन लोगों को गिरफ्तार उनके पास से विज्ञान और गणित के प्रश्नपत्रों समेत CBSE की कक्षा 12 की परीक्षा के कई अन्य विषयों के प्रश्नपत्रों का जखीरा पकड़ा था.

2011 में ही दिल्ली में CBSE का वरिष्ठ अधिकारी प्रीतम सिंह तब पकड़ा गया था जब CBSE द्वारा अखिल भारतीय इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा का प्रश्नपत्र लीक होने से देश में बवाल मच गया था.

ज्ञात रहे कि उस समय हरियाणा, अंडमान, दिल्ली और केन्द्र में कांग्रेस की ही सरकार थी. राहुल गांधी भी उस समय संसद सदस्य था.

क्या उस समय हुई इन पेपर लीक की घटनाओं पर राहुल गांधी ने तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह पर कभी कोई अभद्र अराजक टिप्पणी प्रचण्ड निर्लज्जता के साथ उसी तरह की थी जिस तरह प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के खिलाफ आज की है?

यही नहीं 2013 में Staff Selection Commission (SSC) Combined Graduate Level Examination का प्रश्नपत्र लखनऊ में लीक हो गया था. 2009 में Common Law Admission Test (CLAT) का प्रश्नपत्र भी लखनऊ में ही लीक हुआ था.

2008 में Railway Recruitment Board का प्रश्नपत्र इलाहाबाद से तथा 2007 में राष्ट्रीयकृत बैंक का प्रश्नपत्र लीक हुआ था तो 2006 में नार्थ ईस्टर्न रेलवे की भर्ती परीक्षा का प्रश्नपत्र भी इलाहाबाद से लीक हुआ था.

ध्यान रहे कि उपरोक्त सभी विभाग केंद्र सरकार के अधीन ही कार्य करते हैं और जब जब यह पर्चे लीक हुए उस समय केंद्र में कांग्रेस की ही सरकार थी. मनमोहन सिंह देश के प्रधानमंत्री थे और राहुल गांधी संसद का सदस्य भी था.

लेकिन पेपर लीक की उपरोक्त घटनाओं के खिलाफ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की तरह सक्रिय होने की बात तो छोडिए, देश के तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह पेपर लीक की उपरोक्त घटनाओं के खिलाफ कभी एक शब्द भी बोले थे?

क्या पेपर लीक की उपरोक्त घटनाओं पर आगबबूला होकर राहुल गांधी ने तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह पर कभी कोई अभद्र अराजक टिप्पणी प्रचण्ड निर्लज्जता के साथ उसी तरह की थी जिस तरह प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के खिलाफ आज की है.?

इसीलिए कल से न्यूज़ चैनलों पर हो रहे अभूतपूर्व हाहाकार तथा आज दिल्ली के जंतर मंतर पर देश की सरकार और प्रधानमंत्री के खिलाफ नारेबाजी करते हुए पहुंचे बड़ी बड़ी दाढ़ी मूंछों वाले कक्षा 10-12 के तथाकथित 40-50 छात्रों की संदेहास्पद प्रायोजित भीड़ के चरण धो कर पी रही न्यूज़ चैनली मीडिया को देख कर मुझे यह मुहावरा याद आ ही गया कि… कुत्तों को घी हजम नहीं हो रहा.

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