ई-कॉमर्स को कोसने से क्या होगा, रचनात्मक विनाश को समझें, नयी तकनीकी को अपनाएं

वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के अनुसार वर्ष 2017 में भारत में लगभग दो लाख पचास हज़ार करोड़ रुपये का बिज़नेस इ-कॉमर्स के द्वारा हुआ.

यह मानकर कि इस बिज़नेस में सभी सौदे में 18% GST लगा, तब भी पूरे वर्ष का GST केवल 45 हज़ार करोड़ रुपये होगा, जबकि अकेले फ़रवरी में 89 हज़ार करोड़ रुपये GST से मिले.

पिछले वर्ष भारत में ऑनलाइन खुदरा बाजार का एक लाख 17 हज़ार करोड़ रुपये होने का अनुमान है.

18% की दर से पूरे वर्ष का GST केवल 21 हज़ार 60 करोड़ रुपये होगा. इस वर्ष 60 फीसदी बढ़कर एक लाख 95 हजार करोड़ रुपये तक हो जाने की सम्भावना है.

दिसंबर 2017 में भारत में 48 करोड़ इंटरनेट उपयोगकर्ता थे, जो इंटरनेट के प्रसार के कारण वर्ष 2021 में 83 करोड़ हो जाएंगे.

एक प्रकार से सभी वयस्क भारतीयों के पास इंटरनेट होगा, जिससे ई-कॉमर्स के तीन गुने से भी अधिक बढ़कर 8 लाख करोड़ रुपये पार कर जाने की आशा है. ई-कॉमर्स तेज़ी से छोटे शहरों के ग्राहकों को भी आकर्षित कर रहा है.

इस समय ई-कॉमर्स में इलेक्ट्रॉनिक्स का हिस्सा 47 फीसदी है, 31 फीसदी के साथ दूसरा सबसे बड़ा हिस्सा कपड़ों और परिधानों का है. बाकि 22 फ़ीसदी में में घर की सज्जा सामग्री, बच्चों का सामान, पुस्तकें, सौंदर्य प्रसाधन की हिस्सेदरी है.

वर्तमान में ई-कॉमर्स खुदरा बिक्री में प्रति दिन 10 से 12 लाख सौदे प्रतिदिन होते है. भारत के कुल रिटेल बाज़ार में ऑनलाइन खुदरा बिक्री 2016 में 2.5 प्रतिशत थी जो बढ़कर 2020 तक 5 प्रतिशत हो जाने की उम्मीद है.

स्नैपडील की बिक्री का लगभग 60 प्रतिशत हिस्सा पुणे, कोचीन, मंगलौर, देहरादून, नासिक, बड़ौदा, त्रिची, मदुरै जैसे शहरों से आया है.

ऑनलाइन शॉपिंग करने वालों में 65 फीसदी लोग अपने मोबाइल का उपयोग करते हैं. 2020 तक भारत में स्मार्टफोन उपयोगकर्ताओं की संख्या 70 करोड़ तक पहुंचने की संभावना है.

ई-कॉमर्स रिटेल उद्योग की रीढ़ की हड्डी लॉजिस्टिक्स और शिपिंग (कूरियर), कस्टमर सैटिस्फैक्शन और सर्विस है.

2016 में भारत में ई-कॉमर्स का लॉजिस्टिक्स और शिपिंग 3000 करोड़ रुपये का बिज़नेस था और यह वर्ष 2020 तक लगभग 14 हज़ार करोड़ रुपये तक पहुंच जाएगा.

फाइनेंशियल टाइम्स में छपी खबर के अनुसार वर्ष 2017 के अंत में भारत में स्मार्ट फ़ोन के यूजर 3.9 GB डाटा प्रति माह डाउनलोड करते है, जबकि विकसित पश्चिमी यूरोप में यह आंकड़ा 4.1 GB डाटा का है. यानि कि सेल फोन पर सूचना और मनोरंजन के उपभोग में भारतीय उपभोक्ता पश्चिमी यूरोप से केवल 0.2 GB प्रति माह पीछे है.

इन 48 करोड़ भारतीयों को, जो इंटरनेट का उपयोग करते हैं, और जो 2021 में 83 करोड़ हो जाएंगे, क्या इन्हें हम ई-कॉमर्स से रोक सकते हैं? क्या इनके मध्य से – हमारे मध्य से – कोई ऐसी नवयुवती नहीं उभर सकती जो अमेज़न को टक्कर दे सके?

आज अमेरिका, जर्मनी, जापान, साउथ कोरिया जैसे देशों में नयी तकनीकी के कारण लगभग सौ प्रतिशत रोज़गार है. इन देशों को वर्कर चाहिए जो इन्हे नहीं मिल रहे है.

आज के समय में पूरे विश्व में बिज़नेस मॉडल बदल गया है, सर्विस और नयी तकनीकी के द्वारा पुराने बिज़नेस मॉडल ध्वस्त हो रहे है. इस नए बिज़नस को पुरानी अर्थव्यवस्था और टैक्स प्रणाली से नहीं संभाला जा सकता.

हेड क्वार्टर कही पर है, कर्मचारी किसी और देश में, सामान के हिस्से कई देशों में बन रहे है, असेम्बल किसी और देश में, बिक कहीं और रहा है, टैक्स किसी अन्य देश में जा रहा है. ऐसे में आप उस बिज़नेस से कैसे टक्कर लेंगे?

क्या डिजिटल इकॉनमी, कैशलेस इकॉनमी, सभी भारतीयों के पास बैंक अकाउंट, और GST के बिना इन से टक्कर लेना संभव है?

ई-कॉमर्स इस बदलाव का एक बहुत ही छोटा सा हिस्सा है. आँखें खोलिये और समझने का प्रयास करिये कि सूचना आप की मुट्ठी में है, ना कि भ्रष्ट अभिजात्य वर्ग के हाथ में. इस सूचना का प्रयोग विकसित देशों को उन्हीं के गेम में मात देने के लिए करिये.

हमें इस रचनात्मक विनाश को समझना होगा, नयी तकनीकी को अपनाना होगा, ना कि ई-कॉमर्स के पीछे हुक्का-पानी लेकर चढ़ जाना है.

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