रामनवमी विशेष : श्लोकी रामायण

रामनवमी के दिन रामायण का पाठ करने से सभी कष्ट दूर होते है. चूंकि सभी को समय की उपलब्धता कम है इसलिए सम्पूर्ण रामायण शायद ही कोई पढ़ता हो इसलिए वाल्मीकि जी ने श्लोकी रामायण की रचना भी की थी ये बात बहोत कम लोगो को ज्ञात है.

कलयुग में सबके पास समयाभाव होगा इसलिए इसकी रचना की गयी ताकि जो पूर्ण रामायण पाठ नहीं कर सकते वो इसका पाठ करके उतना ही लाभ ले जिसमें संपूर्ण रामायण का सार है–

“अदौ राम तपोवनादि गमनं हत्वा मृगं कांचनम्।
वैदेही हरणं जटायु मरणं सुग्रीव संभाषणम्।
वालि निग्रहणं समुद्र तरणं लंका पुरी दास्हम्।
पाश्चाद् रावण कुंभकर्ण हननं तद्धि रामायणम्।”

इस बार की रामनवमी विशेष है –
तिथियों की गणना के अनुसार इस साल 2018 में रामनवमी अष्टमी तिथि में मनेगी क्योंकि इस साल नवमी तिथि का क्षय हो गया है.

ऐसे में वामन पुराण के नियमों का पालन करते हुए अष्टमी से युक्त नवमी तिथि में मृगशिरा नक्षत्र में आज 25 मार्च को रामनवमी का त्योहार मनाया जा रहा है जिसका फल अतिशुभ रहेगा.

विशेष –
तो बस खो जाइये भक्ति में प्रभु श्री राम के, आइये साथ मे भजते है –

श्रीरामचंद्र कृपालु भजु मन हरण भवभय दारुणं,
नवकंज लोचन, कंजमुख कर, कंज पद कंजारुणं।
कंदर्प अगणित अमित छवि नव नील नीरज सुन्दरम,
पट पीत मानहु तडित रूचि-शुची नौमी, जनक सुतावरं।।

भजु दीनबंधु दिनेश दानव दैत्य वंष निकन्दनं,
रघुनंद आनंद कंद कोशल चन्द्र दशरथ नंदनम।
सिर मुकुट कुंडल तिलक चारू उदारु अंग विभुशनम,
आजानुभुज शर चाप-धर, संग्राम-जित-खर दूषणं।।

इति वदति तुलसीदास, शंकर शेष मुनि-मन-रंजनं,
मम ह्रदय कंज निवास कुरु, कामादि खल-दल-गंजनं.।
एही भांति गोरी असीस सुनी सिय सहित हिं हरषीं अली,
तुलसी भावानिः पूजी पुनि-पुनि मुदित मन मंदिर चली।।
जानी गौरी अनूकोल, सिया हिय हिं हरषींअली,
मंजुल मंगल मूल बाम अंग फरकन लगे।।

आप सभी स्नेही स्वजनों को रामनवमी की अनंत शुभकामनाएं —

‘नीलाम्बुजश्यामलकोमलाङ्गं सीतासमारोपितवामभागम् पाणौ महासायकचारुचापं युद्ध नमामि रामं रघुवंशनाथम्’

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