माता पुनि बोली सो मति डोली तजहु तात यह रूपा, कीजै सिसुलीला अति प्रियसीला यह सुख परम अनूपा

“माता पुनि बोली सो मति डोली तजहु तात यह रूपा.कीजै सिसुलीला अति प्रियसीला यह सुख परम अनूपासुनि बचन सुजाना रोदन ठाना होइ बालक सुरभूपा.” रामचरित मानस के बालकांड से रामजन्म का वर्णन करने वाले छंदों की यह लाइनें बहुत ही रोचक हैं. यह पंक्तियां ऐसी हैं जिसमें एक मां भगवान से कह रही है कि … Continue reading माता पुनि बोली सो मति डोली तजहु तात यह रूपा, कीजै सिसुलीला अति प्रियसीला यह सुख परम अनूपा