कैसे दुगुनी की जा सकती है किसानों की आय?

समय के साथ जो चुनौतियां खेती से जुड़ती चली गईं, वे चुनौतियां ही किसान की आय कम करती हैं, उसका नुकसान करती हैं, खेती पर होने वाला उसका खर्च बढ़ाती हैं.

अतः किसान की आय दोगुनी करना और इनके जीवन को आसान बनाने के लिए अभिनव तरीके से कार्य करना होगा.

आज देश में 11 करोड़ से ज्यादा सॉइल (soil) हेल्थ कार्ड बांटे जा चुके हैं, जिससे मिल रही जानकारी के आधार पर किसानों की पैदावार बढ़ने के साथ-साथ खाद पर खर्च भी कम हो रहा है.

यूरिया की 100 प्रतिशत नीम कोटिंग से भी खाद की खपत कम हुई है और प्रति हेक्टेयर अनाज उत्पादन बढ़ा है. यह बचत और बड़ा हुआ उत्पादन आय है.

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के माध्यम से किसानों को सबसे कम प्रीमियम पर फसल बीमा उपलब्ध कराया है और ये प्रावधान किया गया कि पूरी राशि का बीमा किया जाए.

इस योजना के बाद अब प्रति किसान मिलने वाली क्लेम राशि दोगुने से भी अधिक हो गई है. जो सिंचाई परियोजनाएं दशकों से अधूरी पड़ी थी, उन्हें 80 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा खर्च करके पूरा किया जा रहा है.

खेत से लेकर बाजार तक, पूरी सप्लाई चेन को मजबूत की जा रही है, आधुनिक एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार हो रहा है.

मोदी सरकार ने तय किया है कि अधिसूचित फसलों के लिए, न्यूनतम समर्थन मूल्य – यानि की MSP, उनकी लागत का कम से कम डेढ़ गुना घोषित किया जाएगा.

MSP के लिए जो लागत जोड़ी जाएगी, उसमें दूसरे श्रमिक के परिश्रम का मूल्य, अपने मवेशी-मशीन या किराए पर लिए गए मवेशी या मशीन का खर्च, बीज का मूल्य, सभी तरह की खाद का मूल्य, सिंचाई के ऊपर किया गया खर्च, राज्य सरकार को दिया गया लैंड रेवेन्यू, वर्किंग कैपिटल के ऊपर दिया गया ब्याज, लीज ली गई जमीन के लिए दिया गया किराया, और अन्य खर्च शामिल हैं.

इतना ही नहीं किसान के द्वारा खुद और अपने परिवार के सदस्यों द्वारा दिए गए श्रम के योगदान का भी मूल्य, उत्पादन लागत में जोड़ा जाएगा.

सरकार प्रयास कर रही है कि किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए बहुत दूर नहीं जाना पड़े. इस बजट में ग्रामीण रीटेल एग्रीकल्चर मार्केट – यानि GRAM की अवधारणा इसी का परिणाम है.

इसके तहत देश के 22 हजार ग्रामीण हाटों को जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ अपग्रेड किया जाएगा जिससे अपने खेत के 5-6 किलोमीटर के दायरे में किसान के पास ऐसी व्यवस्था होगी, जो उसे देश के किसी भी मार्केट से कनेक्ट कर देगी.

किसान इन ग्रामीण हाटों पर ही अपनी उपज सीधे उपभोक्ताओं को बेच सकेगा. आने वाले दिनों में ये हाट, किसानों की आय बढ़ाने, रोजगार और कृषि आधारित ग्रामीण एवं कृषि अर्थव्यवस्था के नए केंद्र बनेंगे.

इस स्थिति को और मज़बूत करने के लिए सरकार Farmer Producer Organization को बढ़ावा दे रही है. किसान अपने क्षेत्र में, अपने स्तर पर छोटे-छोटे संगठन बनाकर भी ग्रामीण हाटों और बड़ी मंडियों से जुड़ सकते हैं.

आप कल्पना करिए, जब गांव के किसानों का एक बड़ा समूह इकट्ठा होकर खाद खरीदेगा, उसे ट्रांसपोर्ट करके लाएगा, तो पैसे की कितनी बचत होगी. इसी तरह वे कीटनाशक दवा के दाम में, बीज में, बड़ा डिस्काउंट भी प्राप्त कर सकेंगे.

इसके अलावा जब वही समूह गांव में अपनी पैदावार इकट्ठा करके, उसकी पैकेजिंग करके, बाजार में बेचने निकलेगा, तो भी उसके हाथ ज्यादा पैसे आएंगे. खेत से लेकर उपभोक्ता तक पहुंचने के बीच में जो कीमत बढ़ती है, उसका ज्यादा लाभ किसानों को ही मिलेगा.

आज देश में 22 लाख हेक्टेयर से ज्यादा ज़मीन पर ऑर्गेनिक फार्मिंग होती है. सरकार परंपरागत कृषि विकास योजना के अंतर्गत ऑर्गेनिक फार्मिंग को पूरे देश में प्रोत्साहित करने में जुटी है. विशेष रूप से उत्तर पूर्व को ऑर्गेनिक खेती के Hub के तौर पर विकसित किया जा रहा है.

ग्रीन और व्हाइट रेवोलुशन के साथ ही जितना ज्यादा हम आर्गेनिक रेवोलुशन, वाटर रेवोलुशन, ब्लू रेवोलुशन (मछली उत्पादन), स्वीट रेवोलुशन (शहद उत्पादन) पर बल देंगे, उतना ही किसानों की आय बढ़ेगी. एग्रीकल्चर में भविष्य इसी तरह के नए सेक्टर्स की उन्नति, किसानों की उन्नति में सहायक होगी.

मधुमक्खी ना सिर्फ पोलिनेशन में मदद करती है बल्कि शहद के रूप में अमृत भी देती हैं. इनका पालन हमें Sweet Revolution की तरफ ले जाता है. एक मोटे अनुमान के मुताबिक छोटे स्तर पर ही, 50 बॉक्स में मधुमक्खी पालन से किसानों को दो से ढाई लाख रुपये तक की कमाई हो सकती है.

इसी तरह अतिरिक्त आय का एक और माध्यम है सोलर फार्मिंग. ये खेती की वो तकनीक है जो ना सिर्फ सिंचाई की ज़रूरत को पूरा कर रही है बल्कि पर्यावरण की भी मदद कर रही है.

खेत के किनारे पर सोलर पैनल से किसान पानी की पंपिंग के लिए जरूरी बिजली तो लेता ही है, साथ में अतिरिक्त बिजली सरकार को बेच सकता है. इससे उसे पेट्रोल-डीज़ल से मुक्ति मिल जाएगी और पेट्रोल-डीजल की खरीद में लगने वाले सरकारी धन की भी बचत होगी.

बीते तीन साल में सरकार ने लगभग पौने 3 लाख सोलर पंपों को किसानों तक पहुंचाया है और इसके लिए लगभग ढाई हजार करोड़ की राशि स्वीकृत की गई है.

गांव में बड़ी मात्रा में बायो वेस्ट निकलता है, जो गांव में गंदगी का बड़ा कारण बनता है. एक योजना के तहत इस वेस्ट को अब कंपोस्ट, बायो गैस और बायो सीएनजी में बदला जाएगा, जो किसानों की आय बढ़ाने में मददगार साबित होगी.

फसल के जिस अवशेष को किसान सबसे बड़ी आफत मानते हैं उससे पैसा भी बनाया जा सकता है. नारियल-जटा और खोल हों, बम्बू के टुकड़े हो, फसल कटने के बाद खेत में बची पौध हो, इन सभी को किसानों की आय से जोड़ने का काम किया जा रहा है.

ये देखा गया है कि पराली को खेत में मिलाने की वजह से मिट्टी की सेहत में जबरदस्त सुधार आता है, खाद की आवश्यकता में कमी आती है और पैदावार भी बढ़ती है. कुल मिलाकर ये किसान की आय में बढोतरी करती है.

(बीती 17 मार्च को राष्ट्रीय कृषि उन्नति मेले में को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भाषण से उद्धृत. इस भाषण में उन्होंने यह बताया कि कैसे किसानों की आय सन 2022 तक दोगुनी की जा सकती है.)

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