आज… खुशsss तो बहुत होंगे तुम

अच्छा सच सच बताना… कैसा लग रहा है UP राज्यसभा की 9 सीट जीत कर?

क्या आज से पहले आपको कभी पता चलता था कि राज्यसभा चुनाव कब हैं?

अटल बिहारी वाजपेयी जी की सरकार इसी BSP ने सिर्फ 1 वोट से गिराई थी, वो भी धोखे से, पीठ में खंजर भोंका था.

आज उस धोखे का बदला लिया गया है इसलिए भी यह जीत अभूतपूर्व खुशी दे रही होगी.

अमित शाह ने राज्यसभा चुनाव को इतना दिलचस्प बना दिया कि मानो T-20 का मैच हो, क्या जवान क्या बूढ़ा सभी अपने मोबाइल और TV पर सुबह से देर रात तक नज़र गड़ाए बैठे रहे…

आज आप सब बहुत खुश हैं… ये जानते हुए भी की यह जीत बिना तोड़े फोड़े खरीदे हुए संभव नहीं थी, यानी इस जीत को नैतिक तो कम से कम नहीं कहा जा सकता, लेकिन फिर भी आप सब खुश हैं.

अमित शाह को आपकी खुशी का पूरा ख्याल रहता है इसीलिए नरेश अग्रवाल को BJP में लाये थे, नाम और भी बहुत सारे हैं लिखना संभव नहीं है.

लेकिन किसी भी बाहरी को लाने में हर बार आप सब चीखने चिल्लाने लगते हैं. आज मैं आपसे एक सवाल पूछता हूँ, क्या नरेश अग्रवाल के बिना यह जीत संभव थी? अगर नरेश अग्रवाल को हटा दें तो क्या जीत सकते थे?

जवाब है नहीं…

कुछ लोगों को जो एक सीट दिखाई दे रही है असल में वह एक पार्टी को दोनों सदनों में से खत्म करने वाली रणनीति है.

आज BSP जैसी बड़ी पार्टी का एक भी सांसद किसी भी सदन में नहीं है, आज BSP को औकात दिखा दी, कल अगर BSP की ज़रूरत पड़ेगी तो एक आध सांसद बना देंगे राज्यसभा में (राष्ट्रपति बिना चुनाव के 12 सांसद मनोनीत कर सकते हैं).

ऐसे में कल को महागठबंधन टूटने या तोड़ने पर मायावती को एक सीट दे कर अपनी तरफ मिलाया जा सकता है, पहले दुश्मन को मारो और फिर हाथ मिलाओ तो कभी न टूटने वाली अच्छी दोस्ती होती है…

कुछ लोग राजनीति में नैतिकता की बात करते हैं जबकि मैं इसके उलट जीत के लिए किसी भी हद तक जाने की बात कहता हूँ (सिर्फ राजनीति में), क्योंकि राजनीति में नैतिकता की कोई जगह नहीं है, लेकिन आज वे भी खुश हैं जो नैतिकता की बात करते थे.

अन्ना हजारे बातें करते हैं बड़ी-बड़ी और गरीबों के पैसों से चार्टर्ड प्लेन में आते हैं धरना देने, क्या यह नैतिकता है? फिर कहता हूं राजनीति में नैतिकता की कोई जगह नहीं है…

कुछ लोगों को लगा कि मैं नरेश अग्रवाल का पक्ष ले रहा हूँ उन्हें डिफेंड कर रहा हूँ. यहाँ यह साफ कर देना आवश्यक है कि मैं किसी भी नरेश अग्रवाल जैसे नेता का पक्ष नहीं लेता, बल्कि मैं उन्हें माफ करने में विश्वास करता हूँ.

मैं ऐसे नेताओं को डिफेंड नहीं कर रहा था बल्कि BJP के नेतृत्व पर आप अपना विश्वास बनाये रखें, ये कह रहा था.

जो स्टीयरिंग व्हील पर बैठा है जो गाड़ी चला रहा है उसे गाड़ी चलाने दीजिये. बार-बार अगर आप हंगामा करेंगे तो निश्चित ही एक्सीडेंट हो जाएगा, इसलिए पार्टी की आलोचना के बजाए उसके दूरगामी परिणाम देखने की कोशिश कीजिये…

आज खुश तो बहुत होंगे तुम… बाकी दिल्ली अभी दूर है, Stay Calm and Trust Modi.

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