पहले ‘मेरे कहे या उसके कहे’ के आधार पर फैसला होता, अब हमारे पास है डिजिटल प्रमाण

पिछले बृहस्पतिवार (22 मार्च) को सर्वोच्च न्यायालय में आधार अधिनियम की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं की सुनवाई हुई.के

इस दौरान आधार कार्ड बनाने वाली सरकारी संस्था – यूनिक आइडेंटिफिकेशन अथॉरिटी ऑफ इंडिया – के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अजय भूषण पाण्डेय ने संविधान पीठ को डेढ़ घंटे आधार की कार्यशैली और तकनीकी पहलुओं समझाया.

पांच न्यायाधीशों की इस संविधान पीठ में मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा और न्यायमूर्ति ए के सीकरी, ए एम खानविलकर, डी वाई चंद्रचूड़ और अशोक भूषण सम्मिलित थे.

सुनवाई के दौरान जस्टिस सीकरी ने आधार के प्रमाणीकरण के दौरान कथित रूप से राशन देने से मना करने के बाद झारखंड में एक महिला की मौत के बारे में पूछा.

पाण्डेय ने कहा कि उस मामले में प्रमाणीकरण हुआ था लेकिन फिर भी उसे बिना राशन के वापस भेजा गया. उन्होंने कहा कि ऐसी स्थितियों में अन्य कानूनी प्रक्रियाओं की आवश्यकता होगी क्योंकि आधार मनुष्य के द्वारा की गयी बेईमानी को नहीं सुलझा सकता.

जस्टिस सीकरी ने कहा कि “क्योंकि यह हमारा चरित्र है.”

पाण्डेय ने कहा कि आधार के उपयोग से ‘अखंडनीय डिजिटल सबूत’ स्थापित हुआ है कि उस महिला को प्रमाणीकरण के बावजूद वापस लौटा दिया गया था. “इससे पहले आपको मेरे कहे या उस व्यक्ति के कहे के बेसिस पर फैसला देना था. अब हमारे पास डिजिटल प्रमाण है.”

पाण्डेय ने कहा कि आधार के डेटा और पूरे सिस्टम की सिक्योरिटी को तोड़ने में अनंत काल लगेगा. उन्होंने बताया कि बायोमेट्रिक डेटा लीक होने की कोई गुंजाइश नहीं है. साफ्टवेयर सरकार का है और सरकार के ही सर्वर पर काम होता है. सरकार के सर्वर को इंटरनेट से भी नहीं जोड़ा गया है ताकि हैकिंग की गुंजाइश न रहे.

पाण्डेय ने सुप्रीम कोर्ट को बतलाया कि बॉयोमीट्रिक सूचना मैच करने वाला सॉफ़्टवेयर ऑफ़लाइन प्रयोग किया जाता है. उन्होंने कहा कि “डेटा पूरी तरह से हमारे नियंत्रण में है और बॉयोमीट्रिक्स सूचना को अनाम कर दिया जाता है. हम व्यक्तिगत रूप से पहचान योग्य जानकारी को अलग करते हैं, इसलिए सॉफ्टवेयर नहीं जानता है कि किसकी बॉयोमीट्रिक्स सूचना है.”

इस लेख का उद्देश्य आधार की सुरक्षा या उसके लाभ को बतलाना नहीं है. बल्कि मैं यह बतलाना चाहता हूं कि कैसे मीडिया ने झारखंड में हुई महिला की मौत को आधार से जोड़ दिया, जबकि सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ के पांच न्यायाधीशो के सामने पाण्डेय बतला रहे हैं कि आधार से उस महिला का प्रमाणीकरण हो गया था. लेकिन डीलर ने उसे राशन देने से मना कर दिया.

ऐसे फैलाई जाती है झूठी खबरें. क्योंकि अभिजात्य वर्ग चाहता है कि किसी भी तरह उनकी चोरी की व्यवस्था बनी रहे; गरीबों के नाम पर वह अपनी तिजोरी भरते रहें. उस व्यवस्था को बनाये रखना चाहते है जिसे आधार ने रोक दिया है.

यही रचनात्मक विनाश है जो प्रधानमंत्री मोदी कर रहे है.

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