कुछ याद है कि कैसे बनी थी 2014 की लहर

प्रश्न यह है कि 2014 की लहर बनी कैसे थी?

संक्षिप्त उत्तर यह है कि देश पर व्याप्त इस्लामीकरण के संकट (गज़वा-ए-हिन्द) को प्रबुद्ध हिन्दुओं ने समझकर मोदी सरकार को एक सशक्त विकल्प के रूप में देखा था.

इस भावी संकट से बचने के लिए लाखों-लाख हिन्दुओं ने अपने-अपने स्तर पर जो कुछ संभव था वह किया.

गाँव, गली, मुहल्ले से लेकर महानगरों तक व्यापक जनजागरण हुआ. इस जनजागरण के कार्य में कांग्रेस के अपार भ्रष्टाचार ने उर्वरक का कार्य किया.

बाबा रामदेव का आन्दोलन और रामलीला कांड आदि से कांग्रेस के प्रति घृणा और मोदी के पक्ष में लहर को बढ़ावा मिलता गया.

चारों ओर हिन्दुत्व का एक माहौल स्थापित हो गया. जातियों में बंटा हिन्दू, हिन्दुत्व के मुद्दे पर एक होने लगा. इस एकता में विकास और ‘गुजरात मॉडल’ का तड़का लगते ही प्रबल वेग आ गया.

देखते ही देखते यह लहर सुनामी बन गई और 2014 में हेमचन्द्र विक्रमादित्य के बाद पुनः कोई हिन्दू दिल्ली के सिंहासन पर बैठ सका (बीच में कुछ अल्पावधि के कमज़ोर अपवादों को गिनने का कोई अर्थ नहीं है).

याद रहे इस सुनामी के मूल में प्रबुद्ध हिन्दुओं का हिन्दू रक्षा हित नि:स्वार्थ भाव से तन, मन और धन का समर्पण ही था.

इस वर्ग की अपेक्षा थी कि मोदी जी धारा 370, राम मंदिर, जनसँख्या जेहाद की रोकथाम और गौ रक्षा पर कार्य करेंगे.

हिन्दुत्ववादी शक्तियों को बल प्रदान किया जाएगा. धर्मविरोधी शक्तियां निष्क्रिय कर दी जाएँगी. कांग्रेसियों की राजमाता अपने सभी चमचों समेत जेल की सलाखों के पीछे चक्की पीसेंगी, आदि आदि…

पर जब चार वर्ष बीत जाने के पश्चात भी इन विषयों पर कुछ विशेष कार्य नहीं हुआ तो इस लहर का मूल हिन्दू समूह हतप्रभ और निष्क्रिय हो गया.

यह वर्ग स्वयं को कहीं न कहीं ठगा महसूस करने लगा. रही सही कसर प्रधानमंत्री के समय-समय पर आये बयानों ने पूरी कर दी.

उस पर तुर्रा जफ़र सरेशवाला की प्रधानमंत्री से घनिष्ठता. खोज-खोज कर कूड़े-कबाड़े भरे गए, भुक्कल नबाब तक को न बख्शा गया… नरेश अग्रवाल जैसे राम नाम निदंक ताजा उदाहरण हैं.

इन सबसे पीड़ित इस लहर के मूल हिन्दू समूह ने स्वयं को चुनाव (उप्र के फूलपुर-गोरखपुर उप-चुनाव) से पूरी तरह दूर कर लिया (कम मतदान इसी बात का लक्षण है).

अब जातिवाद तो भारत की राजनीति में कूट-कूट कर भरा ही है. हिंदुत्व की बात गायब होते ही इस बीमारी को उभर आना ही था, सो यह उभर आई. ऊपर से साइकिल-हाथी का सर्कस, और परिणाम सामने है.

योगी जी का अब तक का कार्य शानदार है. पिछले दो सप्ताह से पूर्वांचल के गाँव में हूँ… जहाँ मेरे घर आने से पहले ही जनरेटर की व्यवस्था की जाती थी, आज वहाँ पर्याप्त बिजली आ रही है.

कानून का राज्य है… उत्तर प्रदेश आज विकासोन्मुख है. इसलिए इसे योगी जी की विफलता के रूप में देखना बहुत बड़ी मूर्खता होगी.

कुल मिलाकर बात यह है कि आप का अस्तित्व ही ‘हिन्दुत्व’ से है. आप इससे भटकेंगे तो शेष राजनीति में विरोधी आप से बहुत बड़े घाघ हैं.

2019 जीतना है तो हिन्दुत्व को संजीवनी देनी होगी. जिन कारणों से आपको हिन्दुत्व हितैषी के रूप में देखा जाता था उन पर प्रतिबद्ध रहना होगा.

धारा 370, राम मंदिर, जनसँख्या जेहाद में से कम से कम किसी एक पर ठोस कार्य करना होगा. फिर देखिये इस बार सुनामी नहीं सुनामा आ जाएगा!

जय श्री राम… जय महाकाल… जयति जय हिन्दूराष्ट्रम…

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जन्म : 18 अगस्त 1979 , फैजाबाद , उत्त्तर प्रदेश योग्यता : बी. टेक. (इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग), आई. ई. टी. लखनऊ ; सात अमेरिकन पेटेंट और दो पेपर कार्य : प्रिन्सिपल इंजीनियर ( चिप आर्किटेक्ट ) माइक्रोसेमी – वैंकूवर, कनाडा काव्य विधा : वीर रस और समसामायिक व्यंग काव्य विषय : प्राचीन भारत के गौरवमयी इतिहास को काव्य के माध्यम से जनसाधारण तक पहुँचाने के लिए प्रयासरत, साथ ही राजनीतिक और सामाजिक कुरीतियों पर व्यंग के माध्यम से कटाक्ष। प्रमुख कवितायेँ : हल्दीघाटी, हरि सिंह नलवा, मंगल पाण्डेय, शहीदों को सम्मान, धारा 370 और शहीद भगत सिंह कृतियाँ : माँ भारती की वेदना (प्रकाशनाधीन) और मंगल पाण्डेय (रचनारत खंड काव्य ) सम्पर्क : 001-604-889-2204 , 091-9945438904

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