कैम्ब्रिज एनालिटिका जैसे खूनी रणनीति वाले संगठन पर भारतीय मीडिया क्यों मेहरबान

आज सवेरे हर अखबार की खबर फेसबुक को कठघरे में खड़ा कर रही थी. ऐसा लग रहा था कि कल केन्द्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने जो प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी वो फेसबुक के खिलाफ की थी.

जबकि रविशंकर प्रसाद की प्रेस कॉन्फ्रेंस तथा ब्रिटिश न्यूज़ चैनल के स्टिंग ऑपरेशन का मुख्य तत्व कैम्ब्रिज एनालिटिका द्वारा की गई फेसबुक की डेटा चोरी नहीं था.

वह उस खबर का एक छोटा हिस्सा था. जिसके लिए मार्क जुकरबर्ग ने माफी भी मांगी है और जांच की भी बात कही है.

आज छपी खबरों में कैम्ब्रिज एनालिटिका के कांग्रेस के साथ सम्बन्धों, सम्पर्कों तथा ब्रिटेन में स्टिंग ऑपरेशन में उजागर हुए कैम्ब्रिज एनालिटिका के कुकर्मों का काला चिट्ठा पूरी तरह गायब है.

न्यूज़ चैनल भी इसपर चुप्पी साधे हुए हैं. केवल अंग्रेज़ी के दो न्यूज़ चैनलों टाइम्स नाऊ तथा रिपब्लिक ने इस खबर को दिखाने में ईमानदारी बरती. इन खबरों को भाजपा-कांग्रेस के बीच आरोप-प्रत्यारोप के रूप में थोड़ा सा स्थान दिया गया है.

जबकि वेश्याओं के इस्तेमाल, भद्दे झूठे आरोपों के दुष्प्रचार और झूठी खबरों अफवाहों के सहारे जातीय सामाजिक खूनी दंगे कराने की कैम्ब्रिज एनालिटिका की जो रणनीति स्टिंग ऑपरेशन में उजागर हुई है, उसका तो हल्का फुल्का जिक्र भी किसी अखबार या न्यूजचैनल ने नहीं किया है.

यही कारण है कि केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने आज पुनः प्रेस कॉन्फ्रेंस कर के कहा कि शायद कल आप लोग मेरी बात सुन नहीं पाए इसीलिए उसे छापा या दिखाया नहीं.

रविशंकर प्रसाद ने गलत नहीं कहा. भाजपा ने कल ही यह स्पष्ट कर दिया था कि कैम्ब्रिज एनालिटिका 2013 में बनी थी अतः 2010 के बिहार विधानसभा चुनाव में उसकी मदद लेने का तो सवाल ही नहीं पैदा होता. तथा उसकी किसी सहयोगी कम्पनी से भी कोई सहायता BJP ने कभी नहीं ली.

लेकिन कैम्ब्रिज एनालिटिका और भारत में उसकी सहयोगी OVLENO से किसी प्रकार का कोई सम्पर्क सम्बन्ध नहीं होने के कांग्रेसी दावे की धज्जियां आज उस समय उड़ गयीं जब शहज़ाद पूनावाला ने अपने ट्विटर एकाउंट पर 12 जुलाई 2012 का वह ईमेल पोस्ट कर दिया जिसमें OVLENO का मालिक अमरीश त्यागी उससे धंधे की बात कर रहा है.

ज्ञात रहे कि शहज़ाद पूनावाला के सम्बन्ध आज राहुल गांधी से बहुत खराब हो चुके हैं लेकिन 2012 का दौर वह दौर था जब शहज़ाद को राहुल गांधी की सर्वाधिक विश्वसनीय एवं करीबी टीम का प्रमुख सदस्य माना जाता था.

इस पोस्ट के साथ उस ईमेल का स्क्रीन शॉट तो है ही, साथ ही साथ दूसरा स्क्रीन शॉट केन्या के एक लेखक दार्शनिक चिंतक Joshua K. Ngneja द्वारा किये गए उस ट्वीट का है जो उन्होंने कैम्ब्रिज एनालिटिका की खूनी सच्चाई उजागर होने के बाद कल किया और लिखा कि 2017 में हमारे बीच घृणा और वैमनस्य के जो बीज कैम्ब्रिज एनालिटिका बो गयी है उसे दूर करने में हमे वर्षों लगेंगे.

ऐसे खूनी रणनीति वाले संगठन पर भारतीय मीडिया इतना मेहरबान क्यों? उसके कुकर्मों के जिक्र से भारतीय मीडिया को परहेज क्यों?

मित्रों, यह मेहरबानी और परहेज मुफ्त में नहीं होता. कैम्ब्रिज एनालिटिका सरीखी कम्पनियां बड़ा माल खर्च कर के इसे हासिल करती हैं.

कल रविशंकर प्रसाद ने यदि प्रेस कॉन्फ्रेंस ना की होती तो भारतीय मीडिया में कैम्ब्रिज एनालिटिका का शायद जिक्र भी नहीं होता. 2019 की तैयारी की एडवांस बुकिंग का शगुन शायद कैम्ब्रिज एनालिटिका पहुंचा चुकी है.

गिद्धों को अभी भी उम्मीद है कि माहौल को वो जल्दी ही कैम्ब्रिज एनालिटिका के पक्ष में बदल देंगे और लाशों की चुनावी दावत में उन्हें भी मेहमान बनाया जाएगा. अतः मेजबान को नाराज नहीं करना चाहते हैं वो गिद्ध.

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