हम किसी दीवार के आर पार क्यों नहीं निकल पाते?

बड़ा ही अटपटा सा किन्तु उतना ही महत्वपूर्ण एक प्रश्न है. हम किसी दीवार के आर पार क्यों नहीं निकल पाते?

इसका उत्तर इतना सरल नहीं. असल में इसका उत्तर विज्ञान के पास अभी तक है ही नहीं. और जब तक विज्ञान इसका उत्तर नहीं दे देता, एक सवाल उठना लाजिमी है कि असल मे हमें अपने चारों तरफ जो कुछ दिख रहा है वह है भी या नहीं?

विज्ञान कहता है कि जिन छोटे छोटे कणों से मिल कर पदार्थ की रचना होती है वो सभी कण केवल कण ही नहीं है बल्कि तरंग भी हैं. (wave-particle duality) दोनो एक साथ! और ये तरंग है संभावनाओं की.

संभावना, उस कण के किसी भी स्थान पर होने अथवा ना होने की. अर्थात एक ही कण निश्चितता के साथ कहीं भी मौजूद अथवा गैंर मौजूद नहीं है, बल्कि वह बहुत से स्थानों पर एक साथ अलग अलग संभावनाओं के साथ मौजूद/गैर-मौजूद है. (Heisenberg’s uncertainty principle).

पदार्थ को पूरी तरह समझने के लिए विज्ञान ने 17 कणों का standard model तैयार किया है. जिसमें से 16 कणों को गणनाओं के माध्यम से वह खोज चुका है. सत्रहवाँ कण है हिग्ग्स बोसॉन. वस्तु में भार (mass/solidity/ठोसपन/द्रव्यमान ), ऐसा माना जाता है कि इसी कण के कारण आता है. ये ही वह कण है जिसके कारण हम दीवार के आर पार नहीं जा पाते. बाकी के सभी 16 कणों में भार higgs field के कारण ही आता है.

इस कण की खोज 2008 में CERN की लैब में शुरू की गई थी. 4 वर्ष की अवधि में इस कण की खोज का वादा किया गया था. दुनिया भर के अध्यात्मिकों ने इस प्रयोग का या तो मखौल बनाया, या विरोध किया और कुछ ने इसे निरर्थक प्रयास भी कहा. क्योंकि वस्तु में ठोसपन कहां से आता है यह समझने के लिए हमें समझना होगा चेतना, अंतःकरण व वृत्तियों को. यदि विज्ञान इसका कारण भौतिक कणों में खोज निकाले तो दुनियाभर के सभी धर्म, दर्शन, अध्यात्म, योग इत्यादि वहीं के वहीं धरे रह जाए! इसलिए सभी धार्मिकों व दर्शन शास्त्रियों ने इस कण के कभी ना मिल पाने का दावा किया.

2012 आते आते वैज्ञानिकों ने गोल मोल तरीके से इस कण के पाए जाने की पुष्टि तो की किन्तु साथ ही यह भी स्वीकार किया कि अब पदार्थ की संरचना को सुलझाने की गुत्थी और भी ज़्यादा उलझ गई है. पदार्थ में भार कहां से आया यह अभी भी ज्ञात नहीं है.

ऐसा नहीं है कि केवल धार्मिकों ने ही इसका विरोध किया था बल्कि बहुत से वैज्ञानिकों को भी इस प्रयोग की सफलता पर संदेह था. उनमें से एक वैज्ञानिक ने तो इसकी असफलता पर 100 डॉलर की शर्त तक लगा डाली. यह वैज्ञानिक पहले भी “singularity” का दावा कर चुका था जहां पर पहुंच कर विज्ञान के सभी नियम धराशायी हो जाते हैं. उसके बारे में आप खुद पढ़िए.

वैज्ञानिक का नाम था Stephen Hawking.

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