कब तक सरकार का मुंह ताकेंगे, समस्या हमने पैदा की है, हल भी हमें ही निकालना होगा

लगातार बढ़ती जनसँख्या की खाद्य आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए 60 के दशक में हरित क्रान्ति की शुरुआत हुई जिसमें येन केन प्रकारेण खाद्य कृषि पदार्थों का उत्पादन बढ़ाने पर जोर दिया गया था.

निश्चित ही शुरुआत में इसके परिणाम भी अच्छे देखने को मिले. उत्पादन बढ़ने से हरियाणा पंजाब और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के किसानों को खुशहाली की एक उम्मीद की किरण दिखाई देने लगी.

किन्तु क्या कारण रहा कि आज 50-60 वर्षोपरांत भी किसान आत्महत्या करने को मजबूर है और गाँवों से बड़ी मात्र में लोग पलायन करके शहरों में रोज़गार की तलाश में भटक रहे हैं? यहाँ तक कि किसान मजदूरी करने को भी विवश है.

हरित क्रान्ति के दौरान उत्पादन बढ़ाने के लिए अपनाये गए सभी हथकंडे, जैसे नव विकसित वैज्ञानिक तकनीकों द्वारा बीज को ही बदल देना, अत्यधिक मात्र में यूरिया और अन्य रासायनिक उर्वरकों के उपयोग करना व अन्य बहुत सी वैज्ञानिक तकनीकों के कारण आज हालात इस स्तर तक बिगड़ चुके हैं कि पंजाब और हरियाणा जहाँ की भूमि कृषि के लिए बेहतरीन समझी जाती थी आज बंजर हो चुकी है.

किन्तु समस्या केवल किसानों की बदहाली की ही नहीं है. खेती लायक मिटटी में घुले यूरिया और रसायनों का उपभोक्ताओं के स्वास्थय पर भी प्रतिकूल असर पड़ रहा है और हालात इस कदर ख़राब हो चुके हैं कि पंजाब के बठिंडा शहर से चलने वाली एक ट्रेन का नाम ही “कैंसर एक्सप्रेस” रख दिया गया है.

आलम ये है कि देश का कोई भी बच्चा, वृद्ध अथवा युवा कोई भी सुरक्षित नहीं है. ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, कैंसर जैसे जानलेवा रोग लोगों को लगातार अपनी गिरफ्त में लेते जा रहे हैं और हम असहाय से ये सब अपनी आँखों से सामने होता देखने के लिए विवश है.

कुछ भी हो इसका हल भी हमको ही मिल कर निकालना होगा, कब तक हम सरकार की तरफ मुंह ताके उसके कुछ कदम उठाने की प्रतीक्षा करते रहेंगे?

ऐसे में चंडीगढ़ के तीन नौजवानों ने बीड़ा उठाया है पूरे शहर को रसायन मुक्त बनाने का. www.shopapni.in नाम का स्टार्टअप चंडीगढ़ ट्राइसिटी के उपभोक्ताओं को ना केवल जैविक खाद से तैयार रसायन मुक्त फल व् सब्जियां उपलब्ध करवा रहे हैं बल्कि देसी गाय का दूध शहरवासियों को उपलब्ध करवा के देसी गायों के संवर्धन में भी संलग्न हैं.

कम्पनी के ऑपरेशन हेड सलिल कालिया ने वार्ता में बताया कि एक तरफ देसी गाय लुप्त होती जा रही है जिनका A2 दूध अमृत सामान है तो वहीँ दूसरी और हानिकारक A1 प्रोटीन युक्त जर्सी और HF गायों की तादाद लगातार बढती जा रही है और इसे रोकना तब तक संभव नहीं जब तक देसी गायों को गौपालकों के लिए लाभदायक एसेट में तब्दील ना किया जाए.

कंपनी के फाउंडर विकास शर्मा ने बताया कि केवल जैविक उत्पाद बेचना ही कम्पनी का उद्देश्य नहीं है, इसलिए शहरवासियों को अपने घर के बगीचे में ही सब्जियां उगाने और घर पर ही प्रीज़रवेटिव रहित अचार व् मसाले बनाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है ताकि यह सभी उत्तम गुणवत्ता के उत्पाद सभी शहरवासियों के लिए उपलब्ध हो सके और साथ ही लोकल इकॉनमी को भी बल मिले.

अभी तक मिले उम्मीद से बेहतर नतीजों से उत्साहित कम्पनी के को-फाउंडर मानिक नय्यर जी ने बताया कि बहुत जल्दी ही इसी मॉडल के साथ कम्पनी अन्य शहरों में विस्तार की योजना बना रही है.

आशा करते हैं कि आने वाली पीढ़ियों के लिए हम उत्तम गुणवत्ता के खाद्य पदार्थों की उपलब्धता निश्चित कर पायेंगे और भविष्य में किसी भी ट्रेन को कैंसर एक्सप्रेस जैसा मनहूस नाम नहीं देना पड़ेगा.

उत्तिष्ठ जागृत प्राप्य वरान्निबोधत

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