जिनके लिए ये दुनिया आभासी नहीं, उनके लिए ‘आभा-सी’ ही रहने दो…

वे प्राकृतिक लड़कियां थीं
ऐसी जो बहुतायत में मिलती थीं
नदियों सी बलखाती, लहकती,
बड़ी बड़ी चट्टानों को पार कर जाती

जंगली फूल थीं
जहाँ दिल चाहे उग आती
पहाड़ों पर, रेगिस्तान में…

शहर से दूर की कच्ची सड़क पर उड़ती धूल थीं
स्वच्छंद बेबाक… हमेशा हँसते रहने वाली
सच्ची मुच्ची की लड़कियां
जिनका बचपन कभी ख़त्म नहीं हुआ…

फिर वास्तविक दुनिया से उन्होंने
प्रवेश किया एक आभासी दुनिया में
लेकिन तब भी उनका स्वभाव न बदला

तो वो उग आती
उतनी ही निर्भीकता से
कैसी भी प्रोफाइल की मिट्टी में

उतनी स्वच्छंदता से बहती थी अपनी टाइम लाइन पर
उतनी ही निर्भीक इनबॉक्स के दलदल में भी….

लेकिन नहीं पहचान सकी फेक आईडीज़ की
खतरनाक नज़रें…

हर फेक आईडी के उजागर होने के साथ
उसे ताना मारा जाने लगा
ये है तुम्हारी प्रिय आभासी दुनिया
चाहे उस फेक आईडी का उससे कोई लेना देना नहीं

झूठे स्क्रीन शॉट के दाग़
से भयभीत वो लड़कियां
अब काफी समझदार हो गयी हैं

सबसे हंसकर बात करनेवाली ने
अपनी भावनाओं तक को ओनली मी
रखना सीख लिया है…

बुक्का फाड़कर रोने वाली लड़कियों ने
अपनी हंसी भी ओनली फ्रेंड्स कर दी है

वास्तविक लड़कियों से
फेक आईडीज़ की मायावी दुनिया ने
उनकी दुनिया उनसे छीन ली…

इतना सतर्क कर दिया
कि आभासी ही नहीं, वास्तविक दुनिया में भी
अब वो कोई बात पब्लिक नहीं रखती

क्या वास्तविक दुनिया की नज़रें
खतरनाक नहीं?
क्या वो बच निकली हैं सुरक्षित
अंधेरी पगडंडियों से?
क्या ख़त्म हो गए हैं
चार महीनों या चार साल की बच्चियों से
बलात्कार के किस्से?

आभासी दुनिया उनका वह सुरक्षित आकाश था
जहाँ वो जैसे चाहे स्वच्छंद उड़ सकती थीं…
वैसी ही बलखाती हुई
जैसे प्राकृतिक कंदराओं से फूटता
कविताओं का झरना

ये महिलाओं के ग्रुप्स भी तो
उन किटी पार्टीज़ की तरह थे,
जहाँ वो अपनी रेसिपी,
मेहंदी और बुनाई की डिज़ाइन
और कभी सास नन्द के साथ हुए
खट्टे मीठे अनुभव
बाँट लेती थीं…

जो बाँट लेती थीं बच्चों के साथ बिताए
कुछ सेल्फलेस सेल्फी पल
उनको तुम सेल्फिश रहना
सिखा रहे हो

अपने प्रेम के किस्से
जो किसी से नहीं बाँट सकती
पब्लिश कर देती थी वाल पर
‘उसके’ नाम के साथ
दो चार और मित्रों को टैग कर

जैसे सहेली के हाथों
कितने ही प्रेम पत्र
पहुंचे थे प्रेमी के हाथ तक

सभ्य समाज तक में तो
बची नहीं है ये प्राकृतिक, प्रेमिल
असभ्य और झगड़ालू लड़कियां
कम से कम उनको
आभासी दुनिया में तो विचरने दो…

आपके राजनैतिक दांव पेंचों से दूर
जिनके लिए ये दुनिया आभासी नहीं,
उनके लिए ये दुनिया “आभा-सी” ही रहने दो…

– माँ जीवन शैफाली

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