ऐसे पहचाने Facebook पर FAKE IDs को

बहुत पहले एक अंग्रेज़ी फिल्म देखी थी…. Salt, एंजलिना की अदाकारी, फाइटिंग सीन के अलावा उस फिल्म का मुख्य आकर्षण था उसकी कहानी.

ख़ुफ़िया विभाग के काम करने का बेहतरीन तरीका देखना हो तो SALT देखिये.

उनके ही सामने उनके परिवार के किसी सदस्य को क़त्ल करने के बाद भी चेहरे पर कोई भाव न आने देने जितनी “संवेदनशीलता” देखना हो तो Salt देखिये.

उनकी यह संवेदनशीलता ही उनको कितना असंवेदनशील बना देती है कि फिर दुश्मनों का गला चीर देने में भी उनको अफ़सोस नहीं होता… इसका अनुभव करना हो तो SALT देखिये…

आप सोच रहे होंगे कहाँ तो मैं फेसबुक जैसे सोशल प्लेटफोर्म पर फेक आईडीज़ को पहचानने के तरीके बताने वाली थी और कहाँ मैं अंग्रेज़ी फिल्म की कहानी बताने बैठ गयी..

तो जैसा कि आप जानते हैं सीधे सीधे हम लोगों को कोई बात समझ आती नहीं, इसलिए यदि मैं कहूं कि फेक आईडीज़ पहचानना बहुत आसान है तो आपको मेरी बात गले नहीं उतरेगी.

राजनैतिक पृष्ठभूमि को रणभूमि बनाकर फेक आईडीज़ के बीच लड़े जा रहे चुनावी युद्ध का विश्लेषण जिस वृहद रूप में किया जा रहा है, उससे आम लोग इतने भयभीत हो रहे हैं कि उनको उनके स्तर पर बात समझाने के लिए समस्या को उतना ही बड़ा बताकर उसका हल बताना ज़रूरी है…

बाकी बात रही राजनैतिक रणबांकुरों की तो वो लोग खुद इस खेल के इतने माहिर है कि सारे सुरक्षात्मक कवचों के साथ ही वो इस मैदान में कूदते हैं.

तो यदि आपने SALT मूवी नहीं देखी है तो एक बार अवश्य देखें… क्योंकि यदि आपने ओखली में सर दे दिया है तो मूसलों से सर कैसे बचाया जाए ये भी आना चाहिए.

यहाँ मैं कुछ उपाय बता रही हूँ जिससे आप इन फेक आईडीज़ के आक्रमणों से बहुत आसानी से बच सकते हैं-

1. सबसे पहली बात यदि आप की फेसबुक प्रोफाइल आपने सिर्फ परिवार जनों और मित्रों के लिए बनाई है तो आप खुद ही अपरिचित लोगों को नहीं जोड़ते. तो आपको वैसे भी कोई खतरा नहीं.

2. दूसरी बात यदि आप राजनीति में रूचि नहीं रखते तो ऐसे लोग आपकी मित्र सूची में कम होंगे, और होंगे भी तो आप उनको अधिक तवज्जो नहीं देते होंगे. उनकी वाल पर टिप्पणी नहीं देंगे तो आप पर किसी का ध्यान भी नहीं जाएगा.

3. ये सारा खेल सिर्फ और सिर्फ राजनीति को केंद्र में रखकर खेला जा रहा है और इसलिए यदि आप राजनीति में रूचि रखते हैं तो प्रयास कीजिये कि उन्हीं लोगों को मित्र सूची में शामिल करें जो इस पर स्वस्थ बहस करना जानते हों.

4. आप किसी एक दल के समर्थक हैं तो विपक्षी दल के लोगों को मित्र बनाने से बचें.

5. उपरोक्त किसी भी श्रेणी में आप नहीं आते तो आपको किस बात का खतरा है, यदि आप शुद्ध राजनीति में ही दिलचस्पी रखते हैं तो परिवार वालों के साथ शेयर की गयी फोटो या लेख को ONLY Friends ही रखते होंगे… तो बाहरी किसी व्यक्ति का उसे देख पाना संभव ही नहीं.

6. और यदि आप मेरी तरह हर क्षेत्र में दिलचस्पी रखते हैं. आपकी मित्र सूची में कवि, लेखक, राजनैतिक और आध्यात्मिक सभी तरह के मित्र हैं तो उपरोक्त बातों के अलावा अपनी छठी इन्द्री को इतना पुख्ता कीजिये कि किसी के कमेन्ट की भाषा, उसका प्रोफाइल चित्र, उसके द्वारा की जा रही पोस्ट, तस्वीरें, वीडियो देखकर अंदाजा लग जाये कि आपको उसे मित्र बनाना है, अन्फ्रेंड करना है या सीधे ब्लॉक ही कर देना है.

7. जानती हूँ उपरोक्त सारी बातें आपको अब भी अनुपयोगी लग रही होगी. तो ये उपाय आपको अवश्य काम आएँगे.

(a) सबसे पहले किसी को भी मित्र सूची में जोड़ने से पहले उसके द्वारा लगाए गए प्रोफाइल चित्र देखिये, फेक आईडीज़ वाले सामान्यत: बहुत पुरानी फोटो लगाए रहते हैं, बहुत महीनों तक बदलते नहीं, कभी कभी कैमरे से खींची गयी फोटो यानी कागज़ की फोटो की फोटो खींचकर लगाई होती है. नाम भी बहुत अजीब से रखेंगे.

(b) उनके द्वारा किये गए कमेन्ट की भाषा पर ध्यान दें, कभी तो वो बहुत अच्छी भाषा में कमेन्ट करेंगे, कभी जानबूझकर भाषा में वर्तनी की त्रुटि के साथ यह जताने के लिए कि उन्हें फेसबुक का उपयोग ही ठीक से नहीं आता.

(c) यहाँ मैं बार-बार इनबॉक्स में आने वालों को बख्श दे रही हूँ, क्योंकि जब आप उनका दिया हुआ सन्देश खोलेंगे ही नहीं, उनको जवाब ही नहीं देंगे तो एक दिन खुद थककर लौट जाएंगे.
स्क्रीन शॉट का खेल अधिकतर वहीं खेला जाता है जहाँ संवाद दोनों तरफ से बराबर का हो. आप फेक आईडीज़ से इतना ही डरते हैं तो इतना संयम तो आपको रखना ही होगा.

(d) आप सच में सतर्क हैं और लगता है कोई एक ही व्यक्ति अलग अलग आईडी से आपको टार्गेट कर रहा है तो इस बात का ध्यान रखिये कि एक ही समय में कुछ आईडी एक साथ एक्टिव होती हैं, कमेन्ट भी उनके अलग अलग पोस्ट पर आते हैं लेकिन एक ही समय में… तो वो तुरंत संदेह की दृष्टि में आ जाते हैं.

(e) फेसबुक Apps का कम से कम इस्तमाल करें, सबसे अधिक प्रोफाइल की जानकारी चोरी होने का खतरा वहीं से होता है.

और भी बहुत सारी बातें हैं जिनसे फेक आईडीज़ का साफ़ पता लगाया जा सकता है, लेकिन सारा उजागर कर देने से वे मुझसे सतर्क हो जाएंगे. क्योंकि मुझे फेक आईडीज़ से नहीं फेक आईडी वालों को मुझसे अधिक खतरा है क्योंकि मैं उनकी कमज़ोरी बहुत अच्छे से पहचान लेती हूँ. चोर कितना भी शातिर हो कोई न कोई सबूत तो छोड़ ही जाता है.

बाकी फेसबुक पर अब पहले से अधिक कठिन हो गया है फेक आईडीज़ बनाना क्योंकि वो हर बार आपसे फोन नंबर और वास्तविक फोटो की मांग करने लगा है दूसरा कैम्ब्रिज एनालिटिका वाले मामले में लपेटे में आने के बाद जुकरबर्ग बेचारा खुद ही परेशान है तो वो अपनी लाज बचाने के लिए और अधिक कड़े नियम लेकर आएगा ही.

बाकी ये सारी चिंताएं राजनीति में सक्रीय रूप से भाग लेने वालों के लिए हैं और वैसे भी जो शुद्ध राजनीति करने आए हैं वे व्यक्तिगत जानकारियाँ यूं भी नहीं डालते.

बाकी कुछ हम जैसे लोग भी हैं जिनको फेक आईडी से मित्रता निवेदन आने से पहले ही पता चल जाता है कि ये जनाब मित्रता निवेदन भेजने वाले हैं… वो कैसे ये मैं अगले भाग में बताऊंगी…

बाकी ऊपर SALT का ज़िक्र आपको डराने के लिए बिलकुल नहीं किया था… सिर्फ ये बताने के लिए किया कि कुछ लोग आपके मुरीद भी होते हैं जो आपके सामने वास्तविक रूप में आने से शर्माते हो या उनका अहम् आड़े आता हो तो वो छुपकर आपको फॉलो करते हैं, नकली नामों से आपकी तारीफ़ करते हैं… तो वो आपके जीवन का नमक (SALT) है… उनसे आपको कोई खतरा नहीं…

इसके बाद भी आपको लगता है फेसबुक बड़ा खतरनाक है आपके लिए, तो भैया ऐसा क्या ज़रूरी है सोशल मीडिया… छोड़िये ना ये आपसे ना हो पाएगा…

फिर भी दिल नहीं मानता तो आप भी एक फेक आईडी बनाइये और आनंद लीजिये इस “आभा-सी” दुनिया का.

– माँ जीवन शैफाली

जिनके लिए ये दुनिया आभासी नहीं, उनके लिए ‘आभा-सी’ ही रहने दो…

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