इतनी ईमानदारी भी अच्छी नहीं साहब

जेएनयू, बीएचयू और अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय सहित देश के 62 उच्च शिक्षण संस्थान अब यूजीसी की दखलंदाजी से मुक्त होंगे.

यह सभी अब अपनी ज़रूरत के मुताबिक नए कोर्स और विभाग चालू कर सकेंगे. इसके लिए इन्हें अब यूजीसी के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे.

केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने मंगलवार को यूजीसी बोर्ड की मीटिंग के बाद 62 उच्च शिक्षण संस्थानों को स्वायत्तता प्रदान करने की घोषणा की.

उन्होंने कहा कि यूजीसी के तय मापदंडों को पूरी तरह से मानने और नैक की रैकिंग में शीर्ष स्थान प्राप्त करने के बाद इन संस्थानों को स्वायत्त बनाया गया है.

ये सभी संस्थान बगैर यूजीसी की अनुमति के ही जहां नए कोर्स और विभाग चालू कर सकेंगे, वहीं वह ऑफ कैंपस गतिविधियां, रिसर्च पार्क, कौशल विकास के नए कोर्स और विदेशी छात्रों की प्रवेश के नए नियम बना सकेंगे.

इसके अलावा वह सरकार के तय वेतनमान से भी ज्यादा वेतन पर अच्छी फैकेल्टी नियुक्त कर सकेंगे.

इसके साथ ही जिन कालेजों को स्वायत्ता प्रदान की गई है, उन्हें भी नए कोर्स और विभाग शुरू करने की अनुमति रहेगी. वह परीक्षा का मूल्यांकन भी कर सकेंगे, लेकिन डिग्री उन्हें विश्वविद्यालय से मिलेगी.

गौरतलब है कि सरकार ने हाल ही में उच्च शिक्षण संस्थानों को स्वायत्ता देने को लेकर कई बड़े कदम उठाए हैं. इसके तहत हाल में आइआइएम को स्वायत्ता दी है. इसके साथ ही 20 उच्च शिक्षण संस्थानों को विश्वस्तरीय बनाने की काम चल रहा है.

हमारी विकासोन्मुख सरकार की शिक्षा के क्षेत्र में चार साल की ये जबरदस्त उपलब्धि है.

दिल्ली विश्वविद्यालय जो पहले से ही मात्र आंशिक रूप से ही कुछ हद तक स्वतंत्र है, वहाँ हमारी माननीय मानव संसाधन विकास मंत्री स्मृति ईरानी अपने पसन्द के वाइस चांसलर नियुक्त नहीं कर पायीं, जिसका खामियाजा हम लोग अभी तक भुगत रहे हैं.

अब जब ये संस्थाएं पूरी तरह से स्वायत्त हो गई हैं, तो राष्ट्रवादियों का भगवान ही मालिक है. साहब, इतनी ईमानदारी भी अच्छी नहीं.

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