महायुद्ध जीतने के लिए कई बार हारना पड़ती हैं लडाइयां

फूलपुर और गोरखपुर उपचुनाव का रिजल्ट आये एक हफ्ते से ऊपर हो गया. कल एक मित्र का फोन आया.

2019 को ले के बहुत चिंतित थे… पूछने गए, दद्दा क्या होगा 19 में???

यूपी उपचुनाव के बाद समूचे मीडिया में चर्चा चल पड़ी है कि क्या भाजपा-मोदी 2019 जीत लेंगे?

आज से कोई 15 साल पहले मैंने हैदरगढ़ का उपचुनाव देखा था. उस सीट से मुख्यमंत्री राजनाथ सिंह चुनाव लड़ रहे थे.

वो चुनाव जीतना ज़रूरी था. Mid Term में CM बने राजनाथ को 6 महीने के भीतर विधानसभा सदस्य बनना ज़रूरी था.

उस उपचुनाव में भाजपा ने पूरी ताकत झोंक दी थी. UP के प्रत्येक जिले के तहसील और Block स्तर के पदाधिकारियों तक को रुपया पैसा घोड़ा गाड़ी सहित बुला लिया गया था.

एक एक गांव में 4-6 कार्यकर्ता 10 दिन तक डेरा डाले पड़े रहे और एक एक वोट को उठा के बूथ तक ले गए. एक एक वोट को दिल्ली मुम्बई लुधियाना से बुला लिया गया था…

ऐसा आमतौर पर सिर्फ ग्रामप्रधानी के चुनाव में होता है जबकि एक एक वोट को बाकायदे टिकट भेज के दिल्ली मुम्बई से बुलाते हैं प्रत्याशी…

2014 के लोकसभा चुनाव को याद कीजिये.

बनारस में आम आदमी पार्टी से अरविंद केजरीवाल, मोदी जी के सामने कूद पड़े.

फिर क्या हुआ?

पंजाब और दिल्ली का चुनाव निपटा के पूरी आम आदमी पार्टी का एक एक कार्यकर्ता-पदाधिकारी मय लाव लश्कर बनारस में आ के जम गया.

उस समय बनारस में 50 हज़ार से ज़्यादा AAP वॉलंटियार बनारस लोक सभा क्षेत्र के हर गली कूचे गांव गुच्ची में मक्खियों की तरह भिनक रहे थे और एक एक घर में AAP के कार्यकर्ता 5-6 बार पहुंचे…

केजरीवाल ने ट्रेन से उतर के 500 का नोट लहराया था, जबकि हक़ीक़त ये थी कि AAP ने बनारस में सबसे महंगा चुनाव लड़ा और पानी की तरह पैसा बहाया…

एक बारगी तो यूँ लगने लगा कि केजरीवाल वाक़ई मोदी जी को टक्कर दे रहे हैं… कहने का मतलब ये कि जब किसी पार्टी को सिर्फ एक सीट पर लड़ना हो तो वो पूरी ताकत झोंक देती है… और ऐसे में सत्तारूढ़ पार्टी का तो कहना ही क्या?

वो तो धन बल, जन बल, बाहु बल, प्रशासनिक बल सबसे लैस होती है…

तो आखिर फूलपुर – गोरखपुर में भाजपा कैसे चूक गयी???

पूरी चुनाव मशीनरी और संगठन आखिरी दिन तक सुस्त क्यों पड़ा रहा?

जो पार्टी त्रिपुरा तक में पन्ना प्रमुख तक का संगठन बना के बैठी हो उसका बूथ सम्हालने वाला कोई नहीं था गोरखपुर में?

क्यों???

गोरखपुर में मठ के प्रत्याशी को टिकट न दे के कमजोर प्रत्याशी क्यों उतारा?

फूलपुर में मत प्रतिशत 38% इतना कम क्यों रहा?

अच्छा… कल्पना कीजिये कि भाजपा/ NDA की लोकसभा में सिर्फ 270 सीट होती और इन दो सीटों से ही बहुमत होना होता, तो भी क्या फूलपुर में वोटिंग प्रतिशत 38 ही होता?

नहीं…

तब शायद ये 68 – 70% होता…

तब तो रूलिंग पार्टी भाजपा एक एक वोट उठवा लेती, खरीद लेती… वोट कैसे खरीदा जाता है हम नहीं जानते क्या?

उपचुनाव में रूलिंग पार्टी कैसे ग्राम प्रधानों को टाइट करती है, कैसे वोट लिया जाता है, हम नहीं जानते क्या?

BDO और कलेक्टर कैसे ग्राम प्रधान को हड़काते हैं हमने खूब देखा है… पूर्वी UP में 50 हज़ार वोट 5 से 10 करोड़ रूपए में खरीद लिया जाता है. तो क्या योगी जी 20 करोड़ रूपए नहीं जुटा पाए?

भाजपा अध्यक्ष अमित शाह चुनाव प्रबंधन भूल गए क्या???

इतने बड़े UP में भाजपा 5000 कार्यकर्ता सक्रिय नही कर पाई?

जब मेरे मित्र ने बदहवासी में मुझे फोन किया कि दद्दा क्या होगा 19 में… तो मैंने उनसे पूछा कि अगर फूलपुर गोरखपुर जीत जाते तो आप मुझे फोन करते? क्या आप इतने चिंतित, इतने उद्विग्न होते?

त्रिपुरा की प्रचंड जीत के बाद अगर आप यूपी का फूलपुर – गोरखपुर भी जीत जाते तो इस समय आप (भाजपा कार्यकर्ता / संगठन) अत्यधिक आत्मविश्वास से लबरेज़, मस्त हो के सो रहे होते. जबकि आज सबकी नींद उड़ी हुई है. इसका मतलब रणनीतिकार अपनी नीति में सफल रहे!

सपा – बसपा के संयुक्त उम्मीदवार के बावजूद यदि भाजपा उपचुनाव जीत जाती तो संगठन और कार्यकर्ता इस जीत की खुमारी में 2019 को ले के निश्चिन्त हो जाता… क्यों पड़े हो चक्कर में, कोई नहीं है टक्कर में…

पर आज माहौल क्या है? सब चिंतित हैं… परेशान… क्या होगा???

सपा बसपा मिल गए तो क्या होगा???

इनसे लड़ने के लिए बहुत मेहनत करनी होगी… संगठन को बेहद मज़बूत बनाना होगा… सबको ज़मीन पर उतारना होगा… सरकार के कामों को जनता तक पहुंचाना होगा…

उपचुनाव हार के भाजपा ने अपने पूरे संगठन को 2019 के लिए सक्रिय कर लिया है. ये एक सोची समझी रणनीति है जिसमें सभी पक्ष शामिल हैं.

यूँ भी प्री-बोर्ड परीक्षा में स्कूल strict marking करते हैं.

दूसरे का राजा मारने के लिए अपने प्यादे, वज़ीर, घोड़े-हाथी मरवाने पड़ते हैं…

भाजपा हमेशा उपचुनाव हारती है. आगे भी हारेगी. 2019 जीतने के लिए उपचुनाव हारना ज़रूरी था.

Its a preplanned calculated loss… Sometimes you loose the battles to win the War…

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