ज़ङ्ग त्रय : कश्मीरी पंडितों का त्यौहार

नवरेह/नववर्ष के ठीक तीसरे दिन कश्मीरी पंडित समाज एक और पर्व मनाता है जिसे “ज़ङ्ग त्रय” कहा जाता है।यह पर्व आज यानी 20/3 को मनाया जाएगा.

मोटे तौर पर ‘ज़ंगत्रय’ का अर्थ शुभ तृतीया है. माना जाता है कि भगवान शंकर ने जब इस सृष्टि की रचना की तो ठीक तीसरे दिन पार्वती जी अपने मां-बाप के दर्शन करने और नववर्ष/नवसृष्टि की बधाई देने के लिए अपने मायके चली गयी.

तभी से कश्मीरी पण्डितों में यह परम्परा चली आ रही है कि चैत्र शुक्लपक्ष की तृतीया को प्रति वर्ष विवाहित महिलाएं घण्टे दो घण्टे के लिए अपने मायके चली जाती हैं.

अब विस्थापन ने चूँकि परिवारों को छितरा दिया है, लिहाज़ा छोटे-बड़े शहरों में रह रहे पंडित परिवारों की महिलाएं एक ही जगह पर एकत्र होकर इस पर्व को प्रतीक के रूप में मनाती हैं.

अलवर में बहुत वर्षों तक चिनार पब्लिक स्कूल के पंडित मोहन गंजू की माताजी जब तक जीवित थीं,उनके घर पर सारी महिलाएं एकत्र होती थीं और आशीर्वाद पाती थीं.

(Zang Tri is the third day of the New Year (Nawreh). According to mythology, Lord Shiva created the Universe on Nawreh. On the third day, His Consort (Parvati) paid a visit to her parent’s home. So, all Kashmiri married women go to their MALYUN/मायका for an hour or two, conveying good wishes for the new year, and then return to their homes.)

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