उनकी फितरत : कमज़ोर पड़ो तो लड़ो मत, मज़बूत बनो और पूरी क्रूरता से टूट पड़ो

डॉ राजीव मिश्रा की दो साल पुरानी पोस्ट है, आज अधिक ही प्रासंगिक है. तब शेयर की थी, आज सामने आई. आखिरी परिच्छेद बहुत ही काम का है, चाहें तो सीधा वही पढ़ लीजिये मगर ज़ेहन में रखिएगा अवश्य.

काम के बीच में मैच देखने का अपना ही मजा है.

वैसे तो मैंने बहुत सालों से क्रिकेट देखना छोड़ दिया है. पर आज ड्यूटी के बीच एक भारतीय मित्र ने फोन करके बुलाया. व

ह भी ड्यूटी पर था. भारत की बैटिंग शुरू हुई तो उसने बुलाया – उसने वार्ड में अपने मोबाइल पर मैच लगा रखा था.

जैसे ही मैं पहुँचा, रैना आउट हो गया. स्कोर 22 रन पर 3 विकेट…

वह तो लगा मातम करने… अब तो इंडिया हार जाएगा… और कितनी बैटिंग बाकी है? पिच ऐसा है… अफ़रीदी की बॉलिंग वैसी है…

मैंने कहा – मुझे इतना समझने की ज़रूरत नहीं है. मैच के आखिरी बॉल तक मेरा दो शब्द का मैच एनालिसिस होता है… हम जीतेंगे…

जब पंद्रह रन और बन गए, तब मैंने कहा – अब पाकिस्तानी अकबकाने लगेंगे… वाइड फेकेंगे, मिसफील्ड करेंगे, बाउंसर मारेंगे… और पंद्रह-बीस रन बन जाएंगे तो हिम्मत हार देंगे…

यह पाकिस्तान है, ऑस्ट्रेलिया नहीं कि आखिरी बॉल तक लड़ेगा… मुझे अपने खिलाड़ियों के टैलेंट पर चाहे ज्यादा भरोसा ना हो, पाकिस्तानियों के टेम्परामेंट पर पूरा भरोसा है…

यह भरोसा बेवजह नहीं है. इसका एक ऐतिहासिक कारण है.

पूरे इस्लाम का टेंपरामेंट ऐसा ही है. ये लोग हारने वाली लड़ाइयाँ नहीं लड़ते. जब दुश्मन कमज़ोर पड़ता है तो ये पूरी क्रूरता से टूट पड़ते हैं. पर जैसे ही दुश्मन भारी पड़ने लगता है, ये तुरंत हिम्मत हारकर हथियार डाल देते हैं.

यह इस्लाम की फितरत है, Strategic doctrine है. जब कमज़ोर पड़ो तो लड़ो मत, हथियार डाल दो. ताकतवर बनने का इन्तजार करो. जैसे ही मजबूत पड़ो, फिर पूरी क्रूरता से टूट पड़ो.

यही इस्लाम का डेढ़ हज़ार साल का इतिहास है, यही पाकिस्तान की क्रिकेट टीम का रिकॉर्ड है.

मेरी टिप्पणी

ये जो हत्या, बलात्कार और जबरन कब्जा आदि की घटनाएँ हो रही हैं इनके बारे में यही बात समझ लीजिये – दोहराता हूँ – ये लोग हारने वाली लड़ाइयाँ नहीं लड़ते.

जब दुश्मन कमजोर पड़ता है तो ये पूरी क्रूरता से टूट पड़ते हैं. पर जैसे ही दुश्मन भारी पड़ने लगता है, ये तुरंत हिम्मत हारकर हथियार डाल देते हैं.

यह इस्लाम की फितरत है, Strategic doctrine है. जब कमज़ोर पड़ो तो लड़ो मत, हथियार डाल दो. ताकतवर बनने का इन्तजार करो. जैसे ही मजबूत पड़ो, फिर पूरी क्रूरता से टूट पड़ो. यही इस्लाम का डेढ़ हजार साल का इतिहास है.

समझिए – Strategic doctrine है. जब कमज़ोर पड़ो तो लड़ो मत, हथियार डाल दो. ताकतवर बनने का इन्तजार करो. जैसे ही मज़बूत पड़ो, फिर पूरी क्रूरता से टूट पड़ो…

हुदैबिया की सुलह को समझिए, उसके बाद फतह मक्का को समझिए. जैसे ही आप इन्हें समझने लगते हैं और कड़ियाँ जोड़कर लोगों को समझाने लगते हैं, आप को गालियां देना शुरू हो जाएगा, “तुम्हें कुछ भी पता नहीं है” यह शुरुआत होती है.

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