वेदना के पाँव में हैं आह के घूंघर

१】
साँस की लड़ियाँ तुड़ाये जा रहे हो!
हाथ हाथों से छुड़ाए जा रहे हो!
तुम बिना पल जिंदगी के
हो चले दूभर

२】
नीर आँखों में समोए, कंठ सूखा रूह प्यासी
जीभ में छाले पड़े हैं, आत्मा में है उदासी
वेदिका के रीतते घट
सूखता पोखर

३】
सामने सूरज चमकता, अंत अंधियारा हुआ,
प्राण का साथी हिराना, चित्त दुखियारा हुआ,
एक बित्ता जोड़ती हूँ
टूटता गजभर

४】
नाम अपना ही लिया था, था तुम्हें कुछ यों पुकारा
टूटकर गिरता नहीं अब आँचरे में कोई तारा

तुम नहीं सुन पा रहे थे
वेदिका के स्वर

Comments

comments

loading...

LEAVE A REPLY