गौरक्षा – 2 : जैविक खाद बनाने की विधि

जैविक खाद

गाय ग्राम्य अर्थव्यवस्था का आधार है कुछ मित्र इस बात से व्यथित हैं कि गाय दूध नहीं देती तो क्या करें. हद है भाई जब तक दूध देती थी तब तक आप दूध पीते थे बेचते भी थे अब नहीं देती तो काटने के लिए बेच दो. ख़ैर मैं बिना दूध वाले गोवंश के फ़ायदे लिखता हूँ आप बताइए की किस तरह वह आप पर बोझ है.

मान लेता हूँ आपके पास एक एकड़ ही ज़मीन है कितने की खाद डालते हैं साल भर में? जवाब है नहीं पता. मैं बताता हूँ कम से कम आप साल भर में अगर दो फ़सल भी लेते हैं तो 20000 रुपए की खाद डालते हैं और अगर सब्ज़ी या वनस्पतियों की खेती करते हैं तो अलग से कीटनाशक और टोनिक का उपयोग करते हैं इस तरह कुल खाद की और दवाओं की क़ीमत लगभग तीस हज़ार तक पहुँच जाती है.

एक गाय दूध वाली और एक बिना दूध वाली भी है तो आपको एक भी पैसा खाद में नहीं लगेगा. साल भर का गोबर इकट्ठा कीजिए उसको हर तीन या पाँच महीने में खेत में डाल दीजिए जो आपकी ज़मीन की उर्वरक शक्ति को बचाएगा साथ ही आपको खाद बनाने की विधि देता हूँ जिसका नाम है जीवामृत/ घनमृत यह अमृत है, रासायनिक खाद ज़हर!

मोटा मोटा एक एकड़ का हिसाब लेकर चलते हैं बाक़ी अपने खेत के हिसाब से कम ज़्यादा कर लीजिएगा.

15 किलो गोबर लीजिए और 15 लीटर मूत्र लीजिए. ध्यान रहे यह गोबर और मूत्र एक ही जानवर का हो माने जिसका गोबर उसका मूत्र और वह जानवर है देशी गाय या फिर देशी बैल फिसीयन और जर्सी नहीं होना चाहिए. गाय पहचाने के लिए जिस गाय या साँड़ की पीठ पर डिल होता है उभरा हुआ भाग गर्दन के जस्ट बाद में वह देशी होगी.

अब उसमें एक किलो गुड़ डाल दीजिए गुड़ कौन सा होगा उसके लिए जो ख़राब हो चुका हो जिसको कोई खाने को तैयार न हो माने सड़ा हुआ एकदम गाँव में राब या सीरा भी बोलते है उसको मिला दीजिए यह सबसे उत्तम है.

अब एक किलो दाल चाहिए आप बोलेंगे दाल तो खाने को नहीं मिलती है तो कोई बात नहीं दाल सबसे सड़ी हुई जो खाने लायक न हो बाज़ार से ले लीजिए या घर में हो तो भी चलेगा या ख़राब बेसन ही ले लीजिए तुअर मटर मूँग मसूर चना किसी का भी चलेगा.

अब एक किलो लगभग मिट्टी डाल दीजिए वह किसी पीपल या बरगद के पेड़ के नीचे से ही लेना है उसका कारण है बाद में लिखूँगा वह सबसे फ़ायदेमंद है इसलिए कह रहा हूँ.

यह सब सामान किसी प्लास्टिक या लकड़ी के ड्रम में मिला लीजिए हाथ से भी मिला सकते हैं अन्यथा घिन हो तो लकड़ी से मिला लीजिए. मिलाने के किसी छाया वाली जगह पर इसको 15 दिन तक ढंककर रखिए और रोज़ सुबह शाम मिलाते / हिलाते रहिए लकड़ी से. 15 दिन के बाद यह खाद बनकर तैयार हो जाएगी.

अब आपको इसमें लगभग 200 लीटर पानी मिलाना है. अब खाद तैयार है कितनी ज़मीन एक एकड़ के लिए ज़मीन कम ज़्यादा है तो उसी हिसाब से मात्रा घाटा या बढ़ा सकते है.

प्रयोग विधि

डालना कैसे है? आप स्प्रेअर से खेत में छिड़काव कर दीजिए याद रहे खाद ज़मीन पर भिगोने के हिसाब से डालना है पत्तों पर न छिड़के असर कम होता है या फिर पानी लगाते समय किसी ड्रम में छेद करके रख लीजिए पानी के साथ खेत में घुलती जाएगी या फिर इस मिश्रण को गोबर के कंडे पर डालकर खेत में जगह जगह फ़ेक दीजिए. अगर घर में कंडे भी न हों तो धान की भूसी या राख को लीजिए उसके लड्डू बनाइए और खेत में फ़ेक दीजिए जगह जगह. कैसे भी करके खेत में डालिए.

यह खाद आपको हर 15-20 दिन के अंतराल पर खेत में डालना है एक बार खेत तैयार करते समय बाक़ी फ़सल में इस तरह न सिर्फ़ आपका गौवंश आपके खाद का पैसा बचा रहा है बल्कि ज़मीन की उर्वरक शक्ति को वापस कर रहा है मिट्टी को मज़बूत कर रहा है साथ ही पानी सोखने की क्षमता को बढ़ाता है बंजर होने से बचाता है.

ऐसे कई हज़ार फ़ायदे गिनवा सकता हूँ फ़िलहाल यह ज़ीरो बजट फार्मिंग और वैदिक फ़ॉर्म्युला है अपने खेत में उपयोग करके देखिए मैंने करके लिखा है कोई भी हवा हवाई बात नहीं की गई है यक़ीन करें फ़ायदा मिलेगा!

क्रमश:

– शैलेंद्र सिंह

गौरक्षा – 1 : इतिहास

Comments

comments

loading...

LEAVE A REPLY