कुछ तो शर्म करो और देश को जवाब दो राहुल गांधी

वो अदालत ना भाजपा की थी, ना RSS की थी. इसके बजाय वो अदालत हिंदुस्तान से लगभग साढ़े छह हजार किलोमीटर दूर स्थित लंदन की थी.

अर्थात मोदी सरकार के किसी भी प्रशासनिक राजनीतिक दबाव/प्रभाव से हज़ारों किलोमीटर दूर.

बीते शुक्रवार (16 मार्च) को लंदन की उस अदालत में भारत के भगोड़े अपराधी विजय माल्या के प्रत्यर्पण की सुनवाई हो रही थी.

इस मामले में लंदन की वेस्टमिंस्टर मजिस्ट्रेट अदालत की न्यायाधीश एम्मा आर्बथनॉट ने भारत से भागकर ब्रिटेन में शरण लेने वाले भारतीय शराब कारोबारी विजय माल्या के प्रत्यर्पण के मामले में सुनवाई करते हुए माल्या द्वारा भारतीय बैंकों के साथ की गयी हज़ारों करोड़ की ठगी/ धोखाधड़ी के लिए भारतीय बैंकों को ही जिम्मेदार बताया.

शुक्रवार को माल्या केस में सुनवाई करते हुए न्यायधीश एम्मा आर्बथनॉट ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि, माल्या की एयरलाइंस कंपनी किंगफिशर को कर्ज़ देने में भारतीय बैंकों ने अपने ही नियमों-कानून का जबरदस्त उल्लंघन किया, लोन देने में नियमों की धज्जियां उड़ाई गयीं. यह बात ‘बंद आंख से भी’ देखी जा सकती है.

लंदन की वेस्टमिंस्टर मजिस्ट्रेट अदालत की न्यायाधीश एम्मा आर्बथनॉट की उपरोक्त टिप्पणी के पश्चात ज़रा याद करिये तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और वित्तमंत्री चिदम्बरम द्वारा बैंकों की आपत्ति के बावजूद माल्या को कर्ज़ देने का आदेश देनेवाली उन चिट्ठियों को, जिनमें बेंकों द्वारा ब्लैकलिस्ट किये जा चुके विजय माल्या को हज़ारों करोड़ का कर्ज और अधिक कर्ज़ देने की पैरवी और सिफारिश स्पष्ट शब्दों में बहुत खुलकर की गयी थी.

यह सभी चिट्ठियां संसद के पटल से लेकर मीडिया के मंचों तक महीनों पहले सार्वजनिक हो चुकी हैं.

अतः शुक्रवार को लंदन की वेस्टमिंस्टर मजिस्ट्रेट अदालत की न्यायाधीश एम्मा आर्बथनॉट ने भारतीय बैंकों द्वारा विजय माल्या को कर्ज देने में की गई जिस धांधली और भ्रष्टाचार को खुलकर उजागर किया है उसका जिम्मेदार क्या केवल बैंकों के अधिकारियों को माना जाए?

क्या किसी बैंक अधिकारी को यह अधिकार होता है कि वह देश के प्रधानमंत्री और वित्तमंत्री द्वारा बाकायदा चिट्ठी लिखकर दिए गए आदेश को नकार दे?

अतः लंदन की वेस्टमिंस्टर मजिस्ट्रेट अदालत की न्यायाधीश एम्मा आर्बथनॉट ने शुक्रवार को बहुत साफ कर दिया है कि भारत से बैंकों का हज़ारों करोड़ लूटकर भागे विजय माल्या से ज्यादा उस लूट का जिम्मेदार कौन है.

देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर भ्रष्टाचार के अभद्र, अराजक, असत्य आरोप लगाने वाले राहुल गांधी को लंदन की उस अदालत की टिप्पणी के बाद शर्म आनी चाहिए और देश को जवाब देना चाहिए कि कांग्रेसी प्रधानमंत्री-वित्तमंत्री की जोड़ी ने बैंकों द्वारा ब्लैक लिस्ट हो चुके विजय माल्या को कर्ज देने की सिफारिश चिट्ठी लिखने का वह भ्रष्टाचारी कुकृत्य क्यों किया था जिसकी कलई लंदन की अदालत में भी खुल रही है.

आश्चर्यजनक तथ्य यह है कि कभी भी किसी भी सड़कछाप नेता के बयान को विवादित बताकर उसपर घण्टों बहस करनेवाले न्यूज़ चैनलों से लंदन की अदालत की न्यायाधीश के बयान का समाचार गधे के सिर से सींग की तरह गायब है. केवल कुछ अंग्रेज़ी अखबारों ने इसे छापा.

Mallya extradition case: UK judge says obvious’ Indian banks broke rules

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