Decoding Secrets : असली गंगा वही है… Breath of your breath!

क्या कारण हो सकता है कि हमारे देश में नदियों तक को भी “पवित्र” माना गया है? कोई कहता है कि गंगा नदी के पानी में औषधीय गुण हैं. तो फिर क्या paracetamol की गोली को भी पूजा जाए? फसलें तो नहरों के पानी से भी लहलहा रही हैं. तो क्या नहरों में डुबकी लगाने से पाप धुल जाएंगे?

दरअसल हमारे मनीषियों ने कोई कसर नहीं छोड़ी हमारे तक सृष्टि का अद्भुत और रहस्यमयी ज्ञान पहुंचाने में जिसको केवल शब्दों के द्वारा पहुंचना असम्भव सा काम था. इसलिए उन्होंने प्रकृति के ही विभिन्न स्थलों को चिह्नित किया और उन स्थानों को मिथकीय (codified) कहानियों से जोड़ कर हम तक पहुंचाया.

उदाहरण के लिए यदि आप गंगापुत्र भीष्म के जीवन चरित्र की बारीकी से पड़ताल करें तो DNA की उत्पत्ति का रहस्य आप जान सकते हैं. इस पर अभी चर्चा नहीं…..

कबीर ने ये पूछे जाने पर कि ईश्वर कहां है उत्तर दिया था कि वह आपकी श्वास का भी श्वास है. Breath of your breath! कबीर “प्राण-शक्ति” की बात कर रहे थे जो हमारी रीढ़ की हड्डी में सर्प की भांति लिपटी हुई इड़ा और पिंगला नाड़ी (subtle channels) में प्रवाहित होता है.

यही दोनो नाड़ियां राइट ब्रेन और लेफ्ट ब्रेन को नियंत्रित करती हैं. योगिक क्रियाओं द्वारा इन दोनों के बीच संतुलन स्थापित होने पर इनके बीच में स्थित सुषुम्ना नाड़ी जागृत होती है और मूलाधार (रीढ़ के नीचे) से कुंडलिनी शक्ति सर्प की भांति तेजी से ऊपर उठती हुई सहस्रार चक्र(सिर के ऊपर) को भेद देती है, जिस से साधक को मोक्ष/अमरत्व प्राप्त होता है.

इन्ही तीन नाड़ियों को पृथ्वी पर गंगा जमुना सरस्वती के रूप में चिह्नित किया गया है. आज्ञा चक्र (दोनो भौहों के बीच) इन तीनों का मिलन केंद्र (संगम है). इसी प्रयाग में डुबकी लगाने से मोक्ष प्राप्त होता है. वारा-नसी (beyond nostrils) में प्राण त्याग ने मोक्ष मिलने का रहस्य भी यही है.

हरिद्वार स्थित गंगा नदी में स्नान करने में कोई बुराई नहीं, परंपरा के द्वारा ही छिपे हुए ज्ञान को आगे की पीढ़ियों तक पहुंचाया जाता है. किंतु यदि आप वाकई अपने पाप धोना चाहते हैं तो डुबकी लगाइये अपनी श्वास की भी श्वास में. असली गंगा वही है. Breath of your breath!

अध्यात्म की गोद में खेलता विज्ञान

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