अनैतिक भाजपा-2 : घर में मर्ज़ी से टीवी तो नहीं चला पाते, FB पर सरकार चलाने आ जाते हैं!

कांग्रेसियों को तो बहुत मिर्ची लगाई है आज भाजपाइयों को लगाएंगे, सो कृपया कमज़ोर दिल वाले आगे ना पढें.

भाजपा की ज़बरदस्त जीत, कांग्रेस सहित सभी पार्टियों को पछाड़ कर जीत का परचम लहराया…

हर बार विरोधी जीत जाते थे, पर इस बार भक्तों ने पूरी ताकत लगा कर भाजपा को जितवा दिया…

जी, ये हमारी “नैतिक” जीत है…

[अनैतिक भाजपा -1 : भटके हुए को सत्य के मार्ग पर लाना ही तो सिखाता है हिन्दू धर्म]

अरे सीट जीतना, सरकार बनाना, ये सब तुच्छ है… राजनीति में “नैतिकता” बड़ी चीज़ है. हार जाएं पर शान कम नहीं होनी चाहिए. हमारे भक्त इतने नैतिक हैं कि बार में भी जाते हैं तो शराब नहीं दूध मांगते हैं.

जैसे ही काउंटिंग शुरू हुई भाजपा हारने लगी, तभी कुछ अतिउत्साहित, मंदबुद्धि, अकड़ू और ईगो में चूर भक्तगण “नैतिकता” आंटी को काउंटिंग स्टेशन ले गए…

बस फिर क्या था, नैतिकता आंटी ने सब को जम कर फटकारा, लोगों का ज़मीर जाग गया और भाजपा को जितवा दिया…

अरे वो तो नैतिकता आंटी अटल बिहारी सरकार के टाइम समय पर संसद नहीं पहुँच पायीं थी वर्ना सरकार एक वोट से कभी नहीं गिरती…

हमने तो तब भी नैतिकता आंटी से कहा था, आंटी देर हो रही है सलवार सूट पहन लीजिये, पर आंटी ठहरी नैतिक सो बोलीं, नहीं यह नैतिक नहीं होगा मैं भारतीय नारी हूँ साड़ी ही पहनूँगी… बस पल्लू लेने में देर हो गयी और गिर गयी सरकार.

जो भाजपा सपोर्टर आज निराश हैं वे निराश ना हों, क्योंकि हर बार जब भी अमित शाह ने नैतिकता आंटी को बिना बताए भाजपा को जीत दिलवाई तब आप सब ही चिल्ला रहे थे “क्या सरकार बनाने के लिए कुछ भी करोगे? कहाँ हैं नैतिक मूल्य?”

तो संभालिये नैतिक मूल्य, जब भी किसी विरोधी को पार्टी में लाओ, तब भक्तगण ही अमित शाह को गाली देते थे…

मने जो लोग मंडी से 10 बार अपनी बीवी की फ़ोन कर के पूछते हैं क्या लाना है और हर चीज़ का भाव बताते अपनी मर्ज़ी से एक नींबू नहीं खरीद सकते वे भी फेसबुक पर मोदी और अमित शाह को बता रहे थे कि क्या करना है…

जो अपनी मर्ज़ी से घर में टीवी नहीं चला सकते वे फेसबुक पर सरकार चलाने आ जाते हैं… मर्द हैं भाई…

यार, अपनी फ्रस्ट्रेशन कहीं और जा कर निकालो… काहे पार्टी का जनाज़ा निकलने पर तुले हो, जिनके घर में उन्हें एक वोट न मिले वे भी उछल कूद मचाने में कोई कसर नहीं छोड़ते…

औकात नहीं पार्षद का चुनाव जीतने की, जीतने की बात तो बहुत बड़ी हो गई… औकात नहीं पार्षद का चुनाव लड़ने की, और सलाह देने निकले हैं मोदी और अमित शाह को जो पूरा देश चला रहे हैं, शर्म है कि आती ही नहीं.

ख़ैर मित्रों, जो हो गया सो हो गया, अब आपको सोचना है कि नैतिकता आंटी के पल्लू में अपने आंसू पोछना है या जीत का परचम लहराना है?

याद रखना जब सरकार नहीं रहेगी तो कम्युनल वॉइलेंस बिल जैसे सैकड़ों बिल आएंगे, पिछाड़ी पर लाल सलाम होगा, शोभा ओझा जी तो कह ही चुकीं हैं.

महज़ 2 सीट हारने पर इतने विचलित हो गए, तब क्या होगा जब सरकार गिर जाएगी? 100 के अंदर सिमट जाओगे?

ध्यान रखना अपने पास सिर्फ 32% वोट शेयर है और विरोधियों के पास 68%… अब जब वे एक साथ लड़ेंगे तो क्या होगा? वही होगा जो गोरखपुर में हुआ, गोरखपुर का मज़बूत किला भी ढह गया.

अभी तक इसलिये जीते क्योंकि विरोधियों का वोट बैंक बंटा हुआ था, पर अब एक है. ऐसे में सबसे सुरक्षित सीट भी चली गयी.

अगर आपको लगता है कि नैतिकता आंटी जिता देंगी तो फिर फेसबुक बन्द कर पोगो देखिये…

अब भी वक्त है सुधर जाइये, एक बार फिर कहता हूँ जंग और मोहब्बत में सब जायज़ है, जिसे तोड़ना पड़े तोड़ो, जिसे फोड़ना पड़े फोड़ो, बिकाऊ को खरीदो, निकम्मों को बाहर करो, जीत के लिये कुछ भी करो, क्योंकि जो जीता वही सिकंदर.

जनता जनार्दन है, माईबाप है, उसे गलत कहने या ताने देने की गलती कभी मत करना, जो फैसला जनता ने सुनाया है उसे सर माथे लेना ही होगा हर हाल में.

भाजपा को अगर कोई हराएगा तो वो यही मंदबुद्धि, अकड़ू, ईगो में चूर, अतिउत्साहित कार्यकर्ता ही हराएगा. नींद से उठो, जागो कि भोर होने को है.

अपनी झूठी शान को त्याग कर सच को स्वीकार करो और नि:स्वार्थ भाव से काम करो, देश आपकी ईगो से बहुत बड़ा है, जिन्हें ईगो ज़्यादा प्यारी है वे तत्काल यहाँ से निकल लें वर्ना उनकी कमसिन ईगो को हम छेड़ देंगे, फिर न कहना कि यह अनैतिक है, कृपया अमित शाह और मोदी जी को राजनीति के पाठ न पढ़ाइए.

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