तेलों के बारे में जानकारी : कौन सा खायें और कौन सा नहीं

आजकल ये आमतौर पर देखा जाता है कि जब आप डॉक्टर के पास जाते हैं तो वो आपको कहते हैं कि तेल रिफाइण्ड या डबल रिफाइण्ड खायें, नहीं तो आपको हार्ट अटैक की समस्या या उच्च रक्तचाप या ट्राईग्लिसाराईड आदि की समस्या हो जायेगी.

कोई भी डाक्टर ये नहीं कहता है कि तेल सरसों या तिल या मूँगफली या नारियल का खायें या तिल का खायें. ये बात आप समझ गये होंगे कि वो ये क्यों कहते हैं.

अब सच्चाई क्या है

सभी रिसर्चर तथा वागभट जी तथा आर्युवेद यही कहते हैं कि तेल में जितनी अधिक बास और चिपचिपाहट होगी तेल उतना ही अधिक शुद्ध होगा. अर्थात तेल में जो बास और चिपचिपाहट होती है उसमे उतना ही HDL अधिक होगा ये चिपचिपाहट ही hdl होता है. और ये hdl ही है जो तेलों से आता है जो लिवर में बनता है.

यदि आप शुद्ध तेल प्रयोग करते हैं तो ये hdl ही है जो आपके शरीर में वात के रोगों से दूर रखता है तथा hdl को नियंत्रित रखता है और ये hdl आपको हार्ट अटैक से दूर रखता है.

राजीव भाई जी ने छत्तीसगढ़ में कुछ लोगों पर ये परिक्षण किया था –

जिनको कोलेस्ट्रोल, ट्राईग्लिसाराईड तथा उच्च रक्तचाप की समस्या अधिक थी, राजीव भाई जी ने उन्हें शुद्ध तेल खाने की सलाह दी. क्योंकि छत्तीसगढ़ में गाँव गाँव में अभी भी शुद्ध तेल घाणी से निकाला जाता है. और उनको रिफाइण्ड तथा डबल रिफाइण्ड तेल बंद करा दिया.

कुछ समय बाद अद्भुत परिणाम मिले. डॉक्टर को दोनों रिपोर्ट दिखाई पहले और बाद वाली
डॉ ने इसे चमत्कार बताया. उनके तीनों लेवल नियन्त्रण में आ गए.

जो मित्र गांव के रहने वाले हैं वो अच्छी तरह से जानते होगे कि हमारे भारत में वर्ष में 100 से ज्यादा त्योहार आता है. और हर त्योहार में सभी पकवान शुद्ध तेल और शुद्ध घी प्रयोग होता था गांवों में अभी भी होता है. और आज से 50-60 वर्ष पहले हमारे किसी भी पूर्वजों को कभी कोई बीमारी नहीं हुई इस तरह की.

कभी सुना भी नहीं था, और वे खूब घी तेल खाते थे और आज तो 17-18 वर्ष के बच्चों को हार्ट अटैक आ जाता है, ऐसे हज़ारों की संख्या में युवा व बच्चे भी हैं.

वागभट जी और आर्युवेद ये कहता है कि यदि सरसों के तेल में मुंह लगाकर देखें और आँखों से आंसू आ जाये तो वह शुद्ध तेल होता है. इसलिए रिफाइण्ड, डबल रिफाइण्ड तेल छोड़ें और शुद्ध तेल (चाहे सरसों या तिल या मूँगफली या नारियल) या शुद्ध घी खायें.

जीवन भर वात के रोगों से बचे रहेंगे और भारत में 60-70 प्रतिशत रोग वात के ही होते हैं.

नोटः जिन लोगों को हार्ट ब्लोकेज, उच्च रक्तचाप तथा ट्राईग्लिसाराईड की समस्या है वो पहले किसी वैद्य से परामर्श के बाद ही ये सब करें और जो स्वस्थ है वो प्रयोग कर सकते हैं.

अमर बलिदानी श्री राजीव दीक्षित जी के व्याख्यानों से

– नेत्रपाल सिंह चौहान हरिद्वार
फेसबुक पेज तेल घाणी लघु गृह उद्योग से साभार

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