पिता

पिता की स्मृतियों को
कुछ इस तरह से करता हूँ याद
जैसे बिछड़ गई हो
कोई चींटी अपनी कतार से
और भटक रही हो बियाबान में

पिता से खुद के रिश्तों को
कुछ इस तरह से करता हूँ याद
जैसे समन्दर के सफर में हो गई हो शाम
हवाएं तेज हो और भूल गया हूँ मकाम

एकदिन अचानक से
मर गए पिताजी
लेकर एक बीमारी का बहाना
मरने में उनकी कोई भूमिका नहीं थी
मगर हम सब के जीने में
उनकी महत्वपूर्ण भूमिका थी
विज्ञान से लेकर समाज
दे सकता है इस बात की गवाही

पिता का अचानक मर जाना
उम्मीदों का मर जाना है
समझदारी का असमय आ जाना है
खुद ही खुद को समझाना है

एक व्यक्ति मरता है
एक व्यक्ति जीता है
इन दोनों वाक्यों को
उलटा करके पढ़ना
पिता के बाद सीख पाया मैं

जीते जी पिता थोड़े लापरवाह रहे
उन्हें नहीं पता थे
मेरे दसवीं बारहवीं के विषय
मगर उन्हें ठीक ठीक पता थी
मेरी ज़रूरतें
वो पढ़ लेते थे मेरे उम्र से जुड़े संकोच
दो मांगने पर देते थे हमेशा ढाई हजार

पिता अब नहीं है
अब जबकि मैं खुद एक पिता हूँ
इसलिए समझता हूँ
पिता होने का अर्थ
जोकि उनके जीवित रहते
नहीं समझ पाया

पिता की स्मृतियां
बेहद अस्त व्यस्त दस्तावेज़ है
इतने अस्त व्यस्त की उनमें
जगह जगह माफियां
दर्ज करना चाहता हूँ
मगर कर नहीं पाता

पिता इस बात पर
खुश और नाराज़
एक साथ है.

  • डॉ.अजित

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