बापजी का चेला

साल था 1999. लोकसभा के चुनाव सम्पन्न हुए ही थे.

रिज़ल्ट आया तो मुलायम सिंह यादव दो जगह से चुने गए. एक सीट कन्नौज उन्होंने छोड़ दी.

यहां उतारा बेटे अखिलेश को. उनके सामने बसपा ने उम्मीदवार खड़ा कर दिया अकबर अहमद डंपी को.

मुलायम सिंह यादव मुश्किल में पड़ गए. NDA की तरफ से ये सीट लोकतांत्रिक कांग्रेस के खाते में आई थी, जिसके मुखिया थे नरेश अग्रवाल.

उन्होंने जाकर ‘बाप जी’ से कह दिया, “हम नहीं लड़ पाएंगे. ये हाई प्रोफाइल सीट हो गई है.”

‘बापजी’ ने कह दिया, “जैसी आपकीं इच्छा.”

‘बापजी’ के यहां से लौटकर नरेश ने ये बात मुलायम सिंह को फोन पर बताई. मुलायम ने उन्हें डांटा. बोले, “टिकट क्यों लौटा दिया. तुम लोगों को ही चुनाव लड़ना है और कोई ब्राह्मण कैंडिडेट उतारना है.”

अब नरेश को बड़ी आफत. फिर पहुंचे ‘बाप जी’ के पास. बोले, “कार्यकर्ता नहीं मान रहे हैं.”

‘बापजी’ तो सर्वज्ञाता. सियासत के महागुरु. आंखे बंद कर हंस दिए, बोले, “अच्छा, नहीं मान रहे हैं, तो चलो मैं ही मान जाता हूं.”

लोकतांत्रिक कांग्रेस ने मुलायम की इच्छानुसार कन्नौज से टिकट दिया प्रतिमा चतुर्वेदी को. चुनाव जीते अखिलेश यादव.

मुलायम नरेश के प्रति और मुलायम हो गए. ‘बापजी’ का भी एक बहुत बड़ा मकसद हल हो गया. उसकी चर्चा फिर कभी.

जानते है ये ‘बापजी’ कौन हैं?

ये हैं परम आदरणीय अटल बिहारी वाजपेयी. अटल जी को 3 व्यक्ति ही ‘बापजी’ संबोधन देने का अधिकार रखते थे. एक उनके दामाद रंजन भट्टाचार्य, दूसरे स्व. प्रमोद महाजन और तीसरे नरेश अग्रवाल.

तो जो लोग नरेश अग्रवाल के भाजपा प्रवेश पर हायतौबा मचाये हुए हैं उन्हें बता दूं कि उत्तर प्रदेश की राजनीति में नरेश अग्रवाल भाजपा के प्यादे भर हैं.

इसे एक कथा के माध्यम से समझ सकते हैं.

एक दयालु गुरु जी थे. उनके आश्रम में एक चूहा था. एक दिन परेशान होकर आया. बोला, “बिल्ली परेशान करती है.” गुरु पसीज गए. बोले, “बिल्ली बन जा”.

फिर बिल्ली आई. बोली, “कुत्ते परेशान करते हैं.” “कुत्ता बन जा.” फिर कुत्ता आया. “भेड़िए परेशान करते हैं.” “भेड़िया बन जा.”

फिर वो चूहा, जो भेड़िया बन गया था, एक आखिरी बार फरियाद ले आया. गुरु को बोला कि शेर परेशान करता है. गुरु जी ने कहा, “जा, अब तू बब्बर शेर बन जा.”

अब बब्बर शेर दहाड़ता घूमता. सबको डराता. भूल गया कि सब गुरु का किया-धरा है. एक दिन गुरु ने उसे समझाया, “ये गलत है”. वो गुरु पर दहाड़ने लगा.

गुरु फिर भी समझाते रहे. तो वो गुरु को खाने के लिए झपटा. गुरु ने हाथ हवा में तान दिए. बोले, “पुनर्मूषको भव”. यानी फिर चूहा बन जा. वो चूहा बन गया.

आज नरेश के भाजपा प्रवेश ने बता दिया है कि गुरु तो भाजपा ही है और चूहा जो शेर बन सबको डरा रहा था, वो है नरेश अग्रवाल.

कांग्रेस की अरबों रुपये खर्च करके विदेश से बुलाई गई प्रचार कंपनी परेशान है. यही कंपनी सोशल मीडिया पर सैकड़ों फेक एकाउंट के माध्यम से भाजपा के समर्थकों के मन मे यह बात डालने का प्रयास कर रही है कि नरेश अग्रवाल का भाजपा प्रवेश अनैतिक है.

भाजपा समर्थकों को समझना होगा कि नरेश अग्रवाल ‘बापजी’ यानी अटल जी का ही चूहा अर्थात चेला है. वह गलतफहमी में खुद को शेर समझ रहा था. उसे उसकी हैसियत दिखा दी गयी है और माया-मुलायम-कांग्रेस-वामपंथियों के गठजोड़ को उनकी औकात.

याद रखियेगा ‘मोदी मारता कम, घसीटता ज्यादा है’.

Comments

comments

loading...

LEAVE A REPLY