अनैतिक भाजपा -1 : भटके हुए को सत्य के मार्ग पर लाना ही तो सिखाता है हिन्दू धर्म

एक रुपये का पेट्रोल बचाने के लिए रॉंग साइड चलने वाले, बिजली चोरी करने वाले, गलत तरीके से बच्चे का एडमिशन करवाने वाले, पानी और हाउस टैक्स का बिल ना भरने वाले…

हर जगह que तोड़ कर दादागिरी के दम पर पहले अपना काम करवाने वाले, ठेलेवालों और गरीबों पर रौब गांठने वाले, बिना हेलमेट के चलने वाले, इधर उधर पीक कर देश को गंदा करने वाले…

दूसरों का हक़ मारने वाले, किसी दूसरे की दुकान/ घर के सामने ज़बरदस्ती गाड़ी लगाने वाले, दुकानदार को बिना बिल के माल बेचने को मजबूर करने वाले…

‘अपना काम बनता भाड़ में जाये जनता’ दिन में 100 बार जपने वाले कह रहे हैं कि भाजपा ने नरेश अग्रवाल को ले कर अनैतिक कार्य किया है…

भाईसाहब, बोलने से पहले ज़रा अपने अंदर एक बार झांक लेते?

जिस नैतिकता की आप दुहाई दे रहे हैं उसी नैतिकता की वजह से हिन्दू 2000 साल तक हारता रहा, क्योंकि हम सुबह होने पर शंखनाद कर हमला करते थे और आक्रमणकारी रात में बिना बताए हमारे सोते हुए सैनिकों का गला काट देते थे…

हिन्दू कभी हमला नहीं करते थे बल्कि उन पर हमला होता था, हमें दुश्मन का पता होता था तब भी उस पर हमला करने के बजाए हम उसे तैयारी करने का पूरा मौका देते थे और उसके हमला करने का इंतज़ार करते थे…

नतीजा यह होता था कि वो अपने आपको बलशाली कर के आक्रमण करता था और हम हार जाते थे, हम हर बार इसी नैतिकता के कारण हारे, इसी नैतिकता के कारण पृथ्वीराज चौहान हारे थे.

नैतिकता तो प्रभु श्री राम को भी किनारे रखनी पड़ी जब उन्होंने बाली को छुप मारा था वर्ना वे कभी रावण तक पहुँच ही नही पाते…

नैतिकता तो भगवान श्री कृष्ण को भी छोड़नी पड़ी थी जब उन्होंने शिखंडी को सामने कर भीष्म पितामाह को बाणों की शैय्या पर लेट दिया था…

नैतिकता तो तब भी किनारे कर दी गयी थी जब धर्मराज युधिष्ठिर ने कहा था अश्वत्थामा मारा गया…

नैतिकता तो तब भी किनारे कर दी गयी थी जब भगवान श्री कृष्ण ने भीम को इशारा कर दुर्योधन की कमर ने नीचे वार करने को कहा था जो कि हर प्रकार से नियम विरुद्ध था, वर्ना पांडवों का युद्ध जीतना असंभव था.

इसी खोखली नैतिकता के कारण सिर्फ एक वोट से वाजपेयी सरकार गिरी थी, इसी खोखली नैतिकता के कारण भाजपा हर बार हारी, इसी खोखली नैतिकता के कारण कई भाजपा के सहयोगी अलग हुए…

इसी खोखली नैतिकता के कारण कर्नाटक हाथ से निकल गया था और विरोधियों का शासन हुआ, इसी खोखली नैतिकता के कारण भाजपा ने कई समर्थक पार्टियां और नेता खो दिए, इसी खोखली नैतिकता के कारण दिल्ली में सरकार नही बनाई और एक फ्रॉड वहाँ राज कर रहा है.

जंग और मोहब्बत में सब जायज़ है, ये युद्ध है, धर्मयुद्ध है, ये वो महाभारत है जहां नैतिकता का कोई मोल नही, इतिहास नैतिकता का गुणगान नहीं करता, इतिहास सिर्फ जीतने वाले का होता है…

तो हे राष्ट्रवादियों! उठो, ललकारो और हर हाल में जीत का परचम लहराओ, जीत के योद्धा बनो, नैतिकता का पाठ दूसरे को पढ़ाने के काम आता है, जिसे हराना हो मरवाना हो उसे नैतिकता का पाठ पढ़ा दीजिये.

राष्ट्रवादियों को हर चुनाव जीतना है, पार्षद से ले कर सांसद तक, हर राज्य में भगवा राज चाहिए, राम मंदिर चाहिए, कश्मीर चाहिए, लेकिन इसके लिए उन्हें किसी को भी अपने साथ मिलाना पसंद नहीं…

उन्हें डर है कि इस से पुराने कार्यकर्तओं को नज़रअंदाज़ किया जाएगा… नज़रअंदाज़? पर आप सब तो नि:स्वार्थ भाव से देश के लिये काम कर रहे थे ना? या फिर आपको भी मलाई चाहिए? सत्ता में अपना कट चाहिए? या डर है कि कहीं मलाई में हिस्सेदार न बढ़ जाएं?

जब भी भाजपा हारती है तो सभी राष्ट्रवादी एक सुर में मोदी और अमित शाह को निशाना बनाते हैं, जब जीतती है तो अपना सीना 56 इंच का कर के सोशल मीडिया पर घूमते हैं…

कभी सोचा है इस एक-एक जीत के पीछे कितनी मेहनत है? त्रिपुरा जीत पर बहुत खुश हुए थे, आपको मालूम है वो जीत कैसे संभव हुई?

कांग्रेस, TMC, यहाँ तक कि CPM के नेताओं तक को भाजपा में शामिल किया गया, सिर्फ इतना ही नही अलगाववादी और आतंकी संगठन IPFT (Indigenous People’s Front of Tripura) को भी भाजपा में शामिल किया गया.

इस से भाजपा आतंकी संगठन नहीं बन गया, बल्कि इसके विपरीत एक बाल स्वयंसेवक को उनका मुखिया बना कर उन्हें सुधारने का काम किया गया. आपका बच्चा बिगड़ जाए तो उसे आप घर से नहीं निकालते बल्कि सुधारने के उद्देश्य से होस्टल में डाल देते हैं, भाजपा वही होस्टल है.

कुछ लोग कहते हैं ऐसे तो सबको शामिल कर लेंगे क्या? 2019 All v/s मोदी होना है, भाजपा के पास महज़ 40-42% वोट शेयर है यानी 60% वोट शेयर मोदी के खिलाफ हैं.

अभी वे सारे बंटे हुए थे पर अब सब एक साथ हैं यानी 60% विरोधी वोट शेयर एक साथ हैं, ऐसे में आपको लगता है कि 2019 में मोदी सरकार रिपीट कर लेगी?

विरोधी खेमे को कमज़ोर करना बहुत सही रणनीति हैं, उसके सभी सिपहसालार अपने साथ मिला लो, अकेला राजा बिना सेनापति के कुछ नही कर पायेगा.

कुछ कहते हैं ओवैसी को भी भाजपा में मिला लो…

भाजपा में?… अरे साहब, मैं तो उन्हें वापस हिन्दू धर्म मे मिलने की सोच रहा हूँ, आखिर थे तो वो भी हिन्दू ही…

ज़रा सोचिए क्या मंज़र होगा जब आज़म खान और ओवैसी भगवा झंडा पकड़े, जय श्री राम का नारा लगाते हुए राम मंदिर निर्माण में जुटे होंगे…

होगा… ऐसा भी होगा, बस देखते जाइये, आज आप नरेश अग्रवाल से परेशान हैं तो फिर मुसलमान कल को घर वापसी करेंगे तो उन्हें कैसे अपनाएंगे?

अपना हाजमा ठीक कीजिये इतनी अपच हिन्दू धर्म और हिंदुत्व के लिए ठीक नही, सभी को स्वीकारना सीखिए. अपना दिल बड़ा कीजिये, नफरत नही प्यार कीजिये जो आपकी शरण मे आये उस से, उसे सत्य के मार्ग पर लाइये जो भटक गए हैं, यही हिन्दू धर्म भी सिखाता है.

दुश्मन को अगर आप खत्म नहीं कर सकते तो पालतू बना लीजिये

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