वीडियो : बहुत गहरा है काँग्रेस के भ्रष्टाचार का रक्षा कवच

9 मार्च को CBI कोर्ट ने लगातार तीसरी बार कार्ति चिदंबरम की रिमाण्ड अवधि तीन दिन के लिए बढ़ा दी थी तो यह खबर हर न्यूज़ चैनल पर EXCLUSIVE और BREAKING NEWS बनकर चमकने दमकने लगी थी.

हालांकि 9 मार्च को ही कार्ति चिदंबरम से सम्बंधित इससे भी अधिक महत्वपूर्ण एक और खबर भी थी जिसपर न्यूज़ चैनलों समेत किसी का ध्यान ही नहीं गया.

वह खबर यह थी कि कार्ति चिदंबरम ने ED द्वारा कार्ति की गिरफ्तारी पर रोक लगाने के लिए एक याचिका सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की थी.

इस याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि इसके लिए कार्ति चिदंबरम यह याचिका हाई कोर्ट में दाखिल करे और हाई कोर्ट इसपर जल्दी निर्णय करे.

सुप्रीम कोर्ट का यह निर्णय आने के कुछ ही देर बाद अभिषेक मनु सिंघवी, कपिल सिब्बल और पी चिदंबरम समेत कार्ति चिदंबरम के वकीलों की फौज तत्काल हाइकोर्ट पहुंच गई.

हाईकोर्ट ने भी तत्काल उनकी याचिका पर सुनवाई की और ED द्वारा कार्ति चिदंबरम की गिरफ्तारी पर 20 मार्च तक रोक लगाते हुए अगली सुनवाई की तारीख 20 मार्च निर्धारित कर दी.

ध्यान रहे कि कार्ति चिदंबरम का सारा मामला विदेशों में डॉलर में किये गए लेन-देन का ही है, जिसकी जांच ED ही कर सकती है. अतः CBI की जांच-पूछताछ के बाद ED द्वारा कार्ति चिदंबरम को गिरफ्तार कर के उससे पूछताछ के बिना कुछ नहीं होने वाला.

अब खेल समझिये जिसे कल एस. गुरुमूर्ति ने उजागर किया. 9 मार्च को हाईकोर्ट के जिन न्यायाधीश महोदय एस. मुरलीधर की बेंच ने ED द्वारा कार्ति की गिरफ्तारी पर रोक लगायी वो न्यायधीश महोदय एक समय पी. चिदंबरम के जूनियर और अत्यन्त विश्वसनीय करीबी रहे हैं.

सुनन्दा पुष्कर की मौत की CBI जांच कराने की डॉक्टर सुब्रमनियम स्वामी की याचिका भी इन्हीं जज महोदय ने डॉक्टर स्वामी को बुरी तरह फटकारते हुए ख़ारिज कर दी थी. उस समय कोर्ट में इन जज महोदय के साथ हुई डॉक्टर स्वामी की तीखी झड़प सुर्खियों में चर्चा का विषय बन गयी थी.

इससे पहले 2015 में उजागर हुए कार्ति चिदंबरम के घोटाले के बाद से अब तक की समयावधि के दौरान कार्ति चिदंबरम ने उसके खिलाफ जांच, उसकी गिरफ्तारी पर रोक के लिए मद्रास हाईकोर्ट की शरण ली थी और हर बार उसे राहत मिली थी.

यहां उल्लेखनीय यह है कि नियमित रूप से रोजाना अंग्रेज़ी न्यूज़ चैनलों पर राजनीतिक विश्लेषक और पत्रकार बन कर कांग्रेसी नेता/ प्रवक्ता की तरह प्राणपण से हर कांग्रेसी कुकर्म का बचाव करनेवाले सुमंत सी. रमन नाम के व्यक्ति की पत्नी मद्रास हाईकोर्ट की न्यायाधीश भी है.

कुछ दिन पूर्व ट्विटर पर जब यह सच्चाई ‘द पायनियर अखबार के पत्रकार जे गोपीकृष्णन ने उजागर की तो सुमंत सी. राजन बुरी तरह बौखला गया था.

जब सैकड़ों लोगों ने उससे पूछा कि कार्ति को विदेश जाने की छूट और गिरफ्तारी/ जांच से राहत देने की आधा दर्जन याचिकाओं में से कितनी याचिकाओं पर उसकी पत्नी की बेंच ने फैसला सुनाया था, तो सुमन सी. रमन चुप्पी साध गया था.

आज कार्ति चिदंबरम के केस से सम्बंधित उपरोक्त तथ्यों का जिक्र इसलिए क्योंकि 10-12 दिन पहले ही एस. गुरूमूर्ति ने अरनब गोस्वामी को दिए अपने इंटरव्यू में साफ कहा था कि पिछले 35-40 सालों में महत्वपूर्ण पदों पर नियुक्तियां मेरिट के बजाय निजी सम्बन्धों के आधार पर की गयी हैं. कांग्रेस द्वारा निर्मित Deep State आज भी पूरी ताकत से कांग्रेस के बचाव में लगा हुआ है.

कार्ति चिदंबरम केस से सम्बंधित उपरोक्त दो न्यायिक घटनाक्रम तथा एस. गुरूमूर्ति का इंटरव्यू उन सवालों का जवाब है कि कांग्रेसी भ्रष्टाचार के खिलाफ मोदी सरकार ने आज तक कुछ क्यों नहीं किया?

एस. गुरूमूर्ति जी के इंटरव्यू के केवल 6 मिनट 19 सेकण्ड का यह अंश आप ध्यान से देखिए सुनिये तो आपको सारा मामला समझ में आ जाएगा.

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