जीवन का फ़लसफ़ा : दिन में कहानी सुनाने से मामा गुम जाता है

आज एक नई बात सुनी, कहानियाँ रात को ही सुनाई जाती है, दिन में कहानी सुनाने से मामा गुम हो जाता है… इस कहानी के पीछे की कहानी तो मुझे नहीं पता, शायद बच्चों को बहलाने के लिए कहा जाता होगा या चंदामामा रात को ही आता है इसलिए.

लेकिन मुझे जब ये पता चला तो लगा जैसे इस कहावत का मुझसे बचपन का रिश्ता है… पिछले जन्म में किस्मत ने न जाने कौन सी कहानी मुझे सुनाई थी कि इस जन्म का मामा मेरा गुम हो गया….

बचपन में चाचा लोग चिढ़ाने के लिए जो बात कहते थे… तब उसे मैं मज़ाक समझती थी लेकिन आज वही बात दिल में नश्तर की तरह चुभ रही है…. वो लोग हमेशा कहते थे… तुम्हारी शादी कैसे होगी तुम्हारा मामेरा करने के लिए कोई मामा तो है नहीं…

मेरी माँ चार बहने हैं, उनका कोई भाई नहीं… मतलब मेरा कोई मामा नहीं ….

चाचाओं के मुंह से न जाने नियति ही चिढ़ाती रही… तुम्हारी शादी कैसे होगी तुम्हारा मामेरा करने के लिए कोई मामा तो है नहीं…

इसलिए मामेरा नहीं हुआ… शादी हुई… जैसे गुड्डे गुड़ियों का खेल… लेकिन मामेरा नहीं हुआ…

माँ है लेकिन आधी … मामा होते तो पूरे मिल जाते… लेकिन जब कुछ पूरा मिल जाता है तो आपके अधूरेपन की प्यास से आप वंचित रह जाते जो पूर्णत्व की प्राप्ति के लिए आपको अग्रसर रखती है…

इसलिए मेरे बच्चों मैं अपने जीवन कि ये कहानी तुम सबको जानबूझकर दिन में सुना रही हूँ, तुम्हारे तो मामा पहले से ही गुम है… उन्हें गुम ही रहने देना… जब जब जीवन में अधूरापन अनुभव हो ये बात ज़रूर याद रखना कि –

पूर्णता का कोई प्रतिबिम्ब नहीं बनता बल्कि वो तो टुकड़ों टुकड़ों में हमें अनुभव होता है. जब कभी आँखें बंद करने पर अपने होने का अनुभव हमें कृतज्ञता से भर देता है तो हमारा अस्तित्व पूर्णता को प्राप्त हो जाता है.

जब हमारे सपने व्यक्तिगत सतही इच्छाओं के धुंध से मुक्त हो जाते हैं तो वह पूरे हो जाते हैं.

जब कोई प्रार्थना किसी एक दिल से निकलने के बावजूद सामूहिक समर्पण का दर्जा पा लेती है तो पूरी हो जाती है.

जब कोई व्यक्ति प्रेम के वरदान को प्राप्त कर खुद तक सीमित नहीं रखता बल्कि खुद प्रेम बनकर कण कण में बिखर जाता है, तो परमात्मा को प्राप्त हो जाता है.

और जो व्यक्ति परमात्मा को प्राप्त हुआ है या परमात्मा जिसे प्राप्त हुए हो वह एक पूर्ण व्यक्ति होगा क्योंकि परमात्मा निराकार ज़रूर है अधूरा नहीं….

जीवन का फ़लसफ़ा : चलो दिलदार चलो चाँद के पार चलो…

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