इस पूरा साल सजता रहेगा उनकी मक्कारी और झूठ का बाज़ार

भारत की राजनीति में कांग्रेस और राहुल गांधी की डूबती नाव को बचाने के लिये वेटिकन रोम ने अपने पूरे घोड़े खोल दिये है.

दुनिया में पप्पू नाम से इस मशहूर रोमन कैथोलिक-जनेऊधारी-इटेलियन-हिन्दू के गिरते ग्राफ और भारत के पूर्वोत्तर में हारों के सदमे से उबारने के लिये जल्दबाज़ी में सिर्फ 2 दिनों के भीतर सिंगापुर में एक आयोजन रखा गया.

इस आयोजन का एक ही उद्देश्य था कि राहुल गांधी की एक लिबरल बुद्धिजीवी के रूप में इमेज बिल्डिंग की जाये… और विश्व को, खास तौर से चीन को विश्वास दिलाया जाये कि राहुल गांधी के भारत से ही उनके उद्देश्यों और हितों की रक्षा हो सकती है.

इस आयोजन की रूपरेखा, राहुल गांधी के इटली प्रवास के दौरान, त्रिपुरा, नागालैंड और मेघालय में चर्च की हार के बाद वेटिकन में बनी थी. इसी लिये राहुल के भारत लौटने से पहले 2 दिन के भीतर सिंगापुर में राहुल गांधी से यह प्रश्नोत्तर का कार्यक्रम आयोजित किया गया.

इसको आयोजित करने वाली पल्लवी रेचल जॉर्ज थी और यह आयोजन सेंटर फॉर पब्लिक पॉलिसी एंड रिसर्च के बैनर के तहत हुआ था, जिससे वो जुड़ी हुई हैं. यह CPPR के नाम से जाने वाली संस्था, एक ईसाई संस्था है जो कि केरल के एक चर्च द्वारा रजिस्टर्ड है.

इस आयोजन को सफल बनाने और इसमें प्रतिभाग लेने वालों की स्क्रीनिंग के लिये, गांधी परिवार के प्रिय व नजदीकी सैम पित्रोदा पहले से ही पहुंच गये थे. प्रतिभागियों की स्क्रीनिंग बड़ी सूक्ष्मता से की गई थी जिसके कारण उसमें भाग लेने वालों की संख्या कम रही थी. खैर यह कांग्रेस का चर्च की सहायता से किया गया एक प्रायोजित कार्यक्रम था.

अब आते है इस आयोजन को लेकर हुई एक मुख्य घटना पर जो कांग्रेस पार्टी के द्वारा ट्विटर पर प्रश्नोत्तर काल का एक वीडियो डालने को लेकर है.

कांग्रेस ने उस वीडियो के माध्यम से जनता को यह दिखाने की कोशिश की है कि राहुल गांधी कितने बौद्धिक और गम्भीर राजनीतिज्ञ है और कैसे उन्होंने पूछे गये मुश्किल प्रश्नों का सफलतापूर्वक सामना करते हुये लोगों को उत्तर दिया.

शुरू में तो ठीक ठाक वाह-वाह होती रही लेकिन तभी उस ट्वीट पर प्रोफेसर पी के बसु आ गये, जो उस कार्यक्रम में न सिर्फ शामिल थे बल्कि राहुल से उन्होंने प्रश्न भी किये थे.

उन्हीने कांग्रेस पर यह आरोप लगाया कि डाला गया वीडियो, संपादित है और उसका तारतम्य भी गलत है. उन्होंने कांग्रेस को धमकी दी कि वे यह वीडियो हटा लें और माफी मांगे, नहीं तो वे कांग्रेस के खिलाफ सिंगापुर अदालत में धोखाधड़ी और मानहानि का मुकदमा डालेंगे.

इसके बाद से सिंगापुर में हुये इस आयोजन का पूरा वीडियो ही यूट्यूब पर आ गया और उसको देखने के बाद यह स्पष्ट हो जाता है कि कांग्रेस ने जो फ़र्ज़ी वीडियो डाली थी, वह उन्हें करने की जरूरत क्यों पड़ गयी थी.

आयोजन की वास्तविकता यह थी कि सिंगापुर में राहुल गांधी की ज़बरदस्त बेइज्ज़ती हुयी थी और वे एक ऐसे व्यक्ति के रुप में सामने आये जो न सिर्फ अज्ञानी है बल्कि कड़े प्रश्नों से भागते है.

हालांकि मॉडरेटर ने उनको काफी बचाने की कोशिश की लेकिन वो भी हताश हो गये.

राहुल एक ऐसे आदर्श, सेक्युलर और लिबरल नेता के रूप में सामने पेश आये जो भारत की उस मोदी सरकार से बेहद खफा है, जो चीन और पाकिस्तान की बात नही मान रहे और उनसे वार्ता नही कर रहे है.

राहुल कश्मीर पर भी बोले और ऐसा पेश किया कि आज की कश्मीर की समस्या, मोदी काल की देन है और पहले वहां स्वर्ग था.

प्रोफेसर पी के बसु ने तो राहुल और उनके नेहरू खानदान को लेकर जब तर्कसंगत प्रश्न पूछे तो राहुल हकला गये और पानी की बोतल उठा कर प्रश्नों से छुपते रहे.

प्रोफेसर बसु ने नेहरू-गांधी के प्रधानमंत्रित्व काल में भारत के व्यक्ति की औसत आमदनी, विश्व के औसत से कम दर पर वृद्धि और 2014 के बाद उसमें आयी बढोत्तरी जो विश्व के औसत से अब ज्यादा है, को लेकर कारणों को पूछा तो हड़बड़ा गए और उलटे ही कुतर्की प्रश्न करने लगे.

आपको पूरा कार्यक्रम देखना है तो यूट्यूब पर उपलब्ध है, जिसे देखकर आसानी से समझा जा सकता है कि आज के आधुनिक कम्युनिशन, जहां कुछ भी नही छुप सकता है वहां भी कांग्रेस पूरी बेशर्मी से भारत की जनता की आंख में धूल छोकने में कोई कसर नही छोड़ रही है.

कांग्रेस के साथ वेटिकन चर्च और उसका ईसाई, चीन और भारत का बचा हुआ वामपंथी, एमनेस्टी, फोर्ड रॉकफेलर और उसका लिबरल व अनार्किस्ट, पाकिस्तान और उससे जुड़ा मुसलमान खड़ा है और यह पूरा वर्ष उनकी यही मक्कारी और झूठ का बाजार सजता रहेगा.

ऐसे वातावरण में राष्ट्रवादियों को मेरी एक ही सलाह है कि वे अपने होश और जोश को काबू में रखें और किसी भी नकारात्मकता को फेस वैल्यू पर लेने की बजाय उस पर मनन करे और सम्भव हो तो अविश्वास और शक के अंडों को नष्ट कर दें. यदि इनको नही फोड़ सकते हैं तो कम से कम उनको सेंकने में जल्दीबाजी न करें.

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