चंद्रशेखर, नरसिंहराव और डॉ मनमोहन सिंह

  • प्रदीप शंकर

केंद्र की तत्कालीन चन्द्रशेखर सरकार बजट पेश करने वाली थी जिसके लिए डेटा इकट्ठा करने की ज़िम्मेदारी उस समय के आर्थिक सलाहकार डॉ मनमोहन सिंह की थी.

उस बजट में चंद्रशेखर ने अपना सारा अनुभव डाल दिया था क्योंकि उनको पता था कि उनको दूसरा बजट पेश करने का मौक़ा नहीं लगेगा. इसलिए ना केवल वह बजट अभूतपूर्व होता बल्कि देश को नई आर्थिक आज़ादी भी देता.

पता नहीं कैसे उस बजट की खूबी की भनक राजीव गांधी को मिल गई.

उनके सलाहकारों ने राय दी कि किसी भी हालत में चंद्रशेखर सरकार को यह बजट पेश ना करने दिया जाए क्योंकि यदि यह बजट पेश हो गया तो इस सरकार का समर्थन करना ही पड़ेगा.

फिर क्या था. दो मामूली सिपाहियों का बहाना बना कर चंदशेखर सरकार गिरा दी गई.

चुनाव हुए. दुर्भाग्यवश राजीव गांधी की हत्या हो गई. और पी वी नरसिंहराव ने बीजेपी की सहायता से अल्पमत की सरकार बनाई.

जैसा कि भारतीय संसदीय परम्परा है, राव साहब भूतपूर्व प्रधानमन्त्री से मिले और जो बजट पेश ना हो पाया था, उसके अच्छे पॉइंट्स पर ज़िक्र हुआ.

राव साहब बहुत कुशाग्र बुद्धि के इंसान थे. उन्होंने थोड़ी देर में ही समझ लिया कि यह बजट अभूतपूर्व था. और उन्होंने उसी समय मन ही मन निर्णय किया कि वे इस बजट को पेश करेंगे.

बातों-बातों में राव साहब ने किसी अच्छे अर्थशास्त्री का नाम पूछा तो चंद्रशेखर जी ने डॉक्टर मनमोहन सिंह का नाम ले लिया.

बाद में डॉक्टर साहब अर्थमंत्री बने और उन्होंने राव साहब के निर्देश पर चन्द्रशेखर वाले बजट में कुछ फेरबदल कर उसी को पेश कर दिया.

परंतु फेरबदल में कुछ गम्भीर गलती हो गई जिसके कारण चंद्रशेखर बहुत नाराज़ हो गए और संसद में बहस के दौरान उन्होंने डॉक्टर साहब को बुरी तरह लथेड़ दिया.

मनमोहन सिंह के बचाव में राव साहब उठ खड़े हुए और बोले “चंद्रशेखर जी, मैंने आपसे अच्छे अर्थशास्त्री का नाम माँगा था और आपने ही डाक्टर साहेब का नाम दिया था. अब आप क्यों नाराज़ हो रहे हैं?”

चंद्रशेखर का गुस्सा बहुत भयानक होता था. इस बात पर वह और भड़क गए. और बोले “राव साहब, आपने आर्थिक सलाहकार के लिए नाम पूछा था. वित्त मंत्री के लिए नाम नहीं पूछा था. आपको मैंने सब्ज़ी काटने के लिए चाकू दिया था परंतु आपने उससे देश के कलेजे का ऑपरेशन कर दिया.”

चंद्रशेखर जी सही थे. राव साहब गलती पर थे. परंतु सोनिया गांधी ने डॉक्टर साहब को सही पहचाना और देश के दिल का ऑपरेशन उनको नहीं करने दिया बल्कि खुद ही यह ऑपरेशन कर दिया, वह भी चिदंबरम नामक ब्लेड से. जिसके कारण आज भी देश के दिल से खून टपक रहा है.

डॉक्टर साहब बेशक ख़राब डॉक्टर रहे हों परंतु सोनिया से तो बेहतर ही थे. काश सोनिया ने उन्ही को देश का ऑपरेशन करने दिया होता.

(चंद्रशेखर जी की झड़प उस समय के संसदीय रिकार्ड में देखी जा सकती है.)

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