आशु उवाच : वासुदेव कृष्ण – 1

वे अपने महल के विशाल कक्ष में बेचैनी से चहल क़दमी कर रहे थे, मृत्यु के मुख पर खड़े होने के बाद भी जो अपनी बाँसुरी से जीवन का संगीत फूंकता रहा हो वे आज अपनी प्राण प्रिय बाँसुरी को जैसे विस्मृत ही कर गए थे. ये कैसा विषाद है कि अपने अधरों पर सदैव … Continue reading आशु उवाच : वासुदेव कृष्ण – 1