तब क्यों नहीं किया था सेक्युलरों-लिबरलों ने यह मातम

त्रिपुरा में 3 मार्च को भाजपा को मिली ऐतिहासिक विजय के पश्चात स्थानीय जनता ने भारत माता की जय के उद्घोष के साथ वहां के बेलोनिया सबडिवीज़न में बुलडोज़र की मदद से रूसी तानाशाह व्लादिमीर लेनिन की मूर्ति को ढहा दिया.

त्रिपुरा में स्थित कुछ अन्य वामपंथी स्मारकों पर भी ऐसे ही प्रहारों की खबरें मिल रही हैं.

त्रिपुरा की जनता की इस आक्रामक अभिव्यक्ति को भाजपा के समर्थकों/कार्यकर्ताओं का कारनामा बताकर उसके खिलाफ कल रात से ही कुछ न्यूज़ चैनल और मीडिया का तथाकथित सेक्युलर-लिबरल गैंग हाहाकार मचा रहा है, छाती कूट रहा है, विधवा विलाप कर रहा है.

लेकिन सच केवल इतना ही नहीं है. त्रिपुरा में वामपंथी शासन के सफाये के साथ यह जनाक्रोश अचानक या अनायास नहीं भड़का.

त्रिपुरा में भड़के जनाक्रोश के इस ज्वालामुखी की जड़ें गहरी और पुरानी है. इसे केवल एक उदाहरण से समझा जा सकता है.

2 वर्ष पूर्व त्रिपुरा में कक्षा 9-10 की इतिहास की पुस्तक में आमूलचूल परिवर्तन किया गया था.

इस परिवर्तन के द्वारा त्रिपुरा की वामपंथी सरकार ने इतिहास की किताब से नेताजी सुभाषचंद्र बोस, महात्मा गांधी, रानी लक्ष्मीबाई, छत्रपति शिवाजी, महाराणा प्रताप सरीखे नाम, उनके काम हटा दिए थे.

119 पृष्ठ की उस इतिहास की किताब के 77 पृष्ठों पर हिटलर की आलोचना. रूसी तानाशाह लेनिन, स्टालिन और 3 करोड़ से अधिक निर्दोषों की हत्या करनेवाले चीन के तानाशाह माओत्से तुंग का महिमामंडन किया गया था.

उस माओ का महिमामंडन जिसने 1962 में हज़ारों भारतीय सैनिकों की हत्या करवा के भारत की लगभग 39 हज़ार वर्ग किलोमीटर जमीन पर कब्ज़ा कर लिया था.

अतः आज यह प्रश्न स्वाभाविक भी है और प्रासंगिक भी कि… लेनिन की मूर्ति तोड़े जाने पर आज मातम मना रहे सेक्युलरों-लिबरलों के गैंग ने यह मातम तब क्यों नहीं किया था?

वामपंथियों की भारतद्रोही करतूतों का उपरोक्त उदाहरण एक अपवाद मात्र नहीं है. उसके ऐसे कारनामों का काला चिट्ठा बहुत लम्बा है.

इसीलिए त्रिपुरा की जनता के इस जनाक्रोश का वहां के राज्यपाल महामहिम तथागत रॉय और पूर्वोत्तर के प्रभारी भाजपा महासचिव राम माधव ने खुलकर समर्थन किया है.

हालांकि गृहमंत्री राजनाथ सिंह को यह जनाक्रोश रास नहीं आया है. उन्होंने मूर्ति तोड़ने वाले लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने और उनसे सख्ती से निपटने के आदेश दिए हैं.

अब देखिए आगे क्या होता है?

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