वामपंथी सरकार को हराना छोटी बात नहीं, परंतु अभी विजयोत्सव मनाना बड़ी भूल

सावधान!

मराठी में एक कहावत है, “अर्ध्या हळकुंडाने पिवळे होणे”. इसका अर्थ है एक छोटी लडाई में जीत पर युद्ध की जीत का विजयोत्सव मनाना.

ऊपर प्रदर्शित फोटो देखकर मुझे इसी मराठी कहावत का स्मरण हुआ.

लगभग 20 साल सत्ता में रही वामपंथी सरकार को चुनाव में हराना कोई छोटी बात अवश्य नहीं है, परंतु वामपंथ की प्रतीकात्मक अंतिम यात्रा निकाल कर विजयोत्सव मनाना एक बड़ी भूल होगी.

ऋण शेषोSग्नि शेषश्च शत्रुशेषस्तथैव च |
पुनः पुनः प्रवर्धन्ते तस्माच्छेषं न रक्षयेत् ||

अर्थात लिया हुआ ऋण, लगी हुई आग, तथा शत्रु को कभी शेष नहीं रहने देना चाहिये. यदि ऐसा हुआ (उन्हे शेष रहने दिया गया), तो वे बार बार बढ़ते हैं (एवं हमें सताते हैं). इस लिये उनका समूल नाश ही श्रेय है.

वामपंथ वो शत्रु है जिसने हमारे शिक्षा संस्थानों में शिक्षकों तथा शालेय पुस्तकों के रूप में, सरकारी कार्यालयों में बाबुओं के रूप में, मीडिया/ पत्रकारों में, बुद्धिजीवियों में, फिल्मों एवं कलाकारों में, व्यंग्यकारों में, समाजशास्त्रीय संशोधनों में, इतिहासकारों में, सामाजिक कार्यकर्ताओं में, सामाजिक संस्थाओं में, कॉर्पोरेट क्षेत्र के मानव संसाधन डिपार्टमेन्टों में, एवं साहित्यकारों तथा साहित्य सम्मेलनों में भारी मात्रा में निवेश किया है.

यह उनके लिये संपत्ति है परंतु हमारे लिये देयता अर्थात ऋण है जिसे हमें अविरत कष्टों से चुकाना है. यदि उसमें से कुछ भी शेष बचा तो पुन: उसका प्रवर्धन होकर हमें कान में घुसे मच्छर की भांति सताता रहेगा.

और आप को तो ज्ञात है कि एक मच्छर क्या-क्या कर सकता है. फिर तो यह वामपंथी मच्छर है, जिसकी प्रजा की वृद्धि साधारण मच्छरों से कई गुना ज्यादा होती है. एक कॅनेडियन वामपंथी मच्छर हाल ही में भारत दौरे पर आकर गया. उसने खुद अपने देश में कितनों को काटा है उसे सोशल मीडिया पर पढ़ियेगा, पता चलेगा.

आप को स्मरण होगा भूतपूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अन्सारी जब निवृत्त हो रहे थे तब उनके ‘सम्मान’ में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने क्या कहा था कि अब जब वे रिटायर हो रहे हैं तो संविधान के बंधनों एवं ढांचे से मुक्त होकर वे अब अपनी मूल भावनाओं एवं श्रद्धाओं का अनुसरण कर सकेंगे.

प्रधानमंत्री की इस वक्रोक्ति से कुछ लोग आहत हुए, परंतु शीघ्र ही हामिद अन्सारी केरल के एक शांतिदूतों के कट्टरपंथी संगठन पीपल्स फ्रन्ट ऑफ इंडिया के एक समारोह में स्टेज पर दिखे.

इस उदाहरण को उद्धृत करने का कारण यह बताना है, कि वामपंथियों को सत्ता से हटाने पर वे अधिक हिंसक होंगे, अधिक कारगुजारियां करेंगे. उन्होंने जो उपरोक्त चीजों मे निवेश किया है, उसका ब्याज वसूलने का समय उनके लिये अब आ गया है.

मनुष्यभक्षी वामपंथी बाघ केवल आहत हुआ है, मरा नहीं, वो दोगुने गुस्से से मनुष्य हत्या करने लौटेगा. त्रिपुरा, नागालैंड, और कुछ सीमा तक मेघालय में विजय प्राप्ति में जिन्होंने जी तोड़ कष्ट उठाये हैं, उसके पश्चात वामपंथ को नष्ट करने के प्रति अब सत्ता में बैठने वालों का तथा समस्त हिंदू समाज एवं राष्ट्रवादी गुटों का दायित्व सहस्त्र गुना बढ़ गया है.

आप ने यदि अंग्रेज़ी साइन्स फिक्शन फिल्में देखी हैं तो उनमें देखा होगा कि अंतरिक्ष से आये हुए जीव को संपूर्ण नष्ट न किया जाए तो वो फिर से बढ़कर अपने जैसों की सेना खड़ी कर देता है.

छत्रपति शिवाजी महाराज के अनेक गुरु तथा मार्गदर्शकों में सर्वश्रेष्ठ श्री रामदास स्वामी ने शिवाजी महाराज के मृत्यु पश्चात उनके ज्येष्ठ पुत्र संभाजी महाराज को उपदेश करते हुए कुछ कहा था. मूल उपदेश काफी बड़ा है इस कारणवश इस लेख के संदर्भ में जो महत्वपूर्ण पंक्तियां है उन्हें उद्धृत कर रहा हूं :

अखंड सावधान असावे | दुश्चित कदापि नसावे |
तजविजा करीत बसावे | एकांत स्थळी ||१||

अर्थात:
सदैव रहें सावधान | (ध्येय से) कभी न हटे ध्यान
करें नित्य चिंतन | एकांत में ||

पता नहीं भाषांतर ठीक हुआ है या नहीं, परंतु मुझे विश्वास है आप तक उसका भावार्थ पहुंचाने में मैं सफल हो गया हूं.

तस्मादुत्तिष्ठ !

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