मोह निशा सब सोवन हारा, देखहि स्वपन अनेक प्रकारा

कल रात सपने में देखा कि एक बहुत बड़े हवाई जहाज में बहुत से लोगों के साथ मैं भी अमेरिका जा रहा हूँ.

जहाज हवा में थी तभी किसी यात्री की गलती से एक खिड़की टूट जाती है. लोग टेप से खिड़की को चिपकाने की निरर्थक कोशिश कर रहे हैं. खिड़की है कि जुड़ने का नाम ही नहीं ले रही है.

सभी लोग डरे हुए हैं कि अब ऊँचाई पर जहाज के भीतर, इस खिड़की के कारण ऑक्सीजन की कमी हो जायेगी.

मुझे सपने में ही अंग्रेजी मूवी ‘फाइनल डेस्टिनेशन’ का एरोप्लेन में आग लगने से सारे यात्रियों के मरने का दृश्य याद आ गया. लगा अब चला-चली की बेला आ गई, प्रभु को याद कर लें.

तभी नींद खुल गई, मैं अपने बिस्तर पर ही था. अपने को जिंदा देखकर ऐसा लगा मानो नया जीवन मिल गया हो.

मैं सोचने लगा कि अगर वो स्वप्न झूठ था तो बिलकुल सत्य की तरह पीड़ा, घबराहट, बेचैनी की अनुभूति कैसे करा रहा था?

उस क्षण विशेष में जब मैं वह सपना देख रहा था वो बिलकुल यथार्थ की तरह फल उत्पन्न करने में सक्षम था. कितनी ही बार लोगों को ऐसे स्वप्न देखते हुए हार्ट अटैक भी हो जाता है. अर्थात वह दु:स्वप्न फल उत्पन्न करने में सक्षम है.

आद्यगुरु भगवान शंकराचार्य जी ने बहुत ही सुन्दर तरीके से इसे समझाया है. उन्होंने सत्ता के तीन स्तर परमार्थ, व्यवहार और प्रतिभास में विभेद किया है.

उन्होंने स्वप्न और व्यक्तिगत होने वाले भ्रम को “प्रतिभास” नाम दिया है. इसका अस्तित्व तब तक है जब तक वह व्यक्ति नींद से जाग नहीं जाता. जैसे ही वो नींद से होश में आता है, वो जान जाता है कि ये उसका निजी भ्रम था, इसका वास्तव में अस्तित्व नहीं है.

भगवान शंकर दूसरे स्तर पर “व्यवहार” की सत्ता मानते हैं. वो इसे भी स्वप्न ही मानते हैं. ये स्वप्न हम सभी सामुहिक स्तर पर एक साथ देख रहे हैं और ये बहुत लम्बे समय तक चलता है, इस कारण इसके एकदम सत्य होने की भावना हमारे अन्दर दृढ़ हो जाती है.

पर ये सत्य है नहीं. जब कोई व्यक्ति सत्ता के तीसरे स्तर “परमार्थ” में पहुँच जाता है तब उसे इस सामुहिक स्वप्न का पता चलता है. परमार्थ के स्तर पर पता चलता है कि ये जो कुछ भी दिख रहा है वो वास्तव में है ही नहीं, वास्तविक सत्ता सिर्फ एकमात्र “ब्रह्म” की ही है.

इसी अवस्था का वर्णन करते हुए गोस्वामी तुलसीदास जी रामचरितमानस में कहते हैं – “मोह निशा सब सोवन हारा। देखहि स्वपन अनेक प्रकारा॥”

बाबा कहते हैं कि प्रभु की माया से मोहित होकर हम सभी सो रहे हैं और जो कुछ भी इस संसार में देख रहे हैं वो मात्र स्वप्न है. जैसे ही मृत्यु का झटका लगेगा, एक क्षण में ये सारा स्वप्न उजड़ जायेगा.

Comments

comments

loading...

LEAVE A REPLY