असमंजस में छोड़ने वाला असमंजस बाबू – 1

जीवन का पहला नाटक देखने गयी थी… बात शायद 2004 या 2005 की है. रंगमंच और अभिनय के प्रति मेरे लगाव की खबर मुझे इसी से लगी थी. चूंकि नाटक कुछ पचास साठ लोगों के बीच था इसलिए मैं सबसे पीछे जाकर बैठ गयी थी… जैसे ही नाटक शुरू हुआ मेरे चारों तरफ के लोग … Continue reading असमंजस में छोड़ने वाला असमंजस बाबू – 1