इस बार की खामोशी समझ से बाहर है!

जिंदगी में पहली होली देखी कि मुस्लिम मौहल्लों में कर्फ्यू या मातम सा पसरा हुआ है. यद्यपि मेरे लिए यह कोई फर्क पड़ने वाली बात नहीं है लेकिन ना जाने क्यों ये खामोशी मुझे बेहद रहस्यमयी लग रही है.

ना जाने कितनी ही बार जुमा के दिन होली की धूल पड़ी लेकिन हमारी 50-55% मुस्लिम आबादी वाले गांव में कभी कोई फर्क नहीं पड़ा

यद्यपि यहाँ कई आले नबी मुस्तफा या शम्सुद्दीन मौजूद रहे हैं जिनके कपड़ों से तीन मीटर दूर से ही बदबू का भभका आता है लेकिन होली के रंग से उनका इस्लाम भंग होता महसूस होता रहा है.

फिर भी सुबह होते ही पोंपा मंसूरा या रफीक मास्टर अपने बाजे लेकर हिंदुओं के द्वार द्वार निकल जाते तो दारु की शुरुआत भी गिल्ला और लतीफ ही करते थे…..

रंगों की होली होते होते कीचड़ की नालियों में डुबकी भी मुस्लिम बस्ती की और से शुरू होकर कोरी बनियों और ठाकुरों के घरों की और आती थी….. तो कपड़े भी पहले अजीज और रफीक के फटते थे.

होली के दूसरे दिन दौज को मनसूर की घर वाली का एक हाथ में डंडा और दूसरे में कीचड की मटकी वाला रूप अच्छे अच्छे लाला और सिंहों को घर में कैद रहने को मजबूर कर देता था…..

1980 में जमील हुसैन भटियारे का पाकिस्तान गया हुआ चाचा यहां आये तो होली के दिन हमारे बीच आके बैठ गये… हमने उस पर रंग डाल दिया तो हमारे चाचा भईया ने तो हमको डांटा पर वे बोले ‘ हम हिन्दुस्तान वाले ! तो करांची में होली खूब खेलते हैं….. वहां आम तातील ( छुट्टी) होती है ‘
जिया उल हक के इस्लामिक रूल के जमाने में होली पर आम तातील हम लोगों के लिए सुखद आश्चर्य था…..

और उन चाचा के होली के रंगों में सराबोर होते ही हमारे मिक्स आबादी वाले मोहल्ले की ही नहीं बल्कि सारी मुस्लिम बस्ती की नालियां एक दम साफ़ हो गयी थीं….
एक सेर कीचड़ भी नहीं बची थी उनमें…..

एक बार 2004 में हुयी जबरदस्त होली भी यादगार होली थी…. उस साल पाकिस्तान से आने वाली चिट्ठियों में अटल बिहारी की पार्टी को वोट देने की सलाह लिखी होतीं थीं….

वाकई उस वर्ष मुसलमानों में हिंदुओं के साथ मिलजुल कर रहने की एक नई भावना जन्म लेती हुयी दिखी थी….

पिछली साल मात्र दो दिन पूर्व ही भाजपा को 325 वाली जीत मिल के चुकी थी… फिर भी जो मुसलमान होली खेलते आये थे उन्होंने होली खेली थी….

लेकिन इस बार की खामोशी समझ से बाहर है!

चुनाव से लेकर इनके हर त्यौहार आदि मनाने के दिन बाराहवफ़ात जलूस आदि के बारे में हमेशा से किसी अनजानी जगह से कोई मैसेज आने के कयास लगाये जाते हैं…

लगता है ऐसे ही किसी मैसेज ने इनको होली पर कर्फ्यू जैसा माहौल बनाने का निर्देश दिया है… और मुझे लग रहा है ये कोई मामूली घटना नहीं है…

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