हमारी पसंदीदा लड़ाई अब यहीं ख़त्म होती है

ऐसा नहीं है
कि एक दूसरे से मिलने से पहले
हमें किसी से प्रेम न हुआ होगा,
या भविष्य में अब किसी से प्रेम न होगा

लेकिन हमारा मिलना
सृष्टि की उस अद्भुत घटना के समान ‘होता’,
जिसके बाद कुछ नई तरंगे जन्म लेती ब्रह्माण्ड में,
ऊर्जा छू पाती कुछ नए आयामों को

अनजान ग्रहों पर जीवन की संभावनाओं की तरह
मन के कुछ अनजान ग्रहों पर
प्रेम की संभावनाओं की होती पुष्टि
दुनिया के लिए होता शोध का विषय
कि अज्ञात के प्रति प्रेम
कितना रहस्यमय होता है

कितनी अव्यक्त पीड़ाओं को मिलता विश्राम
कितनी अपरिभाषित भावनाओं को मिलते नए अर्थ
तुम जो किताबों से इतना प्रेम करते हो
उन किताबों में बंद प्रेम कविताएँ
नृत्य करतीं जीवंत होकर

मैं जो जीवन का नृत्य करती हूँ
उनकी तस्वीरें खींचकर तुम सजा देते
प्रकृति की पुस्तक में

जिसको देखकर कुछ नए प्रेमी
सीखते प्रेम के कुछ नए भौतिक तरीके
हम रच देते प्रेम का वो आध्यात्मिक ग्रन्थ
जिसे लोग लाल कपड़े में बांधकर पूजते

यकीनन हम अब भी कर सकेंगे किसी और से प्रेम
लेकिन वो सिर्फ पुराने प्रेम का दोहराव होगा
और फिर भी हम उसमें प्रेम नहीं खोजेंगे
हम खोजेंगे
एक दूसरे की उन बातों को
जो कभी पसंद नहीं आई
और बिना बात के लड़ पड़ते थे…

लेकिन लड़ाई के वो बेबुनियाद मुद्दे
अब हमारे चेहरे को देखकर तरस खाएंगे
और छोड़ जाएंगे चेहरे पर कुछ परिपक्व मुस्कानें
और उस प्रेम को तो हम अब कभी न पा सकेंगे कहीं
जिसको पाने की पात्रता हम हासिल ना कर सके…

हमारी पसंदीदा लड़ाई अब यहीं ख़त्म होती है

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