साबरमती गुरूकुलम : मैकाले शिक्षा पद्धति को करारा जवाब

हमारा एक बहुत यादगार और सुहाना प्रवास रहा जिसे आप सब से साझा करने का मन हुआ. इसके निमित्त बने हमारे प्यारे भाई सत्यप्रकाश भारत उनको ह्रदय तल से साधुवाद व अभिनन्दन.

अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त साबरमती गुरूकुलम (हेमचंद्राचार्य संस्कृत पाठशाला) नि:शुल्क निवासी विद्याधाम जो स्थित है: हीरा जैन सोसाइटी के पास, रामनगर साबरमती, अहमदाबाद में जिसके संस्थापक कुलपति प्रयोगधर्मी राष्ट्रवादी संस्कृति पुरुष श्री उत्तमभाई जवानमलजी शाह हैं, जिन्होंने अपने समर्पण से भारत के इतिहास में शिक्षा का एक नया अध्याय लिख दिया है और इस दिशा विहीन शिक्षा जगत को सकारात्मक दिशा और चेतना से पुनर्जीवित किया है.

इसके संचालक उनके पुत्र श्री अखिलभाई उत्तमभाई शाह है व बहुत ही विनम्र व समर्पित हमारे जीतू भाई जो अहमदाबाद में प्रतिष्ठित व्यवसायिक हैं और अपने व्यवसाय में व्यस्त होते हुए भी गुरुकुल की व्यवस्था व देखभाल बखूबी करते हैं उनकी स्फूर्ति व उर्जा सदा यूंही कायम रहे यही कामना करती हूँ.

आइये! सबसे पहले आपको साबरमती गुरूकुलम की विशेषताओं व उपलब्धियों से अवगत कराती हूँ.

यहाँ भारतीय आदर्शानुसार डिग्री मुक्त एवं गुरु केन्द्रित शिक्षा प्रदान की जाती है.
गुरूकुलम भारतीय शिक्षा प्रणाली की पुनर्प्रतिष्ठा का राष्ट्रव्यापी आन्दोलन है जिसका प्रयास है कि शिक्षा द्वारा सर्वगुण संपन्न ७२ कलाओं में निपुण “महाऋषीपुत्रों” का निर्माण किया जाये.
प्राचीन भारत में शिक्षा व चिकित्सा का दान हुआ करता था व्यापार नहीं जबकि शिक्षा संस्थान राज व समाज संचालित हुआ करते थे इसी प्रथा को यहाँ भी पालन किया जा रहा है इसलिए यहाँ निशुल्क शिक्षा प्रदान की जा रही है.

यहाँ हमें आधुनिक मैकाले शिक्षा के खिलाफ एक प्रभावित विकल्प या मॉडल देखने को मिला.

आप देखिये इतिहास गवाह है कि अंग्रेजों द्वारा मैकाले पद्यति एक नियोजित षड़यंत्र है जिससे भारतीय मेधा और शिक्षा को ध्वस्त कर सदा के लिए गुलाम बनाया जा सके. चूंकि इस गुरुकुल को अभी मात्र ९ ही वर्ष हुए है इसलिए अभी यह प्रयोगात्मक स्तर पर है परन्तु एक लाजवाब प्रयास है यहाँ से प्रेरणा लेकर पूरे भारत में यह आन्दोलित हो रहा है; जोधपुर, कणेरी, बंगलुरु, शिरसा, शिरोही, चेन्नई, राजपीपला तथा अहमदाबाद में भी गुरूकुलम स्थापित हो चुके हैं.

इस आगामी २८ – ३० अप्रैल २०१८ को महाकाल की नगरी उज्जैन में गुरुकुल पद्यति विस्तारण हेतु विश्व व्यापी सम्मलेन होने जा रहा है जो निश्चित ही देश की विलुप्त मेधा, कला, शिक्षा के पुनर्जागरण का शंखनाद होगा.

यहाँ से शिक्षित बालक और आधुनिक शिक्षा से शिक्षित बालकों के बौद्धिक, मानसिक, शारीरिक व व्यक्तिगत स्तर में जमीन आसमान का फ़र्क देखने को मिला. गणित के मुश्किल से मुश्किल सवाल कैलकुलेटर से भी जल्दी मुंह जुबानी हल करने में गुरुकुल के सभी बच्चे माहिर दिखे.

करोड़ों की जोड़ अबेकस पद्यति से और उँगलियों की सहायता से छोटे छोटे बच्चे एक बार में १० से भी अधिक संख्या का जोड़ ऐसे कर देते हैं जैसे खेल देख कर मन हर्षित हुआ. हमें एक एक बच्चे के चेहरे पर अलग ही तेजस्विता, आनंद और शांति का आभास उनके चमकते चेहरों से बखूबी दिखा.

लगभग यहाँ के यह सौ बच्चे मैकाले पद्यति के मकड़जाल से बाहर आकर उसका बहिष्कार कर शहर के बीच निहायत नैसर्गिक व प्राचीन ढंग से निर्मित और गाय के गोबर से लेपित व प्रक्षालित परिसर में भारतीय ज्ञान विज्ञानं के अध्ययन में संकल्पित हैं और ये जो पढ़, लिख, सीख व समझ रहे हैं वह आधुनिक स्कूलों में पढाये, लिखाये, जाने वाले ज्ञान विज्ञान से कई गुना भारी और ठोस है.

यह बच्चे गहरे ज्ञान विज्ञान के मूल स्रोत – वेद, वेदांग, निरुक्त, सांख्य, ज्योतिष, पंचांग, न्याय, योग, मीमांसा, छंद, सूत्र, व्याकरण, वेदांत, उपनिषद, आरण्यक, स्मृति आदि और प्राचीन भारतीय वांग्मय अग्नि, वायु, अंगीरा, आदित्य, व्यास, जैमिनी, वैशम्पायन, वशिष्ठ, विश्वामित्र, चरक, आर्यभट, वराहमिहिर, पाणिनि, मम्मट आदि ऋषि मुनियों की दिव्यदृष्टि व मेधा शक्ति से तत्विश्यक सम्पूर्ण ज्ञान को आत्मसात करने में लगे हुए हैं.

ऐसी विलक्षण शिक्षा ग्रहण कर यह बच्चे रोज नए नए कीर्तिमान स्थापित कर देश विदेश में अपनी अलग ही पहचान बना रहे हैं और अपनी अपनी कुदरत से लायी अद्वितीय उर्जा को समाजोपयोगी बना पाने का सौभाग्य पा रहे हैं. कई बच्चे अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर आधुनिक शिक्षा से शिक्षित बच्चों के मुकाबले में सबसे आगे होकर कई प्रतियोगिताएं जीत चुके हैं.

निरापद रूप से यहाँ के बच्चे बिलकुल असाधारण, मृदुभाषी, मेधावी, कुशाग्र बुद्धि, स्वस्थ मन व स्वस्थ शरीर वाले हैं इसमें कोई संदेह नहीं. इनकी दिनचर्या व गतिविधियाँ देखकर बहुत प्रसन्नता हुई, नित्य जल्दी सोना जल्दी उठना, मोबाइल और रेडिएशन का निषेध, प्राकृतिक वातावरण व खानपान, गौ माता का सानिध्य दूध व घी, उनके पोषण में कृत्रिमता का लेस मात्र भी प्रवेश नहीं दिखता .

यहाँ का वातावरण उर्जावान, सकारात्मक और शहर के बीच में होते हुए भी शांत और सौम्य लगा. किसी बच्चे का आक्रामक व गलत व्यव्हार हमें इतने दिनों में कभी नहीं दिखा, सभी का सौम्य व हँसता हुआ चेहरा ही सदा देखने को मिला जो हमें सम्मोहित करता रहा. यहाँ के पाठ्यक्रम के विषय गणित, वैदिक गणित, धर्म शास्त्र, अर्थ शास्त्र, न्याय शास्त्र, नीति शास्त्र, अध्यात्मक शास्त्र, वास्तु शास्त्र, आयुर्वेद, ज्योतिष, संगीत कला, अभिनय कला, चित्रकला, हस्तलेखन, पाक कला, नामा लेखा और सामान्य ज्ञान सम्मलित हैं.

बालकों को शारीरिक व्यायाम के लिए योग, मल्लखंभ, पोल, रोप, कराटे, मार्शल आर्ट, अश्व्संचालन, लाठी, कुश्ती, जुडो आदि का प्रशिक्षण दिया जाता है. भाषाओँ में संस्कृत, प्राकृत, हिंदी, गुजराती एवं अंग्रेजी भी पढाई जाती है. व्यक्तित्व विकास, परा मेधा (मिडब्रेन एक्टिवेशन), आयोजन प्रबंध (मैनेजमेंट) व नेतृत्व कला (लीडरशिप) का भी यहाँ की शिक्षा में भरपूर सामंजस्य देखने को मिला और यहाँ के एक एक बच्चे का आत्मबल देखते ही बनता है. इस संसार को इतनी उत्कृष्ट भेंट प्रदान करने के लिए प्रयोगधर्मी सस्कृति पुरुष श्री उत्तम भाई को हार्दिक आभार व साधुवाद.

इनका यह प्रयोग पूर्ण रूपेण सफल हो और यह बच्चे भारत के उज्जवल भविष्य में अपना अद्वितीय योगदान देकर सारे पश्चिमी षड्यंत्रों और मूढ़ताओं से मुक्त करने में सक्षम हों और उत्तम भाई के स्वर्णिम स्वप्न को साकार करें यही कामना करती हूँ. आप सभी से निवेदन करती हूँ कि साबरमती स्थित इस ९ साल से चल रहे भारतीय संस्कृति पुनर्जागरण हेतु गुरूकुलम के शिक्षा महायज्ञ को देखने के लिए हार्दिक आमंत्ररित है व इसमें अपनी क्षमता के अनुसार अपनी अपनी आहुति प्रेषित कर भारत को विश्वगुरु का सम्मान पुनः प्रतिष्ठापित करने में सहयोगी बने.

साधुवाद.
डॉ माँ समता

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