कानून के द्वारा नहीं बना सकते परिवार, हां, नष्ट अवश्य कर सकते हैं

शास्त्र विश्वविद्यालय में गुरुमूर्ति जी की स्पीच सुनी (वीडियो नीचे दिया है). उन्होंने कहा कि पिछले 2500 वर्षों में पश्चिम, पूर्व के देशों को युद्ध, धर्म, आइडियोलॉजी और फिर इस युग में आधुनिकता के द्वारा हरा रहे हैं.

गुरुमूर्ति ने स्पष्ट किया कि आधुनिकता से उनका मतलब बातचीत, चाल चलन, कपड़े, शिक्षा इत्यादि से नहीं है. बल्कि आधुनिकता से उनका अर्थ उस विचारधारा से है जिसमें व्यक्ति को सर्वोच्च माना गया है; यहां तक कि एक परिवार में भी व्यक्ति के अधिकार सर्वोच्च है.

इसका परिणाम यह हुआ कि एक पिता रहित अमेरिका उभर रहा है. आज के अमेरिका और ब्रिटेन में लगभग 50% बच्चे बिन ब्याही मां के होते हैं जिन्हें उनके पिता का नाम नहीं पता होता.

फिर उन्होंने कहा कि एयरपोर्ट, सड़कें, रेलवे, पानी की सप्लाई इत्यादि सरकार की ज़िम्मेवारी होती है. लेकिन यह सभी ज़िम्मेदारियां निजी क्षेत्र को सौंप दी जा रही हैं.

इसके विपरीत माता-पिता की ज़िम्मेदारी, बच्चों की ज़िम्मेदारी, एक परिवार की होती है. लेकिन आधुनिकता के नाम पर अब ना तो माता-पिता अपने बच्चों की ज़िम्मेवारी लेते हैं, और ना ही बच्चे अपने माता पिता की, ना भाई बहन की, ना बहन भाई की.

अतः इस कारण पश्चिमी देशों में सामाजिक सुरक्षा की आवश्यकता हुई और उस सामाजिक सुरक्षा का राष्ट्रीयकरण कर दिया गया.

फिर वह पूछते हैं कि जब सड़कें, रेलवे, एयरपोर्ट इत्यादि निजी क्षेत्र चला रहे है, तो क्यों नहीं सामाजिक सुरक्षा को भी निजी क्षेत्र को दे दिया जाए. अगर हर जगह पर निजी क्षेत्र ही बढ़िया सेवा दे सकता है तो सामाजिक सुरक्षा सरकार क्यों दे रही है?

वह कहते हैं कि आप एक कंपनी को कानून के द्वारा बना सकते हैं. लेकिन आप एक परिवार को कानून के द्वारा नहीं बना सकते. हां, कानून के द्वारा आप एक परिवार को नष्ट अवश्य कर सकते हैं.

उदाहरण के लिए गुरुमूर्ति ने घरेलू हिंसा कानून का उल्लेख किया और पूछा कि अगर पत्नी, पति के विरुद्ध शिकायत करती है तो उसके लिए नशे में पुलिस का अधिकारी आएगा जिस ने पति से ऑलरेडी घूस ले ली है.

प्रोग्रेसिव लोग यह समझते हैं कि उस पुलिस वाले के द्वारा और इस कानून को बनाकर वह घरेलू हिंसा को समाप्त कर देंगे. इस हिंसा को समाप्त करने में उन्होंने मोहल्ले, आस पास के पड़ोसियों और समुदाय के रोल पर जोर दिया.

गुरुमूर्ति के अनुसार पश्चिम की सभ्यता अनुबंध पर आधारित हैं; यहां तक कि पति पत्नी के मध्य संबंध भी एक समझौता है, कॉन्ट्रैक्ट है. जबकि भारत में ऐसा नहीं है और हमें इस बात को समझना होगा.

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