ऐसे भी आ सकती है मृत्यु जैसे आते हैं पक्षी…

सिर्फ़ एक गमछा भी
हो सकता है आदमी का सबसे बड़ा मित्र
एक साइकिल भी उतनी ही निष्ठा
और उतने ही ताप से निभा सकती है प्रेम
वर्षों वर्षों तक

एक चुप रहना भी हो सकता है
भरी सभा में सबसे तेज़ बोलना

एक जोड़ी चप्पल भी काफ़ी है
सारे भूगोल को नाप डालने के लिए

एक साधु
एक फ़क़ीर
एक भिक्षुक भी दे सकता है साथ
जीवन की लम्बी उदास यात्रा में

एक झांझ
एक मजीरा
एक पुराना ढोलक भी पहुँचा सकता है
उदात्त ऊँचाइयों तक

एक पगडंडी
एक बस का पायदान
एक फुटपाथ भी बहुत है
जीवन-भर सिर्फ़ चलते रहने
और कहीं पहुँचने के तिलिस्म को
ध्वस्त करने के लिए

कौन कह सकता था
कि ऐसे भी आ सकती है मृत्यु
जैसे आते हैं पक्षी…

– केदार नाथ सिंह

Comments

comments

loading...

LEAVE A REPLY