मैं गोधरा हूँ : मैं तुम्हें भूल जाऊं ये हो नहीं सकता, तुम मुझे भूल जाओ ये मैं होने नहीं दूँगा

भारत पायनियर है… दुनिया में आप जो कुछ भी देखते हैं उसका कोई न कोई छोर भारत से आ कर जुड़ ही जाता है.

अगर हवाई जहाज़ हैं तो वो रामायण काल में ही मौजूद थे हमारे पास, चाहे प्लास्टिक सर्जरी हो जनरल सर्जरी या कोई मुद्दा, सबका उदय सबसे पहले भारत में ही हुआ है.

एक न्यूज़ आयी कि ISIS ने मासूम बच्चों पर पेट्रोल डाल कर उन्हें आग के हवाले कर दिया, इसका बाकायदा वीडियो भी जारी किया गया.

पूरे विश्व में हाहाकार मच गया, भारत में भी हाहाकार मच गया…

विश्व के लिए यह अब तक कि घिनौनेपन की सबसे घटिया हरकत थी इसलिए उनका चिल्लाना चीखना जायज़ था, पर भारत के लोगों का रोना पीटना मुझे समझ नहीं आया, आखिर हम हर चीज़ में पायनियर जो रहे हैं.

मासूम बच्चों को पेट्रोल डाल कर ज़िन्दा जलाने की जिस घटना को यूरोप US 2016 में देख रहा था उसे हम 2002 में ही देख चुके थे, गोधरा में…

जी हाँ, जिस तरह हर चीज़ का एक प्रोटोटाइप या पायलट प्रोजेक्ट होता है उसी प्रकार उस घटना का प्रोटोटाइप यानी पायलट प्रोजेक्ट भारत के गोधरा में सफलतापूर्वक अंजाम दिया गया था.

लेकिन विश्व को ये सब ना दिखा बल्कि यूँ कहूँ कि जानबूझ कर नज़रअंदाज़ कर दिया तो बेहतर होगा.

इसे नज़रअंदाज़ करना विश्व को इतना महंगा पड़ा कि बाद में उन्हें अपने बच्चों को ज़िंदा जलवा कर इसकी कीमत अदा करनी पड़ी.

तब अचानक ISIS विश्व का सबसे बुरा संगठन हो गया था और उसे पूरे विश्व से तुरंत खत्म करने की अर्जेंसी आ गयी थी…

लेकिन ये अर्जेंसी उस समय नहीं दिखाई गई जब गोधरा में ट्रेन के डिब्बों को बंद कर के उनमें पेट्रोल और मिट्टी का तेल अंदर उंडेला जा रहा था और उसके बाद मासूम बच्चों और महिलाओं को जिंदा जला दिया गया.

आग में जलते बच्चे चीखते पुकारते ट्रेन के डब्बे के अंदर भाग रहे थे, अपनी जलती हुई माँ से लिपट कर जल कर राख हो गए.

16 साल बीत चुके हैं… आज तक किसी मुस्लिम नेता ने इसके लिए माफी नही मांगी…

क्या ओवैसी, आज़म खान, शाही इमाम, देवबंद के मौलानाओं सहित देश के सभी मुस्लिम पैरोकारों को मासूम बच्चों और महिलाओं को ज़िंदा जलाने के लिए देश से माफी नही मांगनी चाहिए?

मैं तुम्हे भूल जाऊं ये हो नहीं सकता, तुम मुझे भूल जाओ ये मैं होने नहीं दूँगा – मैं गोधरा हूँ.

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