कामयाब लोगों की ज़िंदगी की सच्‍चाई : क्‍या आप भी चाहते हैं ऐसी कामयाबी!

ज़रूरी नहीं कि हर कामयाब दिखने वाला व्यक्ति सचमुच कामयाब हो. आमतौर पर जो ताकतवर है, पैसेवाला है, वैभवपूर्ण जीवन…

जरूरी नहीं कि हर कामयाब दिखने वाला व्यक्ति सचमुच कामयाब हो. आमतौर पर जो ताकतवर है, पैसेवाला है, वैभवपूर्ण जीवन जीते दिखाई पड़ता है, उसे कामयाब मान लिया जाता है. फिर यदि ये कहा जाए कि जिसके पास ये सबकुछ है वो खुश नहीं है, परेशान रहता है, बीमारियों और बुरी लतों से घिरा हुआ है तो? तब भी कई लोग आंखों पर पट्टी बांधे यही सोचेंगे नहीं हमें ये सब मिलेगा तो हम बहुत खुश रहेंगे.

दरअसल, वैभव, धन, ताकत में कोई बुराई नहीं है, बल्कि जिन लोगों ने इनका सही इस्तेमाल किया है, उन्हें ही दुनिया याद रखती है. फिर ऐसे भी बहुत से लोग हैं, जिनके पास ये सबकुछ नहीं था, लेकिन फिर भी उन्होंने दुनिया को वो सबकुछ दिया, जो कोई ताकतवर इंसान दे सकता था.

यूं तो उदाहरणों कोई कमी नहीं, लेकिन सैंकड़ों साल बाद भी जिन दो हस्तियों का हम समाज में महत्वपूर्ण योगदान मानते हैं, उन्हें उदाहरण के तौर पर अपने सामने रखते हैं.

एक बुद्ध और दूसरे कबीर. एक राजा के घर पैदा हुए और तमाम सवालों में घिरे रहे. अंततः सबकुछ छोड़ने के बाद ही सत्य की खोज की शुरुआत कर पाए. दूसरे हैं कबीर, जिनके माता पिता तक का पता नहीं था.

गरीब जुलाहे ने पाला खुद भी ताउम्र जुलाहे का ही काम करते रहे, लेकिन पहुंचे वहीं जहां राजा के हर पैदा हुआ गौतम पहुंचा था. बात सिर्फ आध्यात्मिक जीवन में उन्नति पाने वालों तक सीमित नहीं हैं. व्यवसाय, विज्ञान, राजनीति, शिक्षा और अन्य तमाम क्षेत्रों में भी आपको ऐसे लोगों की बहुतायत मिलेगी, जिन्होंने सचमुच सफलता को पाया.

एक तरह से देखा जाए तो हम इन लोगों को आदर्श के तौर पर सामने रखते तो हैं, लेकिन सचमुच आदर्श बनाते नहीं हैं. इस फर्क को समझने के लिए हमें मानने और करने के फर्क को समझना होगा. बेशक हम इन सभी बड़े-बड़े व्यक्तित्वों के जीवन के बारे में जानकर उनसे प्रभावित तो होते हैं, लेकिन हम बनना किनकी तरह चाहते हैं?

हम अपने आसपास जो भी लोग दूसरों पर अधिकार जमाते दिखते हैं, ज्यादा धनवान दिखते हैं, ज्यादा लोगों के बीच पूछ परख वाले दिखते हैं, उनकी तरह बनना चाहते हैं. बहुत से तो ऐसे भी हैं, जो ऐसे लोगों के इर्दगिर्द बने रहने या उनके खास लोगों की सूची में शामिल होने को ही कामयाबी समझते हैं. आरामदायक जिंदगी को भी कामयाबी कहा जाता है, तो औरों की तारीफों में कई लोग अपनी कामयाबी को तलाशते हैं.

कामयाबी क्या है? इस सवाल का जवाब किसी और से कभी लिया ही नहीं जा सकता हैं. हां ये जरूर है कि सही तरीके से जवाब ढूंढा जाए, तो खुद इस सवाल का जवाब जरूर पाया जा सकता है. अपने जीवन में मिली कामयाबी के किसी भी मौके को याद कीजिए. वो कोई भी ऐसा मौका हो सकता है, जब आप बहुत खुश हुए हों. किसी के जन्म पर, किसी के मिलने पर, कुछ पाने पर आदि जैसे छोटे बड़े कई मौके आपके जीवन में हो सकते हैं.

अब वहीं दूसरी ओर, जरा किसी ऐसी घटना को याद करते हुए उसी समय में जाने की कोशिश करिए. कुछ देर के लिए फिर वैसा ही महसूस करने का प्रयास कीजिए. ये अहसास ही आप बार बार जीवन में चाहते हैं क्‍योंकि ये स्थायी नहीं होता, इसलिए कुछ देर रहने के बाद आप दोबारा वहीं होते हैं, जहां से आपने शुरुआत की थी. ये प्रक्रिया ऐसे ही चलती रहती है. फिर एक समय ऐसा आता है, जब आप और बेहतर की एक अनंत दौड़ में दौड़ने लगते हैं. खुशी चाहे छोटी वजहों से मिले या बड़ी वजहों से उसके स्वरूप में कोई बदलाव नहीं होता, हां वजहें बदलती जाती हैं और इन बदलती वजहों से भी आप बोर होने लगते हैं.

यही वजह है कि कई लोग जिन्हें आप कामयाब समझते हैं, हकीकत में वे बहुत ही दयनीय जीवन जीते हैं. यदि उनके पारिवारिक जीवन को आप देखें या उनकी मानसिक स्थिति को समझने का आपको मौका मिले, तो आप कहेंगे ईश्वर दुश्मन को भी ऐसी कामयाबी न दे. इस अनंत दौड़ में कुछ पाने, दूसरों की नजरों में कुछ बनने और फिर उस स्थिति को बरकरार रखने के लिए प्रयासरत रहते हैं. पाने और बनने में भी कोई बुराई नहीं है बुराई है उसके नहीं मिलने पर होने वाली बेचैनी से.

दरअसल, कामयाबी खुशी का नाम है न कि लत का नाम. ये खुशी जब लत बन जाती है, तो हमारे निजी जीवन और सोच को छिन्न-भिन्न कर देती है. कामयाबी के मतलब को समझने के लिए अपने भीतर झांकने और अपनी खुशी को जानने की जरूरत है.

बाहर दुनिया बहुत झूठी है, आपको ये दुनिया खूबसूरत लगे इसलिए बहुत से स्वांग रचे गए हैं. आप इसी झूठ को कामयाबी का सच मान लेंगे तो भटकाव शुरू हो जाएगा. खुद के साथ कुछ समय बिताइए और रोज खुद से सवाल पूछकर खुद से जवाब लेने का एक अभ्यास शुरू कीजिए. समय लगेगा, लेकिन वो समय भी आएगा जब आप ठीक-ठीक वो जवाब पाएंगे जो आपके लिए ज़रूरी हैं.

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