जेहाद हमारे घरों में घुसा है, हम उड़ा रहे हैं कबूतर

एक विश्वविद्यालय है- जेएनयू. पिछले साल इसी फरवरी में वहां से देश के टुकड़े होने तक जंग होने की आवाज़ बुलंद हुई थी.

इस आवाज में एक आवाज़ उस पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष की थी, जो लड़की छेड़ने के जुर्म में सजायाफ्ता है, दूसरी आवाज़ उस जेहादी लड़की की थी, जिसे हाल ही में उसके मोमिन भाइयों ने इतना गरियाया कि उसे अपना ट्विटर अकाउंट डिलीट करना पड़ा.

इसके अलावा एक और आवाज़ उस जेहादी युवक की थी, जो खुद को कम्युनिस्ट और बिरसा, फुले, अंबेडकर की बिरादरी को आगे बढ़ानेवाला कहता था. उसका बाप सिमी का पदाधिकारी था और उस जेहादी के माथे के लाल परचम के नीचे भी फैज़ कैप छिपी मिलती थी.

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एक संस्था है जमीयत-ए-इस्लामी हिंद. इसका स्टूडेंट विंग (?) है एसआइओ, यानी स्टूडेंट्स इस्लामिक ऑर्गेनाइजेशन.

इन संस्थानों का प्रकट उद्देश्य जो भी हो, मुख्य मकसद जेहाद और दारुल-इस्लाम की स्थापना है, इसमें जिसको भी संदेह है, वे जाकर अपना इलाज करा लें.

इस संस्था की तीन दिनों तक एक बैठक चली, ठीक राष्ट्रवादी सरकार की नाक के नीचे, जिसमें इसके पूर्व अध्यक्ष ने साफ तौर पर इस्लामी राष्ट्र की मांग की- अगर ‘वे’ हिंदू राष्ट्र की मांग करते हैं, तो हमें भी इस्लामी वतन मांगने का पूरा हक है, हमें इस्लामी वतन चाहिए.

इस मूर्खाधिराज ने यह नहीं बताया कि हिंदू राष्ट्र कौन मांग रहा है, लेकिन इस सभा में जिग्नेश मेवाणी भी था, जो फिलहाल विधायक है. साथ ही जेएनयू का वह जेहादी भी था, जिसे अगला नेता तैयार किया जा रहा है.

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पानी हमारे-आपके गले के नीचे आ चुका है. आप करते रहिए गंगा-जमनी तहज़ीब. इस इस्लामी राष्ट्र की मांग को पूरी बेशर्मी से वह पक्षकार भी सपोर्ट करता है, जो ‘कौन जात हो’ कुमार का प्रिय है और उसके साथ वह लखनवी कबाब उड़ाते हैं.

एक खुले दिमाग वाला मोहम्मडन जब इनका विरोध करता है, तो उसपर ये सारे इस कदर पिलते हैं कि आखिरकार उसे अपना पोस्ट ही डिलीट करना पड़ता है. क्यों? क्योंकि उसने कहा कि सेकुलर भारत में इस्लामिक राज्य की बात करना वाहियात है.

एक खेल समझिए. भीम-मीम के गठजोड़ के सहारे पूरे देश को 2019 तक लहकाने की कोशिश चल रही है. गुजरात के ऊना से लेकर सहारनपुर होते हुए कासगंज तक यही आग भड़कायी जा रही है. कुछ खिलाड़ी भी चुन लिए गए हैं.

इन सबके पीछे जो मंच हैं, उनके नाम से आपको लगेगा कि कितनी संजीदगी और भाईचारा बिखेरा जा रहा है. जैसे, ‘यूनाइट अगेंस्ट हेट’ या ‘नॉट इन माइ नेम’ जैसे जो कैंपेन चल रहे हैं, उनमें से एक चलाने वाला शख्स ही इनके पीछे है, जो कांग्रेस की मदद से जिग्नेश के लिए फंड इकट्ठा करता है, जेएनयू के जेहादियों को मंच देता है और राहुल गांधी से लड़की छेड़नेवाले की मुलाकात कर गांधी वंशधारी के लिए हरावल दस्ते के लड़ाके तैयार करता है.

जिग्नेश विधायक बन चुका है. अगली बारी यूपी से है जहां से जेहादी बालिका और मोहित पांडे को झाड़ पर चढ़ाया जाएगा. बेगूसराय से लड़की छेड़नेवाले की तैयारी ऑलरेडी चल रही है. ये सब कुछ कांग्रेस की सरपरस्ती में बड़े आराम से हो रहा है.

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मुझे नहीं पता कि आप में से कितनों को ये बात समझ में आएगी? कबूतर हिंदुओं को अपने सामने फैला ख़तरा दिखाई देता तो 1200 वर्षों की गुलामी हमारे नसीब में नहीं होती.

हालांकि, ख़तरा बहुत गंभीर है, क्योंकि अंबेडकराइट अपने तुच्छ गोल के लिए आने वाला खतरा समझ नहीं रहे और जमीयत पूरे भारत में गजवा-ए-हिंद करने के लिए तैयार खड़ी है.

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