इन बच्चों के हत्यारे इनके मां-बाप हैं

एक बार एक सीरीज लिखी थी, आजकल के बच्चों और उनके मां-बापों पर, स्कूलों पर. खासकर प्राइवेट स्कूलों पर. तब तड़कुल अस्पताल में भरती था, और मैं लगातार सड़क पर स्कूल बसों का आनाजाना, अभिभावकों का बच्चों को लाना, ले जाना देखता था. तब मैंने कहा था, अभिभावक ही बच्चों के हत्यारे हैं. इस पर पूरी सीरीज भी लिखी थी.

मुज़फ्फरपुर में कल स्कूली बच्चों पर बोलेरो चढ़ गयी. 19 को रौंदा, 9 वहीं मरे, आज भी एकाध की मौत हुई ही होगी.

मैं फिर से कहता हूं, उन बच्चों की हत्या उनके अभिभावकों ने की है. यह मैं पूरे होशोहवास में कहता हूं. मैं ये भी कहता हूं कि रोज़ाना ही नौनिहालों की हत्या नहीं होती, यही गनीमत की बात है, ईश्वरीय कृपा है.

मेरी बात पर यकीन नहीं होता तो कभी भी छुट्टी के वक्त किसी भी स्कूल (निजी-सरकारी) के गेट पर जाकर खड़े हो जाइए. पूरी तरह रफ्तार से चल रही सड़क पर सैकड़ों बच्चे अचानक आते हैं, उनको गाइड करनेवाला कोई नहीं होता और फिर भी वे बच जाते हैं. ये चमत्कार नहीं तो और क्या है?

ये वही अभिभावक हैं, जिन्हें खुद चलने का शऊर नहीं है, न ये अपने बच्चों को कुछ सिखाते हैं. आप मुज़फ्फरपुर, दरभंगा, पटना, भागलपुर, पूर्णिया…. बिहार के किसी भी कस्बे में चले जाइए, लगेगा सड़कों पर मौत का खेल हो रहा है, जिससे जांबाज़ खिलाड़ी किसी तरह बच रहे हैं. ये ही लापरवाह अभिभावक भी हैं, इनके ही बच्चे भी हैं.

यह हालांकि विषयांतर होगा लेकिन क्या अभिभावक कभी देखता है कि जिस वैन में वह भेड़-बकरी की तरह अपने बच्चे को भेज रहा है, उसके ड्राइवर के पास लाइसेंस है क्या? क्या वह यातायात नियमों का पालन कर रहा है क्या? उसे गाड़ी चलाने, सभ्य बर्ताव करना आता है क्या? क्या वह पीटीएम में इन मसलों को उठाता है?

इन सबका जवाब नहीं में है. आखिरी बात, इस देश में जनसंख्या इतनी अधिक है कि हम मानव-जीवन का मूल्य ही भूल गए हैं. यहां तो 9 ही मरे हैं. 900 या 9000 के पहले तो हमारा रोआं भी नहीं हिलता.

गाड़ी पर भाजपा नेता का बोर्ड लगा था. सियासत शुरू. दो बयान सामने आ रहे हैं. एक, चालक अप्रशिक्षित था, दूजे उसने शराब पी रखी थी. पहले बिंदु पर केवल इतना कहना है कि बिहार के तमाम टेंपो, टेलर, महिंद्रा, पिकअप, स्कॉर्पियो वाले बिना लाइसेंस के ही घूमते हैं- लगभग 90 फीसदी. 13 साल के लौंडे 8-8 सवारी बिठाकर टेंपो दौड़ाते है, लोग उसमें बाखुशी चढ़ते हैं, दुर्घटना हो जाए तो रोना-पीटना तो बिहारियों को आता है ही.

दूसरे, नीतीश कुमार की सरकार है. सख्त शराबबंदी है. उसका भी नमूना हो सकता है, मुझे इसमें कोई संदेह नहीं. बहरहाल, लीपापोती हो भी चुकी है. बहुत तेज़ी से काम चल रहा है. कल तक यह खबर उतर भी जाएगी.

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