शनि की साढ़े साती : ज्योतिष का सामान्य ज्ञान

ज्योतिष में जब हम गोचर का विचार करते हैं तो इसको लेकर विद्वानों में तीन राय हैं.

कुछ कहते हैं कि गोचर का विचार लग्न कुंडली के आधार पर की जानी चाहिये. कुछ के हिसाब से इसका विचार चन्द्र कुंडली के हिसाब से करनी चाहिये और कुछ कहते हैं कि गोचर विचार करते समय लग्न और चंद्र दोनों कुंडलियों को ध्यान में रखना आवश्यक है.

बहरहाल जब हम शनि की साढ़े साती या ढैया के लिये गोचर विचार करते हैं तो इसका एकमात्र आधार चंद्र कुंडली है.

इसका अर्थ ये है कि आप अपनी कुंडली में चंद्रमा को केंद्र में बिठाइए और तदनुरूप बाकी ग्रहों को बिठाइए और फिर गोचर का विचार करिये.

शनि गोचरवश भ्रमण करते हुये अगर आपके चंद्रमा के एक घर पीछे, उसके साथ या उसके एक घर आगे है तो आपकी साढ़े साती चल रही है.

उदाहरण के लिये आजकल शनि गोचरवश धनु राशि (राशि क्रम में 9वां) में भ्रमणरत हैं तो इसका अर्थ ये है कि अभी धनु राशि वालों, धनु से पीछे वाली राशि वृश्चिक (राशिक्रम में ८वीं) और धनु के आगे वाली राशि मकर (राशि क्रम में दसवीं) वाले लोगों की साढ़े साती चल रही है.

इसका अर्थ ये है कि जब-जब गोचरवश शनि आपके जन्म के समय के चंद्रमा के पिछले घर में आता है तो आपकी साढ़े साती शुरू हो जाती है और फिर आपके जन्म के समय के चंद्रमा के अगले घर में रहने तक आपकी साढ़े साती चलती रहती है.

चूँकि गोचरवश शनि का भ्रमण एक राशि पर ढ़ाई वर्षों का होता है तो “ढ़ाई+ढ़ाई+ढ़ाई= साढ़े सात साल” तक आप साढ़े साती से पीड़ित रहते हैं.

सहज भाषा में हम ऐसा भी कह सकते हैं कि गोचरावस्था में जब शनि किसी व्यक्ति के जन्म की राशि से बारहवें, प्रथम तथा दूसरे स्थान पर हो तो शनि की इस गोचर-स्थिति शनि की साढ़े साती कहलाती है.

जैसे वर्तमान समय में शनि (Saturn) धनु राशि में है इसलिए धनु राशि से द्वादश राशि वृश्चिक हुआ तथा धनु से द्वितीय मकर राशि हुआ अतः वर्तमान समय में वृश्चिक, धनु तथा मकर राशि वाले जातकों की साढ़े साती चल रही है.

यानि अभी मकर राशि वालों की साढ़े साती शुरू हुई है, वृश्चिक वालों के लिये समाप्ति काल में है और धनु राशि वालों के लिये साढ़े साती की मध्य अवधि है.

संक्षेप में समझें तो शनि अगर गोचरवश मेष राशि में हैं तो मीन, मेष और वृष राशि वालों की साढ़ेसाती चलेगी.

इसी तरह शनि जब मेष से निकल कर वृष में जायेंगे तो मीन वालों की साढ़े साती खत्म होगी और मिथुन वालों की शुरू हो जायेगी.

फिर शनि के मिथुन में जाने पर मेष वालों की साढ़े साती ख़तम होगी और कर्क वालों की शुरू हो जायेगी.

राशियों का क्रम इस प्रकार है:-
मेष-१
वृष-२
मिथुन-३
कर्क-४
सिंह-५
कन्या-६
तुला-७
वृश्चिक-८
धनु-९
मकर-१०
कुम्भ- ११
मीन-१२

कई लोगों को इन सब बातों की जानकारी होगी, ये लेख केवल उनके लिये है जो इन शब्दों को सुनते तो हैं पर इसके बारे में जानकारी नहीं होती कि ये साढ़े साती, ढैया वगैरह है क्या…

अगले भाग में हम जानेंगे कि क्या साढ़े साती से भयभीत होने की जरूरत है? क्या ये सबको नुकसान ही पहुँचाती है वगैरह-वगैरह…

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