श्रीदेवी : एक उदास सौंदर्य की कहानी

करीब दो साल पहले मैं अपनी एक्टिवा निकाल रही थी तभी सामने से एक आंटी गुजरी, रुक गयी मुझे ध्यान से देखने लगी और बोली ” हम परिवार वाले जब भी श्रीदेवी की कोई फिल्म टीवी पर देखते हैं तो आपस में बात करते हैं कि गुड़िया बिलकुल श्रीदेवी सी लगती है.

मैं थोड़ा चौंक कर – क्या?

उन्होंने कहा कि हाँ तुरंत तुम्हारा ध्यान आता है. मैं हंस दी अच्छा ये तो अच्छी बात बताई आपने कह चल दी. पर ये होता है हम किसी एक्टर एक्ट्रेस से तभी ज्यादा जुड़ते जब उसकी शकल हम से मिलती या हम उसके करीब होते हैं.

पर मैं इस तरह श्रीदेवी से नहीं जुड़ी. बात 1086 की है. दूरदर्शन पर “जूली” फिल्म आ रही थी …गीत था “माय हार्ट इस बीटिंग ” गीत तो तो साउथ एक्ट्रेस लक्ष्मी पर फिल्माया गया था पर साथ खड़ी उनकी बहन पर निगाह पड़ी मेरी.

मैंने कहा- मम्मी ये तो श्रीदेवी है न?

माँ ने भी बोला – हाँ जी ये श्रीदेवी है.

इसमें भी थी ये? फिर सफ़र शुरू हुआ अदाकारा को जानने का. माँ दुर्गा का एक नाम “श्रीदेवी”. तमिल मूल के पिता और तेलगु माँ की बड़ी बेटी श्रीदेवी 4 साल की उम्र से तेलगु फिल्म में काम शुरू किया. मज़बूत ही रही होंगी स्त्री की तरह श्रीदेवी. छोटा सफ़र तमाम मुश्किलें.

“जूली” श्रीदेवी की पहली बॉलीवुड की पहली फिल्म थी. गहरी आँखों और गहरे रंग वाली श्रीदेवी आप हर दिल अज़ीज़ थीं. खास कर अपने अंदाज़ “बलमा ” कहने के लिए.

श्रीदेवी को हिंदी नहीं आती थी. उनकी शुरुआती फिल्मो में अभिनेत्री नाज़ ने उनकी डबिंग की थी. सुना था नाज़ इतनी अच्छी डबिंग करती थी कि बाद में श्रीदेवी ने खुद की जब डबिंग की वो भी इतनी अच्छी नहीं थी.

नगीना हैं हरमेश मल्होत्रा की. सुपर डुपर हिट के साथ एक अफवाह उड़ी थी कि अधिक कॉन्टेक्ट लेंस ने श्री की आंखें खराब कर दी, उन्हें आंखों की ज़रूरत है. मैं इन सब से नहीं श्रीदेवी से जुड़ी.

मुझे श्रीदेवी के लहंगे, उनकी आंखें और वो खूबसूरती चाहिए थी. दिव्या भारती को श्रीदेवी की कॉपी माना जाता था. ऐसे में दिव्या की मौत से बॉलीवुड में पहली बार हुआ कि कॉपी की अधूरी फ़िल्म को ओरिजिनल ने पूरा किया ये फ़िल्म थी “लाडला”.

अबकी अफवाह थी श्रीदेवी की शादी की. जाग उठा इंसान के सेट पर मिथुन से ऐसा प्रेम हुआ कि दोनों ने गुपचुप शादी कर ली. मिथुन ने अफवाहों की पुष्टि की. पर योगिता बाली कमजोर न थी उन्होंने श्रीदेवी से साफ साफ बोला कि वो दो बच्चों का पिता है लौट कर बच्चों के पास ही आएगा. और इस बात ने मिथुन और श्रीदेवी को दूर कर दिया.

श्रीदेवी आगे बढ़ती गयी… बढ़ती गयी… हिट फिल्में ….खूबसूरत श्रीदेवी अकेली श्रीदेवी …कहते हैं खूबसूरती उदास होती है ….और श्री देवी की माँ ये उदासी जानती थी ….अपनी बीमारी के दौरान बोनी कपूर के सहयोगी स्वभाव से प्रभावित हो श्री की माँ ने श्रीदेवी को बोनी से शादी करने को बोला.

श्रीदेवी ने माँ की बात मानी और तमाम बदनामी ले ली एक सुरक्षा के लिए ….मैं यहीं से श्रीदेवी की उम्र गिनने लगी …..बोनी की पहली पत्नी मोना शौरी कोई हल्का नाम नहीं था. जानीमानी प्रोड्यूसर सत्ती शौरी की बेटी …न बोनी का तलाक आसान, न ही श्रीदेवी को कपूर फैमिली मां सम्मान मिलना आसान.

पूर्व सहकलाकार अनिल ने भी देवर की भूमिका में कोई भूमिका नहीं निभाई. अर्जुन ने तो माँ की भूमिका में श्रीदेवी को देखा ही न ….ऐसे में मोना की मृत्यु ने ये घाव गहरे किये हालांकि दूसरी पत्नी का चलन बॉलीवुड में श्रीदेवी ने कोई पहली बार न चलाया पर अफवाहों ने काफी नकरात्मक किया इस विवाह को.

श्री ने खुद को बॉलीवुड से दूर कर लिया. पहली बेटी हुई जहान्वी. सबने श्रीदेवी के लौटने का सोचा पर श्री नहीं लौटी. दूसरी बेटी हुई, श्री नहीं लौटी. श्री तो पत्नी और माँ की भूमिका निभा रही थी.

पर उनकी मौत ने साबित कर दिया वो घुटी ज्यादा थी, जी नहीं थी खुद को. चका चौंध देता भी छीनता भी है. श्रीदेवी शायद किसी अपराधबोध में थी जो मेकअप लाइट की परत में उन्हें खा रहा था अंदर ही अंदर. श्रीदेवी ने कमबैक किया बहुत ही सुलझी हुई अभिनेत्री की तरह बिना लटके झटके की “इंग्लिश विंग्लिश “से.

वो शायद श्रीदेवी की चमक का सबसे अनमोल हीरा निकला. जो माँ है जो पत्नी है वो एक लौटी हुई सशक्त अभिनेत्री है. इंग्लिश विंग्लिश में एक घरेलू स्त्री की परिपक्व भूमिका जो खुद से इंग्लिश सीख एक व्यक्तित्व गढ़ती है.

श्री ने उम्र और भूमिकाओं में परिपक्वता को संभालते हुए वापसी में कम फ़िल्में की पर अच्छी फिल्म की वो दूसरा हीरा था “मॉम”. बलात्कार पीड़िता बेटी की सशक्त माँ जो अपनी बेटी को न्याय दिलाती है.

“मॉम” को जब मैं सिनेमा हॉल में देख रही थी तभी उनकी आवाज़ में एक कमजोरी दिखी. माँ को मैंने बोला भी था और अपने रिव्यु में मैंने लिखा भी था क्या थी ये कमजोरी? क्यों थी ये कमजोरी? 6 -7 महीने के बाद श्री देवी की मौत ने क्यों थी ये कमजोरी ये बता दिया.

श्री तो खामोश हो गयी पर बॉलीवुड में घुटन की चीख तय कर गया. मैं आज भी श्रीदेवी के जाने को आकस्मिक घटना नहीं मानती. ये खामोशियों की चीख है और बहुत से सवाल हैं बॉलीवुड में पर्दे के पीछे के खोखले जीवन पर.

श्री देवी तुमने पूरी शिद्दत से कहा था “दर्दे ए दिल दर्दे जिगर हम सहते रहे, एक दूसरे से यूँ ही कहते रहे ” …..तुम्हारा कोई दूसरा था क्या एक उदास सौंदर्य …..सवाल सिर्फ सवाल.

Comments

comments

loading...

LEAVE A REPLY